मिर्जापुर। साधना, आराधना और मनोवांछित फल प्राप्ति के गुप्त नवरात्र की पूर्णाहित के वक्त समाजवादी पार्टी ने विंध्य क्षेत्र के इस देवी-धाम में अपनी पार्टी की कमान श्री देवीप्रसाद चौधरी के हाथों थमा कर इस धाम को प्रसादयुक्त किया है ।
आशीष की जगह अब देवीप्रसाद---
मां विन्ध्यवासिनी के धाम में आशीष के साथ प्रसाद मिलता है लिहाजा सपा के युवा मुखिया श्री अखिलेश यादव ने अपने जिला अध्यक्ष श्री आशीष यादव के बाद श्री देवीप्रसाद चौधरी को अध्यक्ष बनाकर यह संदेश देना चाहा है कि सपा सिर्फ यदुवंशी ही नहीं है । द्वापर में जिस प्रकार अखिलेश रूप योगेश्वर कृष्ण सबका भला किया करते थे, लिहाजा वे सबके लिए सोचते है ।
दर-असल भाजपा ने दिया विंध्यधाम को प्रमुखता- -
भाजपा राज में इस विंध्यधाम को विशेष स्थान दिया जाने लगा । भाजपा ने यहां के तीर्थपुरोहित श्री रत्नाकर मिश्र को एक टिकट क्या दिया कि उत्तर प्रदेश की बागडोर ही एक धर्मस्थान गोरखनाथ मंदिर के अधिष्ठाता श्री आदित्य योगीनाथ के हाथों शक्तिधाम ने सौंप दिया । नाम से 'देवी' को पावरफुल बनाने के पीछे यह निहितार्थ भी देखा जा रहा है ताकि अगले चुनाव में 'प्रसाद' के रुप में सपा को सत्ता मिल सके ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि का लाभ---
साइकिल की अगली सीट पर श्री देवीप्रसाद चौधरी को बैठाते समय निश्चित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने मिर्जापुर में श्री चौधरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन-मनन किया । पिता स्व पुरुषोत्तम चौधरी का वर्ष 1977 में जनता पार्टी लहर में विधायक चुना जाना, भाई श्री भगवतीप्रसाद चौधरी का 1985 में विधायक और 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनना उन्हें आकर्षक लगा हो । लिहाजा श्री देवीप्रसाद चौधरी जो बतौर जिला उपाध्यक्ष श्री आशीष यादव की साइकिल पर पिछले कैरियर पर बैठे थे, उन्हें अगली सीट पर बैठा दिया ताकि साइकिल की घण्टी श्री चौधरी ही बजाएं । संभव है श्री आशीष यादव को आधुनिक किसी सायकिल पर बैठाया जाए क्योंकि साइकिल से उतरने के बाद भी श्री यादव के उत्साह में कमी नहीं दिख रही है ।
-©सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
कॉपीराइट का उल्लंघन दंडनीय है ।
आशीष की जगह अब देवीप्रसाद---
मां विन्ध्यवासिनी के धाम में आशीष के साथ प्रसाद मिलता है लिहाजा सपा के युवा मुखिया श्री अखिलेश यादव ने अपने जिला अध्यक्ष श्री आशीष यादव के बाद श्री देवीप्रसाद चौधरी को अध्यक्ष बनाकर यह संदेश देना चाहा है कि सपा सिर्फ यदुवंशी ही नहीं है । द्वापर में जिस प्रकार अखिलेश रूप योगेश्वर कृष्ण सबका भला किया करते थे, लिहाजा वे सबके लिए सोचते है ।
दर-असल भाजपा ने दिया विंध्यधाम को प्रमुखता- -
भाजपा राज में इस विंध्यधाम को विशेष स्थान दिया जाने लगा । भाजपा ने यहां के तीर्थपुरोहित श्री रत्नाकर मिश्र को एक टिकट क्या दिया कि उत्तर प्रदेश की बागडोर ही एक धर्मस्थान गोरखनाथ मंदिर के अधिष्ठाता श्री आदित्य योगीनाथ के हाथों शक्तिधाम ने सौंप दिया । नाम से 'देवी' को पावरफुल बनाने के पीछे यह निहितार्थ भी देखा जा रहा है ताकि अगले चुनाव में 'प्रसाद' के रुप में सपा को सत्ता मिल सके ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि का लाभ---
साइकिल की अगली सीट पर श्री देवीप्रसाद चौधरी को बैठाते समय निश्चित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने मिर्जापुर में श्री चौधरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन-मनन किया । पिता स्व पुरुषोत्तम चौधरी का वर्ष 1977 में जनता पार्टी लहर में विधायक चुना जाना, भाई श्री भगवतीप्रसाद चौधरी का 1985 में विधायक और 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनना उन्हें आकर्षक लगा हो । लिहाजा श्री देवीप्रसाद चौधरी जो बतौर जिला उपाध्यक्ष श्री आशीष यादव की साइकिल पर पिछले कैरियर पर बैठे थे, उन्हें अगली सीट पर बैठा दिया ताकि साइकिल की घण्टी श्री चौधरी ही बजाएं । संभव है श्री आशीष यादव को आधुनिक किसी सायकिल पर बैठाया जाए क्योंकि साइकिल से उतरने के बाद भी श्री यादव के उत्साह में कमी नहीं दिख रही है ।
-©सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
कॉपीराइट का उल्लंघन दंडनीय है ।

0 टिप्पणियाँ