सक्रिय और कर्मठ डीएम के लिए CM को धन्यवाद ।
मिर्जापुर: उ0 प्र0 के मुख्यमंत्री अति पुण्यदायी माघ माह में नमामि गंगे यात्रा के बीच यहां मौजूद होंगे । जरूर मुख्यमंत्री ने इस अवसर एवं तिथि का चयन बहुत सोच समझ कर किया होगा । क्योंकि वे पूरी धर्म धर्म-सत्ता से भी जुड़े हैं। देखा जाए तो धर्मसत्ता की ब्रह्मांड में सबसे बड़ी राजधानी विंध्य धाम ही है । तुलसीदास की दृष्टि में 'माघ मकर गति रवि जब होई, तीरथपतिहिं आव सब कोई' का निहितार्थ ही है कि माघ में संगम-स्नान के अवसर पर देवता पर्व मनाने एवं पर्यटन-विहार करने विंध्य पर्वत पर आते हैं । इसलिए इस अवधि में मुख्यमंत्री का आना जनांकांक्षाओं की पूर्ति का अवसर प्रतीत होता है ।
पुतलीघर की चिमनी से धुआं----
2014 के ही लोकसभा चुनाव में पीएम श्री नरेन्द्र मोदी की नज़र इस चिमनी पर पड़ी थी । तब वे पीएम नहीं थे । अब केंद्र एवं प्रदेश में दोनों जगह सरकार एक ही पार्टी की है तो चिमनी से धुआं निकलने की योजना बनानी चाहिए ।
चिमनी से धुआं का आशय उद्योग की स्थापना---
इसका आशय बड़े उद्योग की स्थापना से संबंधित है । विंध्य पहाड़ी पर किसी बड़ी कम्पनी को आयुर्वेदिक दवाओं की फैक्ट्री के लिए मुख्यमंत्री तैयार करें । क्योंकि यहां दुर्लभ वनस्पतियां हैं ।
विन्ध्य विश्वविद्यालय की स्थापना--
इसकी मांग अरसे से हो रही है । इसके अलावा एक विशाल सांस्कृतिक प्रेक्षागृह, वेद-अध्ययन केंद्र, विन्ध्य शोध संस्थान आदि की भी मांग पिछले दौरों में कई बार की गई थी । उसे अमल में लाने से सांस्कृतिक, साहित्यिक तथा कला की दृष्टि से क्षेत्र का विकास होगा ।
वारेन हेस्टिंग के कक्ष का उपयोग हो।---
चुनार के किले में वारेन हेस्टिंग का विशाल कक्ष बंद पड़ा है । उसे सांस्कृतिक प्रेक्षागृह बनाया जा सकता है ।
पर्यटन स्थलों के पास वाणिज्यिक एवं आवासीय सुविधा---
जिले में दर्जनों पर्यटन स्थल हैं । वहां सीजन में हजारों हजार सैलानी आते हैं । उनकी सुख-सुविधा, ठहराव एवं कैफेटेरिया की व्यवस्था होनी चाहिए ।
स्प्रिंकिलर सिस्टम से सिंचाई---
असिंचित क्षेत्रों में उपज बढ़ाने के लिए स्प्रिंकिलर सिस्टम से सिंचाई का आश्वासन पूर्व में दिया गया था लेकिन अभी यह लागू नहीं हो पाया ।
गंगा-कटान-अनेक स्थलों खासकर सरकारी जाह्नवी होटल, कोनिया घाट, जैराम गिरी घाट, बरियाघाट में तारकेश्वर मंदिर का रास्ता गंगा में विलीन होता जा रहा है, उसकी मरम्मत होनी चाहिए ।
युवमंगल दलों को तवज्जह-गांव गांव में गठित युवा मंगल दलों को खेल का सामान मिलना बंद हो गया है । उसे शुरू किया जाना चाहिए ।
पाताल लोक मार्ग-कंतित में नागकुंड से ही नाग पाताल लोक गए थे, यहां नागकुंड जो दानवरैया की बावन बावली भी मानी जाती है,वह दयनीय स्थिति में है । उसका सुंदरीकरण होना चाहिए । अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए ।
सम्पर्क मार्ग पतले हैं-नव उद्घाटित चुनार पुल एवं भटौली घाट के पुल के सम्पर्क मार्ग बहुत पतले है । इनका चौड़ीकरण होना नितांत आवश्यक है ।
विकास के लिए डीएम ले बैठक- लगभग ढाई महीने पूर्व आए डीएम की पिछले महीनों में सक्रियता से साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए प्रशासन सन्नद्ध रहा। अब विकास के लिए योजना के लिए वे जनप्रतिनधियों के अलावा हर क्षेत्र के नागरिकों से सलाह, सुझाव लेकर विकास की रूपरेखा बनाएं, उसे शासन में भेंजे । मुख्यमंत्री स्वीकृति दें। ऐसी मांग यहां के लोगों की है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
मिर्जापुर: उ0 प्र0 के मुख्यमंत्री अति पुण्यदायी माघ माह में नमामि गंगे यात्रा के बीच यहां मौजूद होंगे । जरूर मुख्यमंत्री ने इस अवसर एवं तिथि का चयन बहुत सोच समझ कर किया होगा । क्योंकि वे पूरी धर्म धर्म-सत्ता से भी जुड़े हैं। देखा जाए तो धर्मसत्ता की ब्रह्मांड में सबसे बड़ी राजधानी विंध्य धाम ही है । तुलसीदास की दृष्टि में 'माघ मकर गति रवि जब होई, तीरथपतिहिं आव सब कोई' का निहितार्थ ही है कि माघ में संगम-स्नान के अवसर पर देवता पर्व मनाने एवं पर्यटन-विहार करने विंध्य पर्वत पर आते हैं । इसलिए इस अवधि में मुख्यमंत्री का आना जनांकांक्षाओं की पूर्ति का अवसर प्रतीत होता है ।
पुतलीघर की चिमनी से धुआं----
2014 के ही लोकसभा चुनाव में पीएम श्री नरेन्द्र मोदी की नज़र इस चिमनी पर पड़ी थी । तब वे पीएम नहीं थे । अब केंद्र एवं प्रदेश में दोनों जगह सरकार एक ही पार्टी की है तो चिमनी से धुआं निकलने की योजना बनानी चाहिए ।
चिमनी से धुआं का आशय उद्योग की स्थापना---
इसका आशय बड़े उद्योग की स्थापना से संबंधित है । विंध्य पहाड़ी पर किसी बड़ी कम्पनी को आयुर्वेदिक दवाओं की फैक्ट्री के लिए मुख्यमंत्री तैयार करें । क्योंकि यहां दुर्लभ वनस्पतियां हैं ।
विन्ध्य विश्वविद्यालय की स्थापना--
इसकी मांग अरसे से हो रही है । इसके अलावा एक विशाल सांस्कृतिक प्रेक्षागृह, वेद-अध्ययन केंद्र, विन्ध्य शोध संस्थान आदि की भी मांग पिछले दौरों में कई बार की गई थी । उसे अमल में लाने से सांस्कृतिक, साहित्यिक तथा कला की दृष्टि से क्षेत्र का विकास होगा ।
वारेन हेस्टिंग के कक्ष का उपयोग हो।---
चुनार के किले में वारेन हेस्टिंग का विशाल कक्ष बंद पड़ा है । उसे सांस्कृतिक प्रेक्षागृह बनाया जा सकता है ।
पर्यटन स्थलों के पास वाणिज्यिक एवं आवासीय सुविधा---
जिले में दर्जनों पर्यटन स्थल हैं । वहां सीजन में हजारों हजार सैलानी आते हैं । उनकी सुख-सुविधा, ठहराव एवं कैफेटेरिया की व्यवस्था होनी चाहिए ।
स्प्रिंकिलर सिस्टम से सिंचाई---
असिंचित क्षेत्रों में उपज बढ़ाने के लिए स्प्रिंकिलर सिस्टम से सिंचाई का आश्वासन पूर्व में दिया गया था लेकिन अभी यह लागू नहीं हो पाया ।
गंगा-कटान-अनेक स्थलों खासकर सरकारी जाह्नवी होटल, कोनिया घाट, जैराम गिरी घाट, बरियाघाट में तारकेश्वर मंदिर का रास्ता गंगा में विलीन होता जा रहा है, उसकी मरम्मत होनी चाहिए ।
युवमंगल दलों को तवज्जह-गांव गांव में गठित युवा मंगल दलों को खेल का सामान मिलना बंद हो गया है । उसे शुरू किया जाना चाहिए ।
पाताल लोक मार्ग-कंतित में नागकुंड से ही नाग पाताल लोक गए थे, यहां नागकुंड जो दानवरैया की बावन बावली भी मानी जाती है,वह दयनीय स्थिति में है । उसका सुंदरीकरण होना चाहिए । अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए ।
सम्पर्क मार्ग पतले हैं-नव उद्घाटित चुनार पुल एवं भटौली घाट के पुल के सम्पर्क मार्ग बहुत पतले है । इनका चौड़ीकरण होना नितांत आवश्यक है ।
विकास के लिए डीएम ले बैठक- लगभग ढाई महीने पूर्व आए डीएम की पिछले महीनों में सक्रियता से साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए प्रशासन सन्नद्ध रहा। अब विकास के लिए योजना के लिए वे जनप्रतिनधियों के अलावा हर क्षेत्र के नागरिकों से सलाह, सुझाव लेकर विकास की रूपरेखा बनाएं, उसे शासन में भेंजे । मुख्यमंत्री स्वीकृति दें। ऐसी मांग यहां के लोगों की है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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