असनी ग्राम सभा: दीपू चौधरी के चुनाव प्रचार में, मतदाता खुद उतरे मैदान में।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: असनी के जन-जन की है यही पुकार, दीपू भैया फिर इस बार! यह नारा असनी गांव के घर घर से सुनाई दे रहा है। गांव का बच्चा बच्चा पूर्व प्रमुख राम शंकर चौधरी के मंझिलें पुत्र दिलीप कुमार चौधरी उर्फ दीपू भैया को एक बार फिर से प्रधानी का ताज पहनाने को आतुर है। ग्राम पंचायत में प्रचार कार्य का पूरा जिम्मा मतदाताओं ने स्वयं ही अपने हाथों में ले लिया है। हर तरफ से दीपू भैया दीपू भैया की आवाज ही गुंजायमान हो रही है।

    आपको बता दें कि, महराजगंज बछरावां रोड पर सड़क से 1 किलोमीटर दूर बसा  असनी गांव जिसमें अधिकतर आबादी दलितों और पिछड़ों की है। खेती किसानी ही आजीविका का मुख्य साधन है। यहां के लोग अत्यंत परिश्रमी और सच्चे दिल के हैं। गांव का नेतृत्व पूर्व प्रमुख राम शंकर चौधरी की दिवंगत धर्मपत्नी सुरेशा देवी करती थी। लेकिन एक साल पहले प्रधान पद पर रहते हुए ही उनका देहावसान हो गया था, तब से गांव में नेतृत्व शून्य हो गया था।

     लेकिन पूर्व प्रमुख श्री चौधरी के मंझिलें बेटे ने जनसेवा और समाज सेवा के माध्यम से उस उपजे हुए शून्य को भरने का प्रयास किया है। सुबह से शाम तक गांव के गरीबों की समस्याओं को निपटाना, बीमारों को अस्पताल पहुंचाना तथा इलाज कराना इसके अतिरिक्त गरीबों को निशुल्क इंसाफ दिलाना तथा गांव के कुछ भू माफियाओं द्वारा गरीबों की जमीन हड़पने के कुत्सित प्रयासों को विफल करना यह दीपू चौधरी की दिनचर्या का अंग बन गया है।

    दीपू चौधरी की इस सेवा भावना को देखकर गांव की अधिकांशतः जनता उनकी मुरीद हो गई है, और जब ग्राम प्रधानी के पद का सवाल आया, तो सबने एक स्वर से दीपू चौधरी को खड़ा कर दिया है। उनके प्रचार प्रसार में गांव के अधिकतर लोग विशेषकर महिलाएं और बुजुर्ग तक एक दूसरे से वोट मांग रहे हैं। पूरी ग्राम सभा में तय हो गया है कि, दीपू चौधरी को कितने मतों से जिताया जाए कि, विरोधियों की जमानत तक ना बचे। गांव के मतदाताओं का मूड देखकर गांव के असामाजिक तत्व विशेषकर भू-माफियाओं और दुष्चरित्र लोगों का हौसला पस्त हो गया है।

    इस बारे में हमने जब दीपू चौधरी से उनके प्रति जनता का अटूट विश्वास और समर्पण के बारे में पूछा, तो उन्होंने विनम्रता भरे भाव से कहा कि, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। वह अपने गांव के हर मतदाता को हृदय में स्थान देते हैं, और उनकी कोशिश रहती है कि, दिन और रात देखे बगैर गरीबों बेसहारा लोगों की सेवा करते रहा जाए, यही उनकी साधना है।

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