नहीं दिखे होली के रघुवीर और कन्हैया, पुराने ही फोटों को कर फ़िया नया

मिर्जापुर। तेजी से भागते दौर में होली की हंसी-ठिठोली, नृत्य-गीत-संगीत के साथ गुझिया, ठंडई खाने-खिलाने और पिलाने का सिलसिला तेजी से सिकुड़ता जा रहा है । वरना होली की खुमारी दसों दिन बाद उतरती थी और नगर सहित ग्रामीण अंचलों में ढोलक, मजीरा और ढभ खनकते रहते थे । होली के बाद कई दिनों तक फाग गीतों की गूंज लोगों के होलीमय बनाए रहती थी । 
होली कैद हुई मुट्ठी में : दिमाग हुआ कंजूस का धन---
दर-असल स्मार्ट फोन के साम्राज्य में होली लोगों की मुट्ठी में आकर सिकुड़ गई है । यहां तक कि कॉपी-कट & पेस्ट के जमाने में दूर-दराज से आए होली के फोटो और गीतों का ही इस्तेमाल हो रहा है । सामान्यतया लोग अपना दिमाग कंजूस के धन की तरह बना लिए हैं ।
होली की खबरें---
होली की छुट्टी के एक दिन बाद जब अखबारों के पन्नों पर लोगों की नज़र पड़ी तो मिर्जापुर की खबरों में 'अमर उजाला' में मिट्टी से खेली गई होली की खबर मिट्टी के सोंधेपन सी लगी । यह नए ढंग की होली रही । केमिकल के रंगों से दूर इस खबर में होली का वैविध्य झलका । कई समाचार माध्यमों में पूरा का पूरा मुंह लाल-पीला और काला की एक ही तरह के फोटो लोगों को रुचिकर नहीं लगे । अमर उजाला की कुछ अन्य फोटो सजीव लगे । इसी तरह हिंदुस्तान में तीन छोटे भोले-भाले बच्चों की होलीमय फोटो भी बच्चों की होली को सजीव बना दिए । यह भी फोटो होना चाहिए था---
होली खेलते फोटो में फूलों की होली, 'होली खेले रघुबीरा..' गीत के साथ भगवान श्रीराम तथा 'होली खेले मसाने में..' भोजपुरी गीत की गूंज को प्रमाणित करने के लिए फोटोग्राफरों को श्मशान में जाना चाहिए था । सन्नाटा मिलता तो भी खबर कि मिर्जापुर के श्मशान में बाबा विश्वनाथ होली खेलते नहीं दिखे । ब्रज और गोकुल की चर्चा करते उन घरों तक भी जाना चाहिए था, जहां छोटे बच्चों को राम तथा कृष्ण की तरह सजाकर होली को त्रेता और द्वापर तक से जोड़ दिया जाता है ।
लकीर के फकीर --
कामचलाऊँ पद्धति के चलते सिर्फ नोट दाहिने हाथ में लिया और गिना जा रहा । वरना अपने उत्तरदायित्वों का पालन बाएं हाथ और कमजोर कंधों पर डालकर इतिश्री किया जा रहा है । होली के एकाधिकार वाली गुझिया खाते -खिलाते दृश्य भी नदारद रहे । इसमें तो कोई RTI वाला सक्रिय नहीं होगा कि गुझिया जुटाने में गुझिया की चर्चा क्यों नहीं किया जा सका ?
    इस प्रकार होली का रसमय वातावरण परवान नहीं चढ़ पाया।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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