सैकड़ों ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और उनके समर्थकों द्वारा पुलिस प्रशासन से सांठगांठ कर अपना प्रत्याशी यह तो आने का लगाया आरोप।
कोटेदार चयन प्रक्रिया रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग।
रजनीकांत अवस्थीमहराजगंज/रायबरेली: ब्लॉक क्षेत्र के पूरासी गांव के चर्चित कोटेदार चयन का मामला गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। कोटेदार चयन के लिए आज हुए गुप्त मतदान की निष्पक्षता पर गांव के सैकड़ों नागरिकों ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि, पूरा मामला मैच फिक्सिंग तथा निवर्तमान ग्राम प्रधान और उनके देवर और प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों के बीच पहले से तैयारी कर ली गई थी। पक्षपात तरीके से कोटेदार का परिणाम प्रधान के पिट्ठू दावेदार के नाम कर दिया गया है। ग्रामीणों ने गहरा आक्रोश जताते हुए मीडिया के माध्यम से डीएम व एसडीएम तथा पूर्ति विभाग के अधिकारियों को मामले की असलियत की जांच करा कर आज हुए मतदान की प्रक्रिया को निरस्त करा कर निष्पक्ष अधिकारियों के समक्ष पुनः कोटा चयन के लिए मतदान कराने की मांग की है।
आपको बता दें कि, यहां निवर्तमान ग्राम प्रधान सियालली के देवर गंगा सागर पांडेय की पुराने कोटेदार से ठन गई थी। आरोप है कि, गंगासागर पांडेय ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पूर्व कोटेदार का काम करना दूभर कर दिया था, तथा अपनी पहुंच के बल पर उन्होंने कोटेदार का कोटा भी निरस्त करा दिया था। लगभग 1 वर्ष से यह कोटा खाली था। इसके पश्चात श्री पांडेय ने कई बार अधिकारियों से तालमेल करके अपने मनमाफिक पिट्ठू को कोटेदार बनाना चाहा। लेकिन गांव में प्रबल विरोध के चलते गंगासागर पांडेय अपना मनचाहा कोटेदार नियुक्त नहीं करा सके। उधर अधिकारियों ने हाथ खड़े करते हुए कहा था कि, चयन प्रक्रिया का जो तरीका है, उसको अपनाकर ही कोटेदार तय किया जाएगा। उसके पश्चात कई तारीखे कोटा तय करने के लिए रखी गई। लेकिन अपनी संभावित हार के चलते निवर्तमान ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि गंगासागर पांडेय, संबंधित अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके तारीख पर तारीख बढ़वाते रहे। बताते हैं कि, कई बार तारीखें टलने के बाद दूसरे पक्ष के लोग जिला अधिकारी वैभव श्रीवास्तव से स्वयं जाकर मिले, और शिकायत की थी कि, गंगासागर पांडेय की सांठगांठ के चलते ब्लॉक स्तर के अधिकारी यहां के कोटेदार के कोटे का चयन नहीं करवा रहे हैं। अनेकों बार नए नए बहाने बनाकर मतदान की तारीख बढ़वा दी गई है। इस पर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सख्त रुख अपनाते हुए उप जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी महराजगंज को पत्र भेजकर तिथि निर्धारित कर प्रत्येक दशा में कोटेदार का चयन करने के कड़े निर्देश दिए थे। जिसके बाद मजबूर होकर 20 फरवरी 2021 को खुली बैठक बुलाकर कोटेदार चयन के लिए प्रक्रिया शुरू की गई, और यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई। हालांकि 20 फरवरी 2021 की बैठक में प्रमुख रूप से एडीओ पंचायत जितेंद्र बहादुर सिंह, तहसील से एआरओ तथा गुमावा और शिवगढ़ से दो-दो उप निरीक्षक समेत बड़ी तादाद में पुलिस बल गांव में तैनात किया गया था। जिसके जरिए अधिकारी यह संदेश देना चाहते थे कि, गांव में पूरी शांति और व्यवस्था के साथ कड़ाई से निष्पक्ष मतदान कराया जाएगा। लेकिन पर्दे के पीछे हकीकत कुछ और ही थी। गांव के रहने वाले चंद्र प्रकाश मिश्रा, धर्म प्रकाश, सत्येंद्र प्रताप सिंह, सूर्य प्रसाद, बृजमोहन, सत्यम, रिंकू, कुमारी नीलू, सत्यम पांडेय, मंसाराम शुक्ला, रामबरन यादव, रामचंद्र तिवारी, शंकर यादव, संतोष मौर्य, अमर बहादुर निर्मल, राम प्रकाश दीक्षित आदि ने आरोप लगाया है कि, अधिकारियों ने गंगासागर पांडेय के इशारे पर विरोधी खेमे के समर्थकों को पुलिस द्वारा दुत्कार कर मतदान स्थल से भगाने का काम किया है। जिससे सैकड़ों प्रधान विरोधी मतदाता मतदान में भाग ही नहीं ले पाए। जबकि यह भी आरोप है कि, प्रधान के समर्थन में नाबालिक बच्चों ने भी जमकर मतदान किया, वहीं जो लोग इस गांव के रहने वाले नहीं थे, उन्हें भी फर्जी आधार कार्ड व पहचान पत्र देकर उनसे भी मतदान करा लिया गया। सैकड़ों लोगों ने फर्जी तरीके से प्रधान के समर्थन में उनके दावेदार को वोट दे दिए, तब भी हालत यह बनी की इतना तीन तिकड़म कराने के बाद प्रधान समर्थित कोटेदार प्रत्याशी कविता मिश्रा को मतगणना के बाद 429 वोट मिलना बताया गया है, जबकि उनकी प्रतिद्वंदी वंदना द्विवेदी को 420 ही वोट मिलने बताएं गए हैं। उधर स्वयं बंदना मिश्रा का आरोप है कि, एडीओ पंचायत ने उनसे यह कहते हुए कि, तुम कोटे का चुनाव जीत गई हो, उन्होंने पहले से तैयार रखें कागजों पर दस्तखत भी करा लिया, और बाद में जब घोषणा हुई, तो यह बताया गया कि, कविता मिश्रा को 429 वोट मिले हैं, और वह 9 वोटों से चुनाव जीत गई है। जैसे ही यह घोषणा हुई, वहां लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर पूर्ण पक्षपात और भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया। गांव के अधिकांश लोग यह मानने को तैयार ही नहीं थे, कि वास्तव में प्रधान समर्थित कैंडिडेट चुनाव जीत गया है। क्योंकि पूरे गांव का माहौल ऐसा लग रहा था कि, प्रधान जिस किसी को समर्थन करेंगे, उसकी लुटिया डूबना तय हैं। वहीं गांव के चंद्र प्रकाश मिश्रा का आरोप है कि, यह भ्रष्टाचार का जीता जागता नमूना है, और इसी तरह के कारनामे करके प्रधान आगामी चुनाव में ऐसे ही हथकंडे अपनाकर प्रधानी पर भी कब्जा करना चाहता है, जबकि यह सर्वविदित है कि, प्रधान या उसके समर्थित कैंडिडेट की जमानत जप्त होना तय है। ग्रामीणों के गले के नीचे कोटेदार के चयन का मामला उतर नहीं रहा है। लोगों ने पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच कराकर 20 फरवरी 2021 को हुए मतदान को निरस्त करके, नए सिरे से निष्पक्ष अधिकारियों को भेज कर पुनः कोटेदार के चयन की प्रक्रिया कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने खुले तौर पर ऐलान किया है कि, इस मामले को वह जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से लेकर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सामने ले जाएंगे और आवश्यकता पड़ी, तो वो न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाने में पीछे नहीं रहेंगे। उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जबकि भ्रष्ट तरीके से 20 फरवरी को हुए मतदान को निरस्त करके नए सिरे से कोटेदार के चयन की प्रक्रिया पुनः नहीं कराई जाती।










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