'मिड डे मील' की लड़ाई युगों युगों से हो रही है-योगेश्वर, श्रीकृष्ण की भी शिकायत थी-'मैया' मैं नहीं माखन खायो

मिर्जापुर। योगेश्वर श्रीकृष्ण की बहन योगमाया के धाम में ही नहीं पूरे प्रदेश सहित हर प्रदेशों में बच्चों के 'मिड डे मील' में 'कंस-रवैया' अपनाए जाने के मामले प्रकाश में आते रहते हैं । यह लड़ाई युगों पूर्वसे चली आ रही है। 
द्वापर की लड़ाई---
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस लड़ाई के खिलाफ आंदोलन किया । वे गोकुल की गृहमंत्री ही कहें तो अपनी मां यशोदा के समक्ष प्रदर्शन कर रहे हैं और बोल रहे हैं-'मैया मैं नहीं माखन खायो ।' जबकि उनके मुख में माखन लगा हुआ है ।
श्रीकृष्ण कहना क्या चाहते हैं?---
श्रीकृष्ण कहना यह चाहते हैं कि मक्खन खाने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ होंठ में लगाने के लिए मिला है । बात सही भी है क्योंकि गोकुल का सारा दूध, दही, मक्खन मथुरा का तानाशाह तत्कालीन हिटलर और ईदी अमीन जैसा कंस शासक उठवा ले जा रहा था ।
बालाधिकार योजना---
इस योजना के तहत दूध, दही, घी और मक्खन पर 14 साल तक के बच्चों का अधिकार होता है । क्योंकि मानसिक और शारीरिक विकास का यह महत्त्वपूर्ण समय होता है ।
मिर्जापुर में फिर हल्ला-गुल्ला---
जिले के मझवां ब्लाक के बरैनी ग्राम में 26 फरवरी को जांच में पता चला कि एक बेसिक प्राथमिक स्कूल में एक किलो चावल तथा एक पैकेट दूध में बच्चों को खुराकी दी गई । हल्लागुल्ला जोरों पर बुधवार (26 फरवरी) से शुरु हुआ है और 28 फरवरी की सुर्खियों में मामला आ गया है ।
कौन दोषी ?---
प्रथमतः शोषक से पहले शोषित दोषी माना जाता है । लंबे दिनों से गड़बड़झाला होता रहा और गांव के मुखिया, पिछले चुनाव में ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़कर पराजित हुए अन्य प्रत्याशी, गांव में वे प्रबुद्ध कहे जाने वाले लोग जो प्रायः देशभर की ही नहीं विश्वभर की समस्या पर टिप्पणी करते रहते हैं, दिनभर सोशल मीडिया पर उंगलियां फेरने वाले, गांव-गांव तक फैले और कोटेदारों की शुभकामनाएं प्रकाशित करने वाले क्या करते रहें ?  क्यों समन्वयक की आकस्मिक जांच में यह सब मामला आया ?
इसके पहले 'नमक-रोटी' में बच्चों के खिलाफ खड़े होने वाले..--
6 माह पहले इसी जिले में मिड डे मील योजना में बच्चों को नमक-रोटी खिलाई गई । एक ग्रामीण पत्रकार ने इसे उठाया तो वह मुलजिम बन गया । जिले के अधिकांश 'कलमधारियों' के कलम का तत्कालीन प्रशासन के सामने 'आत्म-समर्पण' जगजाहिर हुआ । बहुतों की कलम की स्याही खत्म हो गई यह लिखकर देने के बाद कि उनका नमक-रोटी प्रकरण से कोई मतलब नहीं । वे हुजुरे-आला के कदमों में सलामी ठोकने के लिए हाजिर हैं ।
यह तो गनीमत अंतरराष्ट्रीय मीडिया का, जिसने मामले को लपक लिया--
यूनिसेफ के पैसे से संचालित योजना के कारण यह माला अंतरराष्ट्रीय बन गया । सब मुंह के बल धड़ाम हो गए, वरना वह ग्रामीण पत्रकार राष्ट्रद्रोह तक में जेल की सींखचों में सड़ता रहता और बाहर सब खिल्ली उड़ाते रहते ।
जिमि दसनन्ह मोहिं जीभ बिचारी...
इस बार के मामले में वर्तमान जिला प्रशासन ने सम्पूर्ण प्रकरण की गम्भीर जांच का आदेश दिया है । 32 बच्चों के मामले में समन्वयक सहित उन लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए कि 'जिमि दसनन्ह मोहिं जीभ बिचारी' चौपाई के 32 दांतों में किन किन दांतों ने मिड डे मील को चबाने में भूमिका निभाई ?
                     -सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
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