ओसाह व देहली जिला रायबरेली के गौड़ क्षत्रियों का वृतांत।। Raebareli news ।।

 रजनीकांत अवस्थी
 महराजगंज/रायबरेली: राजा डिंगुरसाह शिवगढ़ की आठवीं पीढ़ी में राजा खड्ग सिंह हुए। इनके दो पुत्र हुए। ज्येष्ठ पुत्र त्रिभुवन सिंह राजा शिवगढ़ हुए और लघु पुत्र इंद्रजीत सिंह को ओसाह का तालुका जागीर में मिला। इनके पुत्र मानसिंह हुए जिनकी आठवीं पीढ़ी में बाबू स्वयंवर सिंह हुए। 
      जब ब्रिटिश गवर्नमेंट का राज्य हुआ उस समय उपरोक्त बाबूजी को सनद तालुका ओसाह दिया गया। गदर के समय भी ये शिवगढ़ाशीष की भांति ब्रिटिश गवर्नमेंट के अनुयाई रहे। इन्होंने स्वयंबरगंज बाजार भौसी गांव में बनवाया। इनके देहांत होने पर इनकी ठकुराइन आनन्द कंवर स्वामिनी तालुका होकर बाबू शिव सहाय सिंह को दत्तक लिया। जिनके पुत्र बाबू शाह देव बक्र सिंह वर्तमान तालुकदार ओसाह है। इस तालुके में 6 गांव परगना कुम्हरावां में है जिनका राज्य कर ₹8 हजार 10 रुपए है।
     राजा डिंगुरसाह शिवगढ़ की 12 वीं पीढ़ी में राजा शिवसिंह हुए। इनके पुत्र रंजनसिंह राजा शिवगढ़ हुए। इनके पुत्र नहीं था इन्होंने अड़ारुसिंह को दत्तक लिया। जब राजा अड़ारूसिंह राजा हुए तब इन्होंने अपने छोटे भ्राता विजय सिंह को देहली नामक तालुका जागीर में दिया। इनके पुत्र बाबू बख्तावर सिंह हुए जिनको ब्रिटिश गवर्नमेंट ने सनद तालुका देहली दिया। इनके पुत्र शिवराज सिंह हुए जिनके पुत्र बाबू जगन्नाथबक्स सिंह हुए। सन उन्नीस सौ पंद्रह में इनका देवलोक हुआ। वर्तमान में इनकी बबुवाइन स्वामिनी तालुका है। इस तालुके में 3 गांव  परगना कुम्हरावां में है जिनका राज्य कर 3 हजार 8 सौ रुपया है।
      उक्त वृत्तांत गजीटियर रायबरेली पृष्ठ 90 व उर्दू तवारीख तालुकादाराना (2) देहली (1) के आधार पर लिखा गया है।

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