रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: अगर दिल में कुछ करने की चाहत हो, कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, दृढ़ निश्चय के साथ साथ मजबूत इच्छाशक्ति भी हो, पर कड़ी मेहनत से अमल किया जाए तो क्या कुछ संभव नहीं है।
आपको बता दें कि, ऐसा ही एक मामला क्षेत्र के गांव कुसुढी सागरपुर में एक होनहार युवक के साथ देखने को मिला। जबकि सेना में जवान के रूप में भर्ती होने के लिए एक दर्जन बार प्रयास कर चुके, युवक को छोटी सी मेडिकल फिटनेस की कमी के कारण सेना में नहीं लिया गया। लेकिन युवक ने हिम्मत नहीं हारी और अंततोगत्वा अब उसे सेना के इंडियन आर्मी मेडिकल कोर में बतौर मेडिकल अफसर ट्रेनिंग देने के लिए चयनित कर लिया गया है। इससे एक और जहां अभ्यर्थी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
वहीं उसके सेना की वर्दी पहनने का मंसूबा मन में पाले मां और भाइयों की खुशी का ठिकाना नहीं है। गांव के रहने वाले कमलेन्द्र सिंह के भाई गौरव सिंह ने बताया कि, उनके पिता सूर्य करन सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद से रिटायर हो गए थे। जबकि उनकी मां यशोमती देवी सिंह ग्रहिणी है। पिता और माता का एक ही सपना था कि, उनका लड़का कमलेन्द्र सिंह भी सेना की वर्दी पहने। हालांकि सूर्यकरन सिंह का देहांत 5 साल पहले हो गया है। परिवार में बच्चों क परवरिश का जिम्मा यशोमती सिंह के कंधों पर आ गया।
परिवार में कमलेंद्र सिंह के बड़े भाई वीरेंद्र सिंह कमलेन्द्र सिंह व गौरव सिंह तीन भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। 13 सितंबर 1996 को जन्मे कमलेंद्र सिंह ने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा शिक्षा राजकीय हाई स्कूल हलोर में प्राप्त की, इसके बाद उन्होंने दयानंद डिग्री कॉलेज बछरावां से बीएससी किया है। कमलेंद्र का कहना है कि, उन्होंने एक दर्जन बार सेना में भर्ती के लिए किस्मत आजमाई फिजिकल पास करने के बाद मेडिकल जांच में आंखों में थोड़ी कमी निकाल कर हर बार उसे सेना में भर्ती का अवसर नहीं मिला। लेकिन वह निराश नहीं हुआ मां और भाइयों ने हमेशा उसकी हौसला अफजाई की। अंततोगत्वा अब कमलेद्र सिंह का चयन इंडियन आर्मी मेडिकल कोर में कर लिया गया है और उसने बतौर ट्रेनी बिगत जनवरी माह मे ज्वाइन भी कर लिया है।
कमलेंद्र सिंह की उपलब्धि से मां का दामन खुशियों से भर गया है और वह सपना पूरा हो गया जो कभी कमलेंद्र के मां बाप ने देखा था।
महराजगंज/रायबरेली: अगर दिल में कुछ करने की चाहत हो, कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, दृढ़ निश्चय के साथ साथ मजबूत इच्छाशक्ति भी हो, पर कड़ी मेहनत से अमल किया जाए तो क्या कुछ संभव नहीं है।
आपको बता दें कि, ऐसा ही एक मामला क्षेत्र के गांव कुसुढी सागरपुर में एक होनहार युवक के साथ देखने को मिला। जबकि सेना में जवान के रूप में भर्ती होने के लिए एक दर्जन बार प्रयास कर चुके, युवक को छोटी सी मेडिकल फिटनेस की कमी के कारण सेना में नहीं लिया गया। लेकिन युवक ने हिम्मत नहीं हारी और अंततोगत्वा अब उसे सेना के इंडियन आर्मी मेडिकल कोर में बतौर मेडिकल अफसर ट्रेनिंग देने के लिए चयनित कर लिया गया है। इससे एक और जहां अभ्यर्थी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
वहीं उसके सेना की वर्दी पहनने का मंसूबा मन में पाले मां और भाइयों की खुशी का ठिकाना नहीं है। गांव के रहने वाले कमलेन्द्र सिंह के भाई गौरव सिंह ने बताया कि, उनके पिता सूर्य करन सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद से रिटायर हो गए थे। जबकि उनकी मां यशोमती देवी सिंह ग्रहिणी है। पिता और माता का एक ही सपना था कि, उनका लड़का कमलेन्द्र सिंह भी सेना की वर्दी पहने। हालांकि सूर्यकरन सिंह का देहांत 5 साल पहले हो गया है। परिवार में बच्चों क परवरिश का जिम्मा यशोमती सिंह के कंधों पर आ गया।
परिवार में कमलेंद्र सिंह के बड़े भाई वीरेंद्र सिंह कमलेन्द्र सिंह व गौरव सिंह तीन भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। 13 सितंबर 1996 को जन्मे कमलेंद्र सिंह ने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा शिक्षा राजकीय हाई स्कूल हलोर में प्राप्त की, इसके बाद उन्होंने दयानंद डिग्री कॉलेज बछरावां से बीएससी किया है। कमलेंद्र का कहना है कि, उन्होंने एक दर्जन बार सेना में भर्ती के लिए किस्मत आजमाई फिजिकल पास करने के बाद मेडिकल जांच में आंखों में थोड़ी कमी निकाल कर हर बार उसे सेना में भर्ती का अवसर नहीं मिला। लेकिन वह निराश नहीं हुआ मां और भाइयों ने हमेशा उसकी हौसला अफजाई की। अंततोगत्वा अब कमलेद्र सिंह का चयन इंडियन आर्मी मेडिकल कोर में कर लिया गया है और उसने बतौर ट्रेनी बिगत जनवरी माह मे ज्वाइन भी कर लिया है।
कमलेंद्र सिंह की उपलब्धि से मां का दामन खुशियों से भर गया है और वह सपना पूरा हो गया जो कभी कमलेंद्र के मां बाप ने देखा था।

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