प्रशासन की उदासीनता के चलते कोटवा मदनिया ग्राम सभा के चारागाह की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा

सार........

⭕ चारागाह के अभाव में गोवंश न केवल किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि अपनी भूख मिटाने के लिए सड़कों पर जमा कूड़े के ढेरों में निवाला तलाशते नजर आ रहे हैं।

विस्तार.........

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: जमीन की हवस लोगों में इस कदर बढ़ी है कि, ग्राम समाज ही नहीं बल्कि चारागाह की जमीन पर भी भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है। प्रशासनिक दस्तावेजों में गांव की गाटा संख्या 1185 रकबा लगभग 8 बीघे जमीन चारागाह के नाम पर दर्ज है। आरोप है कि, गांव के ही कुछ दबंग भू-माफिया लगभग पांच बीघे जमीन पर कब्जा कर रखा है और मकान भी बना लिया है। राजस्व कर्मियों की उदासीनता के चलते चारागाह की जमीन से भू-माफियाओं को अभी तक हटाया नहीं गया है। जबकि ग्राम प्रधान आरती वर्मा ने चारागाह की जमीन को भू-माफियाओं से कब्जा मुक्त कराने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुकी है।

    आपको बता दें कि, ग्राम सभा कोटवा मदनिया के दरियावगंज स्थित गाटा संख्या 1185 रकबा लगभग 8 बीघे राजस्व अभिलेखों में चारागाह के नाम पर दर्ज है। आरोप है कि, चारागाह की जमीन पर गांव के ही बृजलाल पुत्र लाला, इंद्रपाल पुत्र लाला और नीरज ने मकान, बाउंड्री वॉल आदि बनाकर कब्जा कर रखा है। विगत 8 माह पूर्व चारागाह की ही भूमि पर खूटा गाड़कर गांव की ही एक महिला सावित्री पत्नी राम प्रसाद ने जब अपने गोवंशों को बांधना चाहा तो इन्हीं उपर्युक्त आरोपियों बृजलाल, इंद्रपाल, नीरज एवं परिवार की महिलाओं ने मिलकर खूंटा गाड़कर गोवंश बांधने गई सावित्री देवी के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह लहू लुहान हो गई, मामला थाने तक पहुंच, किंतु भूमाफियाओं की लंबी पहुंच के चलते आरोपी पर धारा 151 के तहत मुकदमा दर्ज करके रात भर थाने में रखा गया, अगले दिन एसडीएम की अदालत से जमानत पर रिहा हो गया। बताया गया है कि, उक्त झगड़े के वक्त घायल महिला के पेट में आठ माह का गर्भ पल रहा था, गनीमत यह रही की उसे कुछ नहीं हुआ।

     ग्राम प्रधान आरती वर्मा व उनके प्रतिनिधि सत्रोहन वर्मा ने बताया कि, सरकार की महत्वाकांक्षी पौधे लगाओ योजना के तहत चारागाह की जमीन पर कई बार पौधे तो लगाने का काम किया गया, किंतु इन्हीं भू-माफियाओं की वजह से हर बार पौधों को उखाड़ कर फेंक दिया जाता है। लगातार यह भू-माफिया चारागाह की लगभग छ बीघे जमीन पर मकान, बाउंड्री वॉल, खरफूस का बंगला रखकर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

     आपको यह भी बता दें कि, रायबरेली जिले की ग्राम सभाओं में स्थित चरागाह की जमीनों पर भू-माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से कब्जा किया जा रहा है, जिसके कारण चारागाह के अभाव में गोवंश न केवल किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि अपनी भूख मिटाने के लिए सड़कों पर जमा कूड़े के ढेरों में निवाला तलाशते नजर आ रहे हैं।

     सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद गोवंशों की बढ़ती संख्या शहर, कस्बा और ग्राम चौराहों में हादसों का भी कारण बन रही है। प्रशासन द्वारा तहसील क्षेत्र की ग्राम सभाओं में गोवंशों को संरक्षित करने के लिए अस्थायी आश्रय स्थल बनवा चुका है, जहां करीब 10 हजार गोवंश संरक्षित है। अब परेशानी यह हो गई है कि, इतनी बड़ी संख्या में गोवंशी के लिए चारे का इंतजाम कहां से हो? शासन से प्रति गोवंश मिलने वाली राशि की आर्थिक मदद भी महंगाई के इस दौर में नाकाफी साबित हो रही है। यदि चारागाह की जमीने कब्जा मुक्त हो जाए तो एक बहुत बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है।

      मामले में एसडीएम महराजगंज रश्मि लता से सीयूजी नंबर पर बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल आउट ऑफ कवरेज एरिया बता रहा था।

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