सलिल पांडेय
मिर्जापुर: सिद्धपीठ विंध्याचल में विंध्य कॉरिडोर को लेकर प्रशासन और पंडा समाज में महाभारत की रूपरेखा बनती दिख रही हैं । जहां प्रशासन कॉरिडोर के लिए नापजोख में लगा दिख रहा है वहीं पंडा समाज आन-बान-शान का विषय बनाता जा रहा है । बहुतों की दुकान और मकान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा ।
सूच्यैग्रम् नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव---
महाभारत के समय बिना युध्द के सूई की नोक के बराबर जमीन न देने की बात यहां भी हो रही है । जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे का शंक पंडा समाज ने बजा दिया है ।
विकल्प है---
काशी विश्वनाथ से विंध्याचल में अंतर है । वहां हर रोज कई जनपदों के साथ प्रदेशों के लोग हर रोज आते हैं । व्यवसायिक और चिकित्सा आदि के सिलसिले में लाखों लोग प्रतिदिन आते हैं । वाराणसी की भीड़ की तरह विंध्याचल में भीड़ फिलहाल नहीं है लिहाजा यदि विंध्याचल में वाहनों को ओझला और इलाहाबाद की ओर से आने वाले वाहनों को अष्टभुजा से पहले रोक दिया जाए तो धाम का फैलाव होगा और मंदिर पर एकाएक होने वाली भीड़ कम होगी ।
वैष्णव देवी और अमरनाथ लोग पैदल ही जाते है---
वैष्णव देवी में तो 14 किमी तथा अमरनाथ की जटिल तथा कठिन यात्रा में तो इससे अधिक लोग पैदल चलते हैं । विंध्याचल में तो लोग सीधे मंदिर तक वाहन लेकर चले जाते हैं । अतः मंदिर क्षेत्र का फैलाव हो । बहुतों को आजीविका का अवसर मिलेगा ।
सच पूछा जाए तो. ---
वृहद त्रिकोण मिर्जापुर नगर के रामबाग स्थित तारकेश्वर मंदिर से छानबे क्षेत्र के बदेवरा नाथ तक है । यहां से कोई त्रिकोण नहीं करता । यदि इसे बढ़ावा दिया जाए तो बिना तोड़फोड़ के दर्शन सुचारू हो सकता है ।
मिर्जापुर: सिद्धपीठ विंध्याचल में विंध्य कॉरिडोर को लेकर प्रशासन और पंडा समाज में महाभारत की रूपरेखा बनती दिख रही हैं । जहां प्रशासन कॉरिडोर के लिए नापजोख में लगा दिख रहा है वहीं पंडा समाज आन-बान-शान का विषय बनाता जा रहा है । बहुतों की दुकान और मकान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा ।
सूच्यैग्रम् नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव---
महाभारत के समय बिना युध्द के सूई की नोक के बराबर जमीन न देने की बात यहां भी हो रही है । जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे का शंक पंडा समाज ने बजा दिया है ।
विकल्प है---
काशी विश्वनाथ से विंध्याचल में अंतर है । वहां हर रोज कई जनपदों के साथ प्रदेशों के लोग हर रोज आते हैं । व्यवसायिक और चिकित्सा आदि के सिलसिले में लाखों लोग प्रतिदिन आते हैं । वाराणसी की भीड़ की तरह विंध्याचल में भीड़ फिलहाल नहीं है लिहाजा यदि विंध्याचल में वाहनों को ओझला और इलाहाबाद की ओर से आने वाले वाहनों को अष्टभुजा से पहले रोक दिया जाए तो धाम का फैलाव होगा और मंदिर पर एकाएक होने वाली भीड़ कम होगी ।
वैष्णव देवी और अमरनाथ लोग पैदल ही जाते है---
वैष्णव देवी में तो 14 किमी तथा अमरनाथ की जटिल तथा कठिन यात्रा में तो इससे अधिक लोग पैदल चलते हैं । विंध्याचल में तो लोग सीधे मंदिर तक वाहन लेकर चले जाते हैं । अतः मंदिर क्षेत्र का फैलाव हो । बहुतों को आजीविका का अवसर मिलेगा ।
सच पूछा जाए तो. ---
वृहद त्रिकोण मिर्जापुर नगर के रामबाग स्थित तारकेश्वर मंदिर से छानबे क्षेत्र के बदेवरा नाथ तक है । यहां से कोई त्रिकोण नहीं करता । यदि इसे बढ़ावा दिया जाए तो बिना तोड़फोड़ के दर्शन सुचारू हो सकता है ।

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