इसे कलियुग नहीं अविश्वास युग कहिए जनाब !

पति-पत्नी के कमरे में लगेगा 'आप कैमरे की नज़र में है' की तख्ती----
लगता है कि बाजार में अपराधियों और चोरोंकी बहार है !----
मिर्जापुर। घर से निकलते 'आप कैमरे की नज़र में हैं।' की तख्ती दिखाई पड़ती है । सामान्यतया इस पर किसीकी नज़र कम पड़ती है । चौराहे पर भी यह लिखा मिल जाएगा । ऑफिस-दफ्तर-स्कूल-कालेज जिधर सिर घुमाइए, हर जगह यहीं लिखा मिल जाएगा ।
दुकानों में भी आप तीसरी नज़र में हो रहे हैं कैद !----
विज्ञान ने बड़ी तपस्या कर भगवान शंकर की तीसरी आंख की जब से कॉपीराइट कर लिया है तब से दुकानों में भी मेन गेट से अंदर जाते ही लगभग हर काउंटर पर कैमरा एक्शन मोड में हैं ।
पहले लिखा होता था 'ग्राहक हमारा मालिक है।'---
व्यापार जगत में ग्राहक को 'मालिक' माना जाता था । दुकानदार का यह मालिक अपने आप जगत के मालिक 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश' का दर्जा वैसे प्राप्त कर लेता था जैसे किसी सरकारी आयोग में दर्जा प्राप्त को टेम्पररी मंत्री मान लिया जाता है । लेकिन अब मालिक वाली तख्ती दुकानों में नहीं दिखती । शक वाली तख्ती आप सीसी कैमरे की नज़र में है का अवश्य मिल जाती है ।
आखिर ग्राहक क्या हुआ ?----
मालिक पद से वंचित ग्राहक अब क्या हुआ, यह 'मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना:' (यानि अलग अलग मस्तिष्क की अलग अलग राय) ही तय कर बताएं ।
अब तो स्कूली-बसों में भी कैमरे लगेंगे!---
अविश्वास का दौर है । इसे कलियुग की जगह 'अविश्वासयुग'  कहा जाए तो ज्यादा अच्छा । रिश्तों से विश्चास का गहरा भाव वेभाव हो गया है । घटनाएं, दुर्घटनाएं, दुःखद घटनाएं तथा असहनीय और हृदयविदारक घटनाएं ताल ठोक मैदान में हैं । तकनीकी क्रांति मची है । अब स्कूल/कालेज के लिए बच्चे/बच्चियों को ढोने वाली बसों/वाहनों में भी 'आप कैमरे की नज़र में है' लगाना कानूनी बाध्यता हो गई है ।
एक समय ऐसा भी आ रहा है !----
समय ऐसा भी आ रहा है कि घर के बाथरूम तक में 'आप कैमरे की नज़र में होंगे', पति-पत्नी के कमरे की निगरानी भी यही कैमरा करेगा ताकि परिवार-अदालत में पेश कर सिद्ध किया जा सके कि कौन कितने पानी में है ।
                      ©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
मूल लेखक का नाम उड़ाकर (डिलीट) अन्य का नाम जोड़ना दंडनीय है ।

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