मामलेको हवा दे रहे भाजपा में शामिल हुए तथाकथित नेता
रजनीकांतअवस्थी
रायबरेली: जनपद के लालगंज कस्बे के भीतर इन दिनों भूखंड संख्या 4 रकबा 0873 हेक्टेयर जमीन में से 0.063 जमीन इस समय चर्चा में है। कस्बे के अंदर स्थित इह बेशकीमती जमीन का टुकड़ा सियासत के गलियारों में सत्ता के वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बन चुका है। इसमें कानूनी तौर से इसके सही मालिक शिवगढ़ रियासत के सर्वे सर्वा पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह एक ओर है, तो वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत लालगंज और जिला पंचायत रायबरेली के बीच घमासान मचा है। मामले के पीछे सत्तारूढ़ पार्टी के ही एक जनप्रतिनिधि का नाम बार-बार सामने आ रहा है। सियासी गलियारों में इस बात की पूरी चर्चा है कि, राजा राकेश प्रताप सिंह से चुनावी समर में दो-दो बार आमने सामने लड़ चुके, यह जनप्रतिनिधि अपनी पुरानी खटास भूल नहीं पाए हैं, और लगातार पर्दे के पीछे से पूरे मामले को तूल दे रहे हैं। उधर दूसरी ओर पत्राचार के माध्यम से तीर चला रहे नगर पंचायत और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों, जिन्हें नियम कानूनों का ज्ञाता कहा जाता है, वही राजनीतिक आकाओं के इशारे पर उलूल जुलूल पत्राचार कर उपहास का विषय बन रहे हैं।
आपको बता दें कि, नगर पंचायत लालगंज और दतौली गांव नानजेडए जमीन पर बसा है। यह वह जमीन है, जहां पर जमीदारी उन्मूलन एक्ट लागू नहीं है, और यहां की जमीनों में मालिक के तौर पर शिवगढ़ रियासत के मालिक राजा राकेश प्रताप सिंह का नाम बतौर भूस्वामी दर्ज है, तथा इसका बाकायदे खेवट बना हुआ है। खेवट में दर्ज सभी भूखंडों के स्वामी निर्विवाद रूप से राजा राकेश प्रताप सिंह ही है। विवाद के केंद्र बिंदु में गाटा संख्या 4 रकबा 0.873 हेक्टेयर जमीन कागजातों में दर्ज है। इसके छोटे से भूभाग 0.63 हेक्टेयर भूमि पर खाली जमीन पर स्वामित्व को लेकर ताजा विवाद उपजा है। इस जमीन पर राजा राकेश प्रताप सिंह द्वारा जब बाउंड्री बनवा कर गेट लगाया गया, तो इसी नेता के इशारे पर जिला पंचायत सामने आ गया, और इसे अपना पुराना कांजी हाउस बताते हुए इस पर जिला पंचायत का दावा ठोक दिया। वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत के सुर से सुर मिला कर नगर पंचायत भी विवाद में कूद पड़ा। इनका कहना था कि, जिला पंचायत के कांजी हाउस को किराए पर लेकर नगर पंचायत लालगंज द्वारा काजी हाउस संचालित किया जाता रहा है। यह बात कह कर वह भी अपना स्वामित्व जताने लगे। अब सवाल यह उठता है कि, इस जमीन का वास्तविक (मालिक) कागजातों पर राजा शिवगढ़ दर्ज हैं। ना तो जिला पंचायत के पास स्वामित्व का कोई कागज है, और ना ही अपने आप को किराएदार बताने वाले नगर पंचायत लालगंज के पास ही इस भूखंड के मालिकाना का कोई कागज है। सवाल यह भी उठता है कि, कभी किराएदार किसी भी संपत्ति का स्वामी हो सकता है क्या? इन्हीं बातों को लेकर कागजी घोड़े तेजी से दौड़ाए जा रहे हैं। दबंग भूमाफिया टाइप के इस स्वयंभू नेता की कोशिश है कि, जिला पंचायत के नाम पर जमीन हड़प कर वह कोई बड़ा शॉपिंग कांप्लेक्स बनवा कर बेच दे। तदुपरांत जब जमीन के असली मालिक राजा राकेश प्रताप सिंह ने अपनी जमीनों का चिन्हांकन कराना शुरू किया, तो यह भूमि उन्हें अपनी मिली। इस पर उन्होंने बाउंड्री वाल बनवाकर गेट लगवा दिया, तब तक कोई विवाद नहीं था।अचानक जिला पंचायत का संचालन कर रहे लोगों ने एक अभियान चलाकर पूरे जिले में अपनी भूमि तलाश कर, उनके उपयोग का कार्यक्रम शुरू किया। इसी दरमियान राजा राकेश प्रताप सिंह से पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता रखने वाले इस नेता को भनक लगी कि, जिस जमीन पर राजा राकेश प्रताप सिंह ने बाउंड्रीवाल बनवाकर गेट लगवाया है, उस पर तो कांजी हाउस बना हुआ था। तत्काल लिखा पढ़ी शुरू कर दी गई। पहले अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत रायबरेली ने जिलाधिकारी को पत्रांक 335 स्थापना जिला पंचायत 2020, 21 के तहत जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत दर्ज कराई, और जमीन को अपना बताते हुए यह तर्क दिया कि, यह भूमि जिला पंचायत की संपत्ति रजिस्टर में जिला पंचायत के नाम दर्ज है, जिसे खाली कराया जाए, ताकि वह इस पर अपना भवन निर्माण करवा सके।
जिलाधिकारी द्वारा मामले की जांच एसडीएम लालगंज से कराई गई, तो एसडीएम ने जांच में यह पाया कि, यह भूमि तो राजा राकेश प्रताप सिंह के नाम दर्ज है। इस बात से जिला पंचायत को अवगत करा दिया गया। राजस्व अभिलेखों में जमीन का स्वामित्व राजा राकेश प्रताप सिंह के पक्ष में पाए जाने पर अपर मुख्य अधिकारी को सांप सूंघ गया, और उन्होंने आगे की लिखा पढ़ी बंद कर दी, तो फिर इस मामले में जमीनों पर अवैध कब्जा करने और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग करने के लिए कुख्यात इस नेता ने नगर पंचायत को आगे खड़ा किया। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी ने उप जिलाधिकारी को प्रेषित पत्रांक 73 ईओ 2020, 21 के तहत उप जिलाधिकारी को एक पत्र लिखकर कस्बे लालगंज के वार्ड नंबर 14 मोहल्ला नई बाजार घोसियाना में स्थित अपने पुराने कांजी हाउस की जमीन को नगर पंचायत की बताते हुए, उस पर अवैध कब्जा होने की बात बताई, और मांग किया कि, अवैध कब्जे को हटवा कर यह जमीन नगर पंचायत को दिलाई जाए।
इस पत्र पर भी एसडीएम लालगंज ने भू राजस्व कर्मियों की टीम बनाकर जांच कराई, तो फिर मामला वहीं निकला, की जमीन के वास्तविक स्वामी तो राजा राकेश प्रताप सिंह ही है। इस क्रम में उप जिलाधिकारी ने दिनांक 20-02-2020 पत्रांक संख्या 638 राजस्व लिपिक के तहत ईओ को लिखित पत्र भेजकर जमीन पर स्वामित्व संबंधी अभिलेख मांगे, किंतु कोई अभिलेख ना होने के कारण ईओ कोई जवाब नहीं दे सके, तो उपजिलाधिकारी ने ईओ को 4 दिन की मोहलत देते हुए, 24 फरवरी 2020 तक मामले में स्वामित्व संबंधी समुचित अभिलेखों को उनके समक्ष प्रस्तुत होने को कहा। लेकिन वो एसडीएम की इस हिदायत कि, इस मामले में लापरवाही न की जाए, को दरकिनार करते हुए आज तक कोई स्वामित्व अभिलेख नहीं प्रस्तुत कर सकें।
उधर कानूनी दांवपेच में विफल रहे नेता ने अधिशासी अधिकारी लालगंज को पुनः उकसाते हुए अब एक नई कार्यवाही की है। जबकि अधिशासी अधिकारी ने बगैर अपने प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए, एक पत्र उपनिबंधक लालगंज को पत्रांक 73 अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत लालगंज दिनांक 17-11- 2020 के जरिए प्रेषित करते हुए कहा है कि, उपरोक्त भूखंड पर नगर पंचायत लालगंज का स्वामित्व है, और इस भूखंड पर अवैध रूप से बाउड्री बनवाकर गेट लगवाया गया है। जिसको हटवाने के लिए अधिकारियों को पत्र प्रेषित किए गए हैं। ईओ ने यह भी बताया कि, इसी संपत्ति को राजा राकेश प्रताप सिंह द्वारा किसी भी पार्टी के पक्ष में बैनामा रजिस्ट्री करने का कार्यक्रम किया जा रहा है। इसलिए नगर पंचायत के हित को देखते हुए रजिस्ट्री ना की जाए। इस पत्र के आने के बाद उप निबंधक कार्यालय में हलचल मच गई। क्योंकि उपनिबंधक किसी भी भूखंड की या संपत्ति की रजिस्ट्री तभी रोक सकते हैं, जबकि किसी सक्षम न्यायालय अथवा सक्षम अधिकारी द्वारा उन्हें रजिस्ट्री ना करने के लिए आदेशित किया जाए। वहीं अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत को यदि उप जिलाधिकारी से इस प्रकार का आग्रह करना हो, तो वह जिलाधिकारी अथवा न्यायालय के माध्यम से भी ऐसा निवेदन कर सकते हैं। हालांकि अभी तक ना तो किसी प्रकार की रजिस्ट्री उपनिबंधक के सामने प्रस्तुत की गई, और ना ही किसी प्रकार की कार्यवाही संज्ञान में आई है।
अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत रायबरेली और अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत लालगंज द्वारा बिना सिर पैर के इस प्रकार के पत्राचार करना जानकारलोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीति में रुचि रखने वाले लोग यह मानकर चल रहे हैं कि, भले ही राजा राकेश प्रताप सिंह जो पहले से भाजपा में है, और स्वयंभू नेता बाद में भाजपा में आए है, दोनों के दल भले ही एक हो गए हो, लेकिन दिल अभी तक नहीं मिले हैं। पुराने अतीत में मिले अनुभवों की खटास अभी भी बनी हुई है, और अपनी आदत के अनुसार यह स्वयंभू नेता हरदम मौका तलाश करता है कि, कब किसी सम्मानित और हैसियतदार अपने प्रतिद्वंदी को नीचा दिखाने का मौका मिले। लोगों में यह भी चर्चा है कि, एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पार्टी को मजबूत कर एकजुटता दिखाने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन रायबरेली में भाजपा के ही नेता अपने ही दल के नेता की जड़ खोद कर उन्हें बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने की नियत से हमेशा सक्रिय रहते हैं। पूरे जनपद के भाजपाई प्रकरण को लेकर काफी नाराज हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं का कहना है कि, आने वाले समय में भाजपा को जिले में कैसे मजबूत करके कांग्रेस के गढ़ को ध्वस्त किया जाए। जबकि स्वयंभू नेता अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
दूसरी ओर पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह ने नगर पंचायत लालगंज के अधिशासी अधिकारी द्वारा सब रजिस्टार लालगंज को भेजे गए पत्र का संज्ञान लेते हुए उच्च अधिकारी सबरजिस्टार को लिखे गए पत्र को अवैधानिक करार देते हुए कहा कि, ऐसा उन्होंने किस व्यक्ति के दबाव में पत्र भेजा है। इसके पीछे उनका निहित स्वार्थ क्या है। इसकी भी जांच कराई जानी चाहिए।


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