पशु भी अपनों को पहचानते हैं

मिर्जापुर । किसी बंदर को करंट लग जाए तो सारे बंदर इकट्ठे होकर प्रायः उत्पात मचा देते हैं लेकिन पशु होकर भी बंदरों में अपनों की पहचान है । जो बंदरों से प्रेम करते हैं, उन्हें बंदर बोलते नहीं । इसका एक नजारा तिवराने टोला स्थित ट्रांसफार्मर पर करंट से घायल होकर गिरे बंदर के मामले में  देखा गया ।
     घटना यह है कि नगर के पसरहट्टा निवासी उद्यमी राज माहेश्वरी जो प्रतिदिन नगर में घूमते गाय और साड़ को घास-फूस नहीं बल्कि फल-फूल खिलाते हैं । झोले में भरकर निकल पड़ते हैं । कभी किसी मुहल्ले में तो कभी किसी मुहल्ले में गाय-साड़ और बंदरों को केला, सेब, मिष्ठान्न, लाई-बादाम पट्टी आदि खिलाते हैं । सोमवार को वे तिवराने टोला में रुके तथा बंदरों को अपने हाथ से केला खिलाने लगे । इसी बीच ऊपर से एक बंदर कूदा लेकिन ट्रांसफार्मर में फंस गया और करंट लगने से घायल हो गया ।
माहेश्वरी अस्पताल ले गए--
किसी प्रकार घायल बंदर को राज माहेश्वरी ने बाहर निकाला । तब तक छतों पर पचासों बंदर इकट्ठे हो गए । लेकिन एक भी बंदर काटने नहीं दौड़ा । माहेश्वरी उसे फौरन अस्पताल ले गए । इलाज कराकर अपने घर ले गए । जहां उपचार चल रहा है ।
                       -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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