यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा से कायम माना जाता रहा है। आबादी के लिहाज से लगभग 12% ब्राह्मण हैं। 2017 में बीजेपी को ब्राह्मणों का पूरा सपोर्ट मिला, लेकिन सरकार में उतनी हनक नहीं दिखी।
शिवाकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: यूपी की राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा से माना जाता रहा है। लेकिन योगी सरकार के 2017 में सूबे की सत्ता में आने के बाद कई ब्राह्मणों की हत्याओं के मामले सामने आए हैं। उससे न सिर्फ ब्राह्मण संगठन आगबबूला हैं, बल्कि विपक्षी दल भी योगी सरकार पर ब्राह्मणों की ‘उपेक्षा’ के आरोप लगा रहे हैं।
आपको बता दें कि, यूपी के गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के तरीके को लेकर उठ रहे सवालों ने जहां यूपी में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। वहीं प्रदेश के तमाम ब्राह्मण संगठन इस मुद्दे पर मुखर हैं। वह विकास को ‘आरोपी और अपराधी तो मानते’ हैं लेकिन उसके एनकाउंटर के तरीके और पुलिस द्वारा उसके परिवार को प्रताड़ित करने के आरोपों पर आगबबूला भी हैं। ‘विकास दुबे को अपराधी सभी मानते हैं, लेकिन उसको सजा देने का ये तरीका ठीक नहीं। पूरी फिल्मी स्क्रिप्ट के तहत उसे मारा गया।’
प्रदेश में बढ़ रहे अपराधों पर यूथ कांग्रेस पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष आशुतोष सिंह का आरोप है कि, ब्राह्मणों पर अत्याचार इस सरकार में लगातार बढ़ा है। बीते 72 घंटे पूर्व रायबरेली के बछरावां थाना क्षेत्र के बलाई मऊ गांव में एक वर्ग विशेष के गुंडों ने ब्राह्मण परिवार के साथ मारपीट तथा धारदार हथियार से महिला के कान काटे हैं, तथा 9 लोगों को लहूलुहान किया है, जो पुलिस की संवेदनहीनता और सरकार के नपुंसक सिस्टम को दर्शाता है। यहां जिस तरह एक ब्राह्मण परिवार के साथ एक वर्ग विशेष के गुंडों ने बर्ताव किया है, वह कायरता पूर्ण है। यहां दबंगों द्वारा किया गया अत्याचार संवैधानिक मूल्यों की हत्या है। हमारा संविधान इजाजत नहीं देता है कि, कोई संस्थान या कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में ले।
मौजूदा प्रदेश सरकार में लगातार ब्राह्मणों की हत्याएं हो रही है। ब्राह्मणों के साथ मारपीट की जा रही है। बहू बेटियों को बेइज्जत किया जा रहा है। पिछली सरकारों में भी ब्राह्मणों के साथ हिंसा हुई, लेकिन इस सरकार में ऐसे मामले अधिक बढ़ गए हैं। वे बताते है कि, विगत जून-जुलाई के 11 दिनों में 23 ब्राह्मणों की हत्याएं हुई हैं। योगी सरकार बनते ही जून 2017 में रायबरेली के ऊंचाहार में पांच ब्राह्मण ज़िंदा जलाए गए। इन मामलों में ठीक तरह से जांच हो, इसके लिए ब्राह्मण संगठनों की ओर से प्रेशर डाला गया, तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जागी।
इसके बाद लगातार ब्राह्मणों की हत्याओं के मामले सामने आए, चाहे वह कमलेश तिवारी हत्याकांड रहा हो, या मैनपुरी के नवोदय स्कूल की छात्रा के संदिग्ध आत्महत्या का मामला रहा हो, अधिक चर्चित हत्याकांड अथवा जुल्म जाजती या फिर सोसाइट एक ही जाति के लोगों के हैं। मेरे मुताबिक योगी सरकार ब्राह्मण विरोधी है, ये कहने में कोई गुरेज नहीं है। जिस तरह से ब्राह्मणों का दमन किया जा रहा है, उससे साबित है कि, सरकार ब्राह्मण विरोधी है।

0 टिप्पणियाँ