हाथरस मामले में बैकफुट पर यूपी सरकार, कांग्रेस यूपी भर में दे रही राज्य सरकार के खिलाफ धरना
रजनीकांत अवस्थीमहराजगंज/रायबरेली: हाथरस की निर्भया के साथ पहले तो हैवानों की दरिंदगी और फिर पुलिसवालों की अमानवीयता से देश भर में लोगों के अंदर गुस्सा है। इतना ही नहीं परिवार की गैर-मौजूदगी में पुलिस ने देर रात पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया है। हाथरस कांड के जांच के लिए यूपी सरकार ने भले ही एसआईटी का गठन कर दिया हो, सीबीआई से जांच कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन उपचुनाव से पहले विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान हो गाया है। उपचुनाव की 7 सीटों पर 3 नवंबर को वोटिंग होगी, जिन पर 3 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें फिरोजाबाद की टूंडला, बुलंदशहर सदर, अमरोहा की नौगांवा सादात, कानपुर की घाटमपुर, उन्नाव की बांगरमऊ, जौनपुर की मल्हानी और देवरिया सदर सीटें शामिल हैं। इनमें से छह सीटें बीजेपी के पास हैं, और एक सीट पर सपा का कब्जा था। 2022 के सेमीफाइल माने जा रहे उपचुनाव से पहले विपक्ष ने कानून-व्यवस्था के नाम पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया। हाथरस कांड को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस हाथरस की बेटी के इंसाफ के लिए प्रदेश व्यापी आंदोलन के साथ सड़क पर उतरी है। सूबे में जालौन, सोनभद्र, आजमगढ़, लखनऊ, चित्रकूट समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और उन्हें गिरफ्तार किया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता सीएम आवास का घेराव करने जा रहे थे, उस दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। इतना ही नहीं हाथरस जाते हुए बदायूं हाइवे पर यूपी कांग्रेस महासचिव ब्रह्मस्वरूप सागर और असलम चौधरी समेत कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस प्रदेश सचिव सुशील पासी ने कहा कि, ये सब सिर्फ दलितों को दबाकर उन्हें समाज में उनका 'स्थान' दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की शर्मनाक चाल है। कांग्रेस की लड़ाई इसी घृणित सोच के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि, भारत की एक बेटी का रेप कर कत्ल किया जाता है, तथ्य दबाए जाते हैं, और अंत में उसके परिवार से अंतिम संस्कार का हक भी छीन लिया जाता है। इससे पहले कांग्रेस के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा था कि, उत्तर प्रदेश के 'वर्ग-विशेष' के जंगलराज ने एक और युवती को मार डाला। श्री पासी ने अपने बयान में आगे कहा कि, प्रियंका गांधी ने अपने बयान में बताया है कि, जब पीड़िता के पिता को उसकी मौत का पता चला था, तब वो उनके साथ फोन पर थीं' प्रियंका ने बताया है कि, रात को 2.30 बजे परिजन गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन हाथरस की पीड़िता के शरीर को यूपी प्रशासन ने जबरन जला दिया। पीड़िता की मृत्यु के बाद सरकार ने परिजनों से बेटी के अंतिम संस्कार का अधिकार छीना और मृतका को सम्मान तक नहीं दिया। घोर अमानवीयता! आपने अपराध रोका नहीं बल्कि अपराधियों की तरह व्यवहार किया। अत्याचार रोका नहीं, एक मासूम बच्ची और उसके परिवार पर दोगुना अत्याचार किया। योगी आदित्यनाथ इस्तीफा दो। आपके शासन में न्याय नहीं, सिर्फ अन्याय का बोलबाला है। उधर उत्तर प्रदेश में सियासी जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। AAP सांसद संजय सिंह सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ठाकुरवाद के आरोप में लगातार घेर रहे हैं। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर भी उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली से लेकर यूपी के तमाम जिलों में हाथरस की बेटी के इंसाफ की गुहार लगाई है। वहीं दलित नेताओं में भी राज्य सरकार के खिलाफ जमकर गुस्सा है। बीजेपी 14 साल के सियासी वनवास के बाद 2017 में सूबे की सत्ता में लौटी थी, तो दलित समुदाय की अहम भूमिका रही थी। दलितों में खासकर वाल्मिकी समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है। बसपा प्रमुख मायावती के जाटव प्रेम के चलते वाल्मिकी समुदाय सहित दलित समदुय की तमाम जातियां बसपा से छिटककर बीजेपी के साथ आई थीं। हाथरस की निर्भया इसी वाल्मिकी समुदाय से थी, जो सूबे में 3 फीसदी के करीब है, जबकि दलित समुदाय 20 फीसदी से ज्यादा है। इस घटना को लेकर दलित समुदायों में जबरदस्त गुस्सा है, और जिस तरह से विपक्ष राज्य सरकार को दलित विरोधी करार देने में जुटा है। अब यह मामला बीजेपी के लिए चिंता का सबब बन गया है। हाथरस कांड पर जिस तरह से विपक्ष आक्रामक है, उसे देखते हुए यूपी सरकार ने हाथरस केस में जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है और सीबीआई जांच की भी बात कही गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद गृह सचिव भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी टीम मामले की जांच करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस मामले में सभी चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन पुलिस ने जिस तरह इस मामले में रोल प्ले किया है, उससे लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं, और यूपी सरकार कटघरे में खड़ी है।









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