रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: अपने न्याय प्रिय कार्यशैली की बदौलत एक तरफ जहां जिले के एसपी स्वप्निल ममगाई जनपद वासियों के मन में रच बस गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ विगत 1 फरवरी को बछंरावा निवासिनी बीएससी की छात्रा वंशिका हत्याकांड का जल्दबाजी में किए गए खुलासे की थ्योरी पीड़ित और आरोपी परिजनों के साथ साथ जनपद वासियों के भी गले नहीं उतर रहा है जिसकी वजह से शंकाओं के घेरे में भी है।
आपको बता दें कि, वंशिका हत्याकांड को लेकर जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर रायबरेली जनपद की पुलिसिया कार्यवाही को लेकर असंतुष्टा का बाजार गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ मृतिका वंशिका के माता-पिता भी लगातार पुलिसिया कार्यवाही से असंतुष्ट दिख रहे हैं। मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। मृतिका वंशिका के माता पिता का कहना है कि, निर्दोषों को सजा न दी जाए तो वहीं दोषियों को फांसी दी जाए। वंशिका के पिता ने अपनी पुत्री की निशंक हत्या के मामले में योगी आदित्यनाथ से मिलकर सीबीआई जांच की मांग की है। जिस पर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मृतिका वंशिका के पिता को न्याय का भरोसा दिलाया है।
दूसरी तरफ वंशिका हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है जनपदवासी लगातार इस हत्या के संबंध में पुलिसिया कार्यवाही पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे है। लोगों का कहना है कि, रायबरेली पुलिस द्वारा जल्दबाजी में किए गए खुलासे की थ्योरी समझ से परे है। रायबरेली पुलिस अपने गुटविल के चक्कर में निर्दोषों को जेल भेज कर असली दोषियों से मोटी कमाई कर ली है।
मामले के मुख्य आरोपी अतुल गुप्ता पुत्र पारसनाथ गुप्ता, ललित गुप्ता पुत्र राम नरेश गुप्ता, तथा कृष्ण चंद्र पुत्र राजाराम के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। इनके परिजन यह बात तो स्वीकारते हैं की उनके संबंध मृतिका और उनके परिजनों से थे टेलिफोनिक वार्ता भी होती थी, गलतियों पर पैर छूकर माफी भी मांगी गई। लेकिन इस हत्याकांड में इन तीनों के संलिप्त होने से इंकार कर रहे हैं। अतुल गुप्ता के पिता पारसनाथ गुप्ता तथा ग्राम वासियों का कहना है कि, पिछले 50 सालों का रिकॉर्ड पुलिस खंगाल कर देख ले तो गुप्ता परिवार को साफ सुथरा पाएगी।
परिवारी जनों तथा ग्राम वासियों का कहना है कि, घटना के 1 दिन पहले, घटना के दिन तथा घटना के बाद आरोपित अतुल गुप्ता अपनी दुकान पर ही था। पिता पारसनाथ का कहना है कि, उनका बेटा निर्दोष है पुलिस द्वारा किसी षड्यंत्र का शिकार हुआ है। उनके बेटे को फंसाया गया है। उनके परिवार पर पुलिस द्वारा अत्याचार किया गया है। घर की बुजुर्ग, महिलाओं तथा बेटियों पर बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया गया है।
आरोपित अतुल गुप्ता को गिरफ्तार कर जब पुलिस ने पूछताछ किया तो उसने बताया कि, उसकी दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है जो उसकी बेगुनाही का सबूत है। जिसके बाद पुलिस ने आनन-फानन आरोपित के घर पहुंच कर सीसीटीवी कैमरे को नष्ट कर डिस्क उठा ले गए, ताकि आरोपी अतुल गुप्ता को परिवारीजन निर्दोष साबित न कर पांए। पारसनाथ गुप्ता के बेटे को निर्दोष साबित करने का मात्र एक साक्ष सीसीटीवी कैमरा भी पुलिस ने तोड़ उसकी डिस्क गायब कर दी है। उन्हें अपाहिज बना दिया है। उनका कहना है कि, अब वे अपने बेटे को निर्दोष कैसे साबित करें।
इधर जनपद वासियों में भी इस हत्याकांड को लेकर भनभनाहट तेज है। कहीं ऐसा तो नहीं की जनपद वासियों की यह भनभनाहट किसी बड़े आंदोलन का रूप ले ले? यह बात तो समय के गर्भ में है।
महराजगंज/रायबरेली: अपने न्याय प्रिय कार्यशैली की बदौलत एक तरफ जहां जिले के एसपी स्वप्निल ममगाई जनपद वासियों के मन में रच बस गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ विगत 1 फरवरी को बछंरावा निवासिनी बीएससी की छात्रा वंशिका हत्याकांड का जल्दबाजी में किए गए खुलासे की थ्योरी पीड़ित और आरोपी परिजनों के साथ साथ जनपद वासियों के भी गले नहीं उतर रहा है जिसकी वजह से शंकाओं के घेरे में भी है।
आपको बता दें कि, वंशिका हत्याकांड को लेकर जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर रायबरेली जनपद की पुलिसिया कार्यवाही को लेकर असंतुष्टा का बाजार गर्म है तो वहीं दूसरी तरफ मृतिका वंशिका के माता-पिता भी लगातार पुलिसिया कार्यवाही से असंतुष्ट दिख रहे हैं। मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। मृतिका वंशिका के माता पिता का कहना है कि, निर्दोषों को सजा न दी जाए तो वहीं दोषियों को फांसी दी जाए। वंशिका के पिता ने अपनी पुत्री की निशंक हत्या के मामले में योगी आदित्यनाथ से मिलकर सीबीआई जांच की मांग की है। जिस पर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मृतिका वंशिका के पिता को न्याय का भरोसा दिलाया है।
दूसरी तरफ वंशिका हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है जनपदवासी लगातार इस हत्या के संबंध में पुलिसिया कार्यवाही पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे है। लोगों का कहना है कि, रायबरेली पुलिस द्वारा जल्दबाजी में किए गए खुलासे की थ्योरी समझ से परे है। रायबरेली पुलिस अपने गुटविल के चक्कर में निर्दोषों को जेल भेज कर असली दोषियों से मोटी कमाई कर ली है।
मामले के मुख्य आरोपी अतुल गुप्ता पुत्र पारसनाथ गुप्ता, ललित गुप्ता पुत्र राम नरेश गुप्ता, तथा कृष्ण चंद्र पुत्र राजाराम के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। इनके परिजन यह बात तो स्वीकारते हैं की उनके संबंध मृतिका और उनके परिजनों से थे टेलिफोनिक वार्ता भी होती थी, गलतियों पर पैर छूकर माफी भी मांगी गई। लेकिन इस हत्याकांड में इन तीनों के संलिप्त होने से इंकार कर रहे हैं। अतुल गुप्ता के पिता पारसनाथ गुप्ता तथा ग्राम वासियों का कहना है कि, पिछले 50 सालों का रिकॉर्ड पुलिस खंगाल कर देख ले तो गुप्ता परिवार को साफ सुथरा पाएगी।
परिवारी जनों तथा ग्राम वासियों का कहना है कि, घटना के 1 दिन पहले, घटना के दिन तथा घटना के बाद आरोपित अतुल गुप्ता अपनी दुकान पर ही था। पिता पारसनाथ का कहना है कि, उनका बेटा निर्दोष है पुलिस द्वारा किसी षड्यंत्र का शिकार हुआ है। उनके बेटे को फंसाया गया है। उनके परिवार पर पुलिस द्वारा अत्याचार किया गया है। घर की बुजुर्ग, महिलाओं तथा बेटियों पर बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया गया है।
आरोपित अतुल गुप्ता को गिरफ्तार कर जब पुलिस ने पूछताछ किया तो उसने बताया कि, उसकी दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है जो उसकी बेगुनाही का सबूत है। जिसके बाद पुलिस ने आनन-फानन आरोपित के घर पहुंच कर सीसीटीवी कैमरे को नष्ट कर डिस्क उठा ले गए, ताकि आरोपी अतुल गुप्ता को परिवारीजन निर्दोष साबित न कर पांए। पारसनाथ गुप्ता के बेटे को निर्दोष साबित करने का मात्र एक साक्ष सीसीटीवी कैमरा भी पुलिस ने तोड़ उसकी डिस्क गायब कर दी है। उन्हें अपाहिज बना दिया है। उनका कहना है कि, अब वे अपने बेटे को निर्दोष कैसे साबित करें।
इधर जनपद वासियों में भी इस हत्याकांड को लेकर भनभनाहट तेज है। कहीं ऐसा तो नहीं की जनपद वासियों की यह भनभनाहट किसी बड़े आंदोलन का रूप ले ले? यह बात तो समय के गर्भ में है।








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