कुपोषण मुक्त भारत अभियान, स्वस्थ रहें हमारी संतान-तिवारी।। Raebareli news ।।

महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित पोषण माह पर परिचर्चा 20 सितम्बर को

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय सम्मान 2020 की तैयारियां तेज

रजनीकांत अवस्थी

रायबरेली: देश मे पोषण माह जागरूकता अभियान के तहत आयोजित होने वाले डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय सम्मान 2020 की तैयारियां राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत परिवार ने तेज की। देश के 101 विशेष व्यक्तियों को सम्मानित करने की योजना के साथ महिला व बाल विकास मंत्रालय की तरफ से चलाए जा रहे पोषण माह में नीति आयोग के आग्रह पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत ने यह कार्यक्रम पोषण माह को समर्पित किया है, जिसमे गूगल मीट पर कुपोषण मुक्त भारत पर चर्चा होगी, और सभी प्रतिभागियों को कलाम सम्मान से नवाजा जाएगा, इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने सभी सदस्यों व सहयोगियों से ट्रस्ट को दान राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

      आपको बता दें कि, कोरोना महामारी के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता  संगठन भारत ने लाखों रुपयों की मदद जरूरतमन्दों को की थी,     कम्पनियां बन्द होने की वजह से रेगुलर डोनेशन आने की प्रक्रिया बन्द होने की वजह से हमारे संगठन परिवार ने सदस्यता अभियान शुरू किया है, ज्यादा से ज्यादा सहयोगियों को जोड़कर जरूरी राहत सामग्री, जरूरतमन्दों तक पहुँचाने का प्रयास जारी है, इस बीच यूनिसेफ, यूनाइटेड नेशन, व भारत सरकार की गाइडलाइन की चर्चा करते हुए सभी सदस्यों से कुपोषण मुक्त भारत पर शपथ वीडियो जारी करके जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन  के राष्ट्रीय अध्यक्ष सागेश कुमार भाटी ने कहा कि, महिलाएं शपथ लें कि, जब उनकी बहु गर्भवती होगी, वे उनकी पूरी देखभाल करेंगी, उन्हें पोषक आहार जैसे हरी सब्जि़यां, दालें, अण्डे, फल आदि उचित मात्रा में देंगी। वे उन्हें आयोडीन युक्त नमक में पका भोजन देंगी तथा आयरन फोलिक एसिड की गोलियां देंगी।

      गुमान सिंह सैनी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि, युवा पुरुषों को शपथ लेनी चाहिए कि, वे गर्भावस्था के दौरान अपनी पत्नी का पूरा ख्याल रखेंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि, वह समय पर खाए और पर्याप्त आराम करे।    सातवें महीने से वे सुनिश्चित करेंगे कि, उनके बच्चे को स्तनपान के साथ घर का बना पोषक आहार मिले। महिलाएं शपथ लें कि, वे अपने नवजात शिशु को अपना पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) देंगी, और पहले छह महीने अपने बच्चे को केवल स्तनपान कराएंगी। जब उनका बच्चा सातवें महीने में प्रवेश करेगा, वे उसे स्तनपान के साथ घर का पका स्वास्थ्यप्रद भोजन भी देंगी।

     राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी एवं राष्ट्रीय अनुशासन मंत्री ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि,18 साल की उम्र से पहले एक लड़की शारीरिक और मानसिक रूप से माँ बनने की जि़म्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती। ऐसे मामलों में उसके बच्चे को हमेशा कुपोषण के जोखिम का खतरा होता हैं।    इसलिए 18 साल से पहले अपनी बेटी की शादी के बारे में कभी भी न सोचें। अभिभावक शपथ लें कि, वे 18 साल की उम्र से पहले अपनी बेटी की शादी नहीं करेंगे, और वे सुनिश्चित करेंगे कि, उसका होने वाला बच्चा कुपोषण से सुरक्षित रहे। युवा पुरुष शपथ लें कि, वे 18 साल से कम उम्र की लड़की से शादी नहीं करेंगे, ताकि उनका होने वाला बच्चा कुपोषण से सुरक्षित रह सके। सरपंच (गांव के मुखिया) शपथ ले कि, वह गांव में किसी भी लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले नहीं होने देगे। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि, उसके गांव मे कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न हो। हमारा संगठन हर साल कुपोषण मुक्त भारत का मिशन चलाता रहेगा और अनेकों कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। इस बार कोरोना की वजह से वर्चुवल शो का आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की प्रदेश सचिव आरती चौरसिया, कानपुर जिला अध्यक्ष अंकुर निगम के साथ-साथ कई महिलाओं ने परिचर्चा की।



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