त्रेतायुग के ब्यूटी-पार्लर !-----
'त्रेतायुग में भी ब्यूटीपार्लर थे।जहांसे शूर्पणखा कटे नाक-कान का प्लास्टिक-सर्जरी कराके आई थी, लक्ष्मणने उसे पहचान लिया तथा काटा नहीं, सिर्फ उसे हटा दिया!'---
इस पोस्ट पर सिंचाई विभाग के एक इज्क्यूटिव इंजीनियर ने पूछा-'ऐसा कहीं उल्लेख हैं या यह आपकी अपनी व्याख्या है ?--
उत्तर-रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड के 17वें दोहे का उल्लेख कर रहा हूँ । जिसके अध्ययन से स्पष्ट होगा कि लक्ष्मण जी ने नाक-कान नहीं काटा ।
दोहा- लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्ह ।
ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्ह ।। अर कां, 17
भावार्थ-लक्ष्मण जी ने बड़ी फुर्ती से उसको बिना नाक-कान की कर दिया । मानो उसके हाथ रावण को चुनौती दी हो ।
इस दोहे से प्लास्टिक सर्जरी का बोध होता है । त्रेतायुग बहुत ही तेज टेक्नोलॉजी का युग था । लंका से चलते समय सीता जी ने जो चूड़ामणि हनुमान जी को दी थी, वह उस वक्त का 'पेनड्राइव' था । जिसमें लंका की भौगौलिक, भौतिकता, सैन्य शक्ति आदि का पूरा विवरण था । फिलहाल एक नहीं अनेक उदाहरण हैं जो वर्तमान टेक्नोलाजी से आगे परिलक्षित होते हैं । रामचन्द्र जी द्वारा जो अंगूठी भेजी गई थी, वह भी पेनड्राइव ही था ।--
वाल्मीकि रामायण--
इस रामायण के अरण्यकांड के 18वें सर्ग के 21वें श्लोक में शूर्पणखा के नाक-कान कांटने का उल्लेख है । वह तब, जब शूर्पणखा विवाह से इनकार होने पर सीताजी पर आक्रमण करती हैं । इस स्थिति में राम जी के आदेश पर लक्ष्मण जी ने तलवार लेकर प्रतिकार किया । निश्चित रुप से युद्ध में अंग भंग होता ही है ।
उक्त स्थितियों से स्पष्ट होता भी है कि राम जी से विवाह के लिए कुरूपा शूर्पणखा सुंदर बन कर आई थी । अस्थाई ही सही सुंदरता ब्यूटी पार्लर से मिलती है । आज तो पुरुष पार्लर में भी लाइन लगी है ।
उक्त धर्मग्रन्थों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वह ब्यूटीशियन के पास गईं । वर्तमान दौर में बहुत से लोग विवाह के पूर्व कन्या का साबुन से मुंह धुलवाते हैं, ऐसे भी कई उदाहरण मिले हैं ।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मूल लेखक का नाम हटाकर किसी अन्य का जोड़ना कानूनी अपराध है ।
'त्रेतायुग में भी ब्यूटीपार्लर थे।जहांसे शूर्पणखा कटे नाक-कान का प्लास्टिक-सर्जरी कराके आई थी, लक्ष्मणने उसे पहचान लिया तथा काटा नहीं, सिर्फ उसे हटा दिया!'---
इस पोस्ट पर सिंचाई विभाग के एक इज्क्यूटिव इंजीनियर ने पूछा-'ऐसा कहीं उल्लेख हैं या यह आपकी अपनी व्याख्या है ?--
उत्तर-रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड के 17वें दोहे का उल्लेख कर रहा हूँ । जिसके अध्ययन से स्पष्ट होगा कि लक्ष्मण जी ने नाक-कान नहीं काटा ।
दोहा- लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्ह ।
ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्ह ।। अर कां, 17
भावार्थ-लक्ष्मण जी ने बड़ी फुर्ती से उसको बिना नाक-कान की कर दिया । मानो उसके हाथ रावण को चुनौती दी हो ।
इस दोहे से प्लास्टिक सर्जरी का बोध होता है । त्रेतायुग बहुत ही तेज टेक्नोलॉजी का युग था । लंका से चलते समय सीता जी ने जो चूड़ामणि हनुमान जी को दी थी, वह उस वक्त का 'पेनड्राइव' था । जिसमें लंका की भौगौलिक, भौतिकता, सैन्य शक्ति आदि का पूरा विवरण था । फिलहाल एक नहीं अनेक उदाहरण हैं जो वर्तमान टेक्नोलाजी से आगे परिलक्षित होते हैं । रामचन्द्र जी द्वारा जो अंगूठी भेजी गई थी, वह भी पेनड्राइव ही था ।--
वाल्मीकि रामायण--
इस रामायण के अरण्यकांड के 18वें सर्ग के 21वें श्लोक में शूर्पणखा के नाक-कान कांटने का उल्लेख है । वह तब, जब शूर्पणखा विवाह से इनकार होने पर सीताजी पर आक्रमण करती हैं । इस स्थिति में राम जी के आदेश पर लक्ष्मण जी ने तलवार लेकर प्रतिकार किया । निश्चित रुप से युद्ध में अंग भंग होता ही है ।
उक्त स्थितियों से स्पष्ट होता भी है कि राम जी से विवाह के लिए कुरूपा शूर्पणखा सुंदर बन कर आई थी । अस्थाई ही सही सुंदरता ब्यूटी पार्लर से मिलती है । आज तो पुरुष पार्लर में भी लाइन लगी है ।
उक्त धर्मग्रन्थों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वह ब्यूटीशियन के पास गईं । वर्तमान दौर में बहुत से लोग विवाह के पूर्व कन्या का साबुन से मुंह धुलवाते हैं, ऐसे भी कई उदाहरण मिले हैं ।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मूल लेखक का नाम हटाकर किसी अन्य का जोड़ना कानूनी अपराध है ।


0 टिप्पणियाँ