अयोध्या राम मंदिर के बाद अब मोन गांव स्थित महर्षि बाबा ओरीदास की तपोस्थली में बन रहे नवनिर्मित हनुमान मंदिर का मामला गरमाया।। Raebareli news ।।

 

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोन गांव निवासी शिवराम वैश्य प्रत्येक मंगलवार को महर्षि बाबा ओरी दास तपोस्थली प्रांगण में लगने वाले मेले में लगभग 22 वर्षों से प्रसाद की दुकान लगाते हैं। यहीं से उन्हें हनुमान जी महाराज का मंदिर बनवाने की प्रेरणा मिली। प्रेरणा को अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से उन्होंने एक ढांचा तैयार करवा कर बाबा ओरीदास तपोस्थली के महंत सुंदर दास जी महाराज से आज्ञा लेकर गेट के बगल में एक छोटा सा मंदिर निर्माण करवाया, और जब हनुमान जी महाराज के मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठान करवाने की इच्छा जाहिर की, तो गांव के ही कुछ लोग महंत को बरगला कर अपने पक्ष में कर लिया, और उस बने हुए मंदिर को अनुचित ठहराते हुए, उसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है। सोशल मीडिया पर मंदिर निर्माण करवाने वाले शिवराम के ऊपर अनाप-शनाप टिप्पणियां की जा रही हैं। जिसको लेकर शिवराम का मन काफी आहत व व्यथित हो गया है।


   आपको बता दें कि, इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने शिवराम से बात की, तो उन्होंने बताया कि, महर्षि बाबा ओरीदास में विगत 22 वर्षों से वे प्रसाद की दुकान लगाने का काम करते हैं, और उन्हें यहीं से प्रेरणा मिली है कि, यहां वह एक हनुमान मंदिर की स्थापना करें, जिसके तहत उन्होंने यह मंदिर बनवा कर प्राण प्रतिष्ठान करना चाहा, लेकिन गांव के ही कुछ लोग इसे राजनैतिक मुद्दा बनाकर मंदिर नहीं बनाने देना चाहते हैं तथा हनुमान जी की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठान में रोड़ा बन रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि, उनकी मदद करके मंदिर में हनुमान जी महाराज की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठान करवाया जाए। उनका यह भी कहना है कि, अगर ग्राम वासियों का सहयोग और स्नेह उन्हें मिलेगा, तो इसी तरह और इसी डिजाइन का एक दूसरा मंदिर भी गेट के दूसरे छोर पर भी वह बनवाने का काम करेंगे।

    वहीं शिवराम वैश्य जेष्ठ पुत्र आनंद वैश्य का आरोप है कि, उन्हे भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह से जलील किया जा रहा है। जिसको लेकर उसका मन भी आहत है। आनंद ने यह भी बताया कि, लोग यहां तक उन्हें कह रहे हैं कि, वह अपने द्वारा बनवाए गए हनुमान जी के इस मंदिर को स्वयं तोड़ दें, और मंदिर के बनवाने में जो भी पैसा खर्च हुआ है, श्री वैश्य को वे लोग देने के लिए तैयार हैं। लेकिन यह आनंद वैश्य की श्रद्धा से जुड़ा हुआ मामला है, इस मंदिर मैं लगा एक एक पत्थर भगवान श्री हनुमान जी महाराज को समर्पित है, वह उसे बिगाड़ (ध्वस्त) नहीं सकते हैं। आनंद वैश्य का यह भी कहना है कि, ग्राम सभा के लोगों को एकत्रित कर लिया जाए, बहुमत अगर मंदिर तोड़ने की है, तो तोड़ दिया जाए, किंतु अगर यहीं बने रहने की है, तो हनुमान जी महाराज के मूर्ति की स्थापना करवाने में उनका सहयोग किया जाए।

    उधर जब इस संवाददाता ने तपोस्थली के महंत सुंदरदास जी से इस संबंध में बात की तो, उन्होंने बताया कि, यह मंदिर श्री वैश्य द्वारा उनकी मर्जी के विपरीत बनाया गया है। मंदिर के महंत के मुताबिक उन्होंने श्री वैश्य को तपोस्थली के किसी कोने पर मंदिर बनाने की सलाह दी गई थी, जिसको श्री वैश्य द्वारा नकारते हुए, ओरी दास बाबा मंदिर के ठीक सामने बनाया गया है, जो अनुचित है। उन्होंने इसकी शिकायत कोतवाली में कर दी है, उनका कहना है कि, प्रशासनिक फैसला ही मान्य होगा।

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