रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोन गांव स्थित बाबा ओरीदास जी महाराज के मंदिर की तपोस्थली प्रांगण में बसंत पर्व पर लगने वाले सात दिवसीय मेले का शुभारंभ 30 जनवरी 2020 दिन बृहस्पतिवार को धूमधाम से हुआ। आज दूसरे दिन 31 जनवरी दिन शुक्रवार को पहले दिन से अधिक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तेजतर्रार कोतवाल अरुण कुमार सिंह ने भीड़ पर काबू पाने के लिए मेले की हर गली में जगह-जगह भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया हुआ है।
आपको बता दें कि, इन्हौना मार्ग पर महराजगंज से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा की ओर स्थित बाबा ओरी दास के प्राचीन मंदिर प्रांगण में सैकड़ों वर्षो पूर्व से बसंत पंचमी के दिन मेला लगता है। जिसमें क्षेत्र ही नहीं दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बुजुर्ग समर बहादुर पांडेय से जब हमारे संवाददाता ने ओरी दास बाबा के जीवन पर प्रकाश डालने के लिए बातचीत किया तो उनका कहना है कि, बाबा का जन्म मोन गांव के अवस्थी परिवार में 1710 ई में हुआ था। जिनको ओरी दास अवस्थी के नाम से लोग संबोधित करते थे।
श्री पांडेय का यह भी कहना है कि, बाबा की गांव के ही कुछ लोगों से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। जिसके चलते बाबा ने गांव त्याग दिया था और पास के ही गांव में वह रहने लगे थे। एक दिन वे खिचड़ी बना रहे थे तभी विपक्षियों ने एक व्यक्ति को भेजकर बाबा से सुलह का प्रस्ताव रखवाया और उन्हें अविलंब पूर्व नियोजित स्थान पर बुलाकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के उपरांत ग्रामीणों के सहयोग से बाबा का अंतिम संस्कार महराजगंज से इन्हौना मार्ग के किनारे स्थित बाबा की बाग में किया गया।
श्री पांडेय ने आगे बताया कि, बाबा की समाधि पर ही कुछ दिन बाद एक पीपल का पेड़ उगा जो, आज पूरे जनपद में अपनी विशालकाय के लिए अनोखी मिसाल बना हुआ है। सच्चे मन से दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं की दर्शन मात्र से हर मनोकामना पूर्ण होती है।
हमारी संवाददाता से बातचीत के दौरान समर बहादुर पांडेय ने यह भी बताया कि, बाबा की हत्या उपरांत, हत्या में शामिल लोगों के साथ लगातार घटनाएं घटित होने लगी। धीरे-धीरे गांव के उन सात घरों में दीपक जलाने वाला कोई नहीं बचा। घर खंडहर हो गये। बाबा की महिमा यूं फैली की आज खंडहर स्थान पर यदि कोई दीपक जलाने जाता है तो उसे भी बाबा स्वप्न देकर ऐसा न करने को आगाह करते हैं। तब से आज तक मेले का आयोजन होता चला आ रहा है।
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोन गांव स्थित बाबा ओरीदास जी महाराज के मंदिर की तपोस्थली प्रांगण में बसंत पर्व पर लगने वाले सात दिवसीय मेले का शुभारंभ 30 जनवरी 2020 दिन बृहस्पतिवार को धूमधाम से हुआ। आज दूसरे दिन 31 जनवरी दिन शुक्रवार को पहले दिन से अधिक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तेजतर्रार कोतवाल अरुण कुमार सिंह ने भीड़ पर काबू पाने के लिए मेले की हर गली में जगह-जगह भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया हुआ है।
आपको बता दें कि, इन्हौना मार्ग पर महराजगंज से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा की ओर स्थित बाबा ओरी दास के प्राचीन मंदिर प्रांगण में सैकड़ों वर्षो पूर्व से बसंत पंचमी के दिन मेला लगता है। जिसमें क्षेत्र ही नहीं दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बुजुर्ग समर बहादुर पांडेय से जब हमारे संवाददाता ने ओरी दास बाबा के जीवन पर प्रकाश डालने के लिए बातचीत किया तो उनका कहना है कि, बाबा का जन्म मोन गांव के अवस्थी परिवार में 1710 ई में हुआ था। जिनको ओरी दास अवस्थी के नाम से लोग संबोधित करते थे।
श्री पांडेय का यह भी कहना है कि, बाबा की गांव के ही कुछ लोगों से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। जिसके चलते बाबा ने गांव त्याग दिया था और पास के ही गांव में वह रहने लगे थे। एक दिन वे खिचड़ी बना रहे थे तभी विपक्षियों ने एक व्यक्ति को भेजकर बाबा से सुलह का प्रस्ताव रखवाया और उन्हें अविलंब पूर्व नियोजित स्थान पर बुलाकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के उपरांत ग्रामीणों के सहयोग से बाबा का अंतिम संस्कार महराजगंज से इन्हौना मार्ग के किनारे स्थित बाबा की बाग में किया गया।
हमारी संवाददाता से बातचीत के दौरान समर बहादुर पांडेय ने यह भी बताया कि, बाबा की हत्या उपरांत, हत्या में शामिल लोगों के साथ लगातार घटनाएं घटित होने लगी। धीरे-धीरे गांव के उन सात घरों में दीपक जलाने वाला कोई नहीं बचा। घर खंडहर हो गये। बाबा की महिमा यूं फैली की आज खंडहर स्थान पर यदि कोई दीपक जलाने जाता है तो उसे भी बाबा स्वप्न देकर ऐसा न करने को आगाह करते हैं। तब से आज तक मेले का आयोजन होता चला आ रहा है।

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