कोरोना महामारी की व्यथा: हंसते खेलते बिखरे परिवार, अपनों से बिछड़े अपने।। Raebareli news ।।


रजनीकांत अवस्थी

रायबरेली: अपनों को खोने के बाद हमेशा याद आता है कि, मिट्टी का शरीर तो मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन रिश्ते मिट्टी के नहीं होते हैं, वे हमेशा याद आते हैं। कोरोना के इस दौर में ऐसे कई परिवार हैं, जिन्होंने कुछ ही दिनों में अपनों को खोया है। हंसते खेलते परिवार देखते ही देखते बिखर गए। यह परिवार सब इन्हीं रिश्तो की यादों के भरोसे जी रहे हैं। कहीं एक ही परिवार के चार सदस्य अपनों को छोड़ गए, तो कहीं 15 दिन के अंदर दो पुत्रों की मौत का सदमा पिता बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी भी मौत हो गई। कहीं तीन भाइयों की जान 1 महीने के अंदर चली गई, बेटे की मौत सुनकर 1 घंटे में पिता ने दम तोड़ दिया, तो कहीं बहू की मौत ससुर सहन नहीं कर पाए, और कुछ ही घंटों में उनकी भी मौत हो गई।

     आपको बता दें कि, रायबरेली के महराजगंज कस्बे के रहने वाले एक परिवार ने 40 दिन में तीन भाइयों सहित चार लोगों को खो दिया। परिवार में पहली मौत श्याम मिश्रा की पत्नी रामश्री मिश्रा की हुई। उन्हें बुखार और खांसी की शिकायत बताई गई थी, कुछ ही दिन बाद श्याम के बड़े भाई श्रीकृष्ण मिश्रा को भी बुखार आया और सीएचसी में उनकी मौत हो गई। उनकी चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि, भाई श्याम मिश्रा की मौत हो गई। कुछ ही दिनों बाद एक और भाई रामजी मिश्रा की भी मौत हो गई। वहीं ऊंचाहार के अरखा में 1 महीने में तीन सगे भाइयों की मौत हो गई। पहले कमलेश वर्मा का निधन हुआ, उनकी तेरहवीं के बाद दूसरे भाई मूलचंद की मौत हो गई. भाई की मौत की जानकारी मिलने पर बड़े भाई फूलचंद की हालत बिगड़ी और लखनऊ में उन्होंने भी जान गवा दी।

     जबकि महराजगंज क्षेत्र के बरीबरा मजरे मऊ गांव में 15 दिन के अंदर एक ही परिवार के दो पुत्रों सहित पिता की मौत हो गई। पहले बड़ा लड़का जो दिल्ली में रहता था, उसकी तबीयत बिगड़ी और घर लाते समय रास्ते में मौत हुई। उसके बाद छोटे बेटे की ससुराल में अचानक तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। पिता मथुरा प्रसाद पासी यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए, और अगली रात लगभग 12:00 बजे अचानक उनकी भी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।

    वहीं छतोह के एक शिक्षक मतगणना की ड्यूटी कर घर आए और उनका ऑक्सीजन लेवल कम हुआ, जिसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले गए। वहां उनकी मौत हो गई। जैसे ही पिता को इसकी जानकारी मिली, कुछ ही घंटों में उन्होंने भी दम तोड़ दिया। पिता पुत्र की यह मौत लोगों को भाव विह्वल करती है। जबकि रायबरेली के गदा गंज के थुलराई में भी करोना संक्रमित बहू की मौत को सेवानिवृत्त बीएसए सह नहीं पाए, और 1 घंटे में उनकी भी मौत हो गई। यह चारों परिवार बिखर गए, और अब रिश्तो की यादों के सहारे सब जीने को मजबूर हैं। कोरोना महामारी के दौर में लोगों ने अपनों को खोया है। एक ही झटके में परिवार बिखर गए। हालांकि प्रशासन अब तक इन मौतों पर अलग-अलग व्याख्या कर रहा है। लेकिन मौत तो मौत होती है। जिसने अपनों को अपनों से छीन लिया। भरे पूरे परिवार बिखर गए। जिनकी अब इनके लिए यादें ही बाकी है।

कोरोना काल में जरूरी: सबसे पहली लड़ाई हमारे मस्तिष्क में जीती जाती है, उसके बाद ही युद्ध भूमि पर। यदि हम हर समय अपने मन में हार और नकारात्मक विचारों को जगह देंगे, तो परिणाम भी वैसा ही होगा। इस समय हमें सबसे ज्यादा जरूरत है अपने आसपास चिंता रहित वातावरण बनाने की। जिससे हम शारीरिक और मानसिक तौर पर खुश एवं स्वस्थ रहें।

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