रजनीकांत अवस्थी
बछरावां/रायबरेली: स्थानीय कस्बे के मुख्य चौराहे पर चंद दुकानों को छोड़कर जो एक सीमित दायरे के अंदर लगी हुई है, उनके अलावा लगने वाले ठेले जहां जाम की समस्या को बढ़ाने में असली किरदार निभा रहे हैं, तो वहीं गांव के सीधे साधे ग्राहकों के साथ आए दिन मारपीट करने पर आमादा हो जाते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण कई मामले बछरावां थाने में दर्ज होना हैं।
यहां कस्बे में पटरी और ठेले लगाने वाले दुकानदारों का आलम यह है कि, इनका कब्जा थाने गेट से लेकर नगर पंचायत कार्यालय तथा अस्पताल परिसर के सामने तक निर्बाध रूप से फैला हुआ है। अगर कोई भी संभ्रांत व्यक्ति ठेले अथवा दुकानों के सामने चंद मिनट के लिए भी वाहन रोककर खड़ा हो जाता है तो, यह एकजुट और एक राय होकर मारपीट करने लगते हैं।
ऐसा ही एक नजारा गत दिवस महराजगंज रोड पर देखने को मिला। जहां गुलाब खेड़ा का रहने वाला एक ग्रामीण संतरे खरीद रहा था, फल विक्रेता द्वारा उसे कई सड़े संतरे बेच दिए गए। इस पर जब खरीदार ग्रामीणों ने विरोध किया, तो कई दुकानदार एक राय होकर के उसके साथ मारपीट की।
विदित हो कि, फल विक्रेताओं में 95% खटीक बिरादरी के लोग हैं, और यह आए दिन झगड़े पर आमादा हो जाते हैं। क्षेत्रीय प्रबुद्ध वर्ग की मांग है कि, मुख्य चौराहे से लेकर अस्पताल गेट तक लगने वाले इन बेतरतीब ठेलो को यहां से हटाया जाए। खासकर थाना गेट, नगर पंचायत के पुराने कार्यालय के सामने इनके द्वारा किए गए कब्जे को रोका जाए।



0 टिप्पणियाँ