रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: भव्य एवं पारंपरिक वेश में 6 अक्टूबर 2024 रविवार से टाउन एरिया महराजगंज में श्री मद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास के प्रवक्ता देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के परम् प्रिया शिष्य पवन देव जी महाराज के नेतृत्व में कस्बे के वार्ड नंबर 2 आर्य नगर (घेरा) निकट जीजीआईसी स्कूल (कथा आयोजन स्थल) से पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के साथ शुरू हुई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु शामिल रहीं। पवित्र जलस्त्रोत से कलश को भर कर लाने के बाद कस्बे सुप्रसिद्ध मंदिरों से होकर कथा आयोजन स्थल पर धार्मिक विधि एवं मंत्रोच्चरण के साथ स्थापित किया गया, तत्पश्चात आरती के साथ शाम 7:00 से लेकर रात्रि 11:00 तक श्रीमद् भागवत कथा के रसिकवृंदों ने पवन देव जी महाराज के सुमधुर स्वर में भगवत नाम की महिमा का रसास्वादन किया।
आपको बता दें कि, रविवार को कथा के प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत महापुराण में अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास के परंप्रिया शिष्य पवन देव जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि, विश्व में सभी कथाओं में ये श्रेष्ठ मानी गई है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है, वो तीर्थ स्थल कहलाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियां को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।
कथा व्यास पवन देव जी महाराज ने कहा कि, अगर कोई सात दिन तक किसी व्यवस्तता के कारण नहीं सुन सकता है, तो वह दो तीन या चार दिन ही इसे सुनने के लिए अपना समय अवश्य निकालें। तब भी वो इसका फल प्राप्त करता है, क्योंकि ये कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है, जिसमें उनके अवतार से लेकर कंस वध के प्रसंग का उल्लेख होने के साथ-साथ व्यक्ति के जीवन में इसकी महत्ता के बारे में भी बताया गया है। इसके सुनने के प्रभाव से मनुष्य बुराई त्याग कर धर्म के रास्ते पर चलने के साथ-साथ मोक्ष को प्राप्त करता है।
कथा व्यास पवन देव जी महाराज ने बताया कि, इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुना था, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्य़ु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था।
अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास के परम् प्रिय शिष्य पवन देव जी महाराज ने कहा कि, कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में धारण करें।श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।
इस मौके पर रणविजय सिंह एडवोकेट व प्रधान प्रतिनिधि, शैलेंद्र सिंह जनई समेत बड़ी तादात में भगवत प्रेमियों से पंडाल खचाखच भरा रहा।






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