'भय बिनु होई न प्रीति' और 'एक बीमार सौ डॉक्टर' का बन गया माहौल--
मिर्जापुर। कोरोना को लेकर फिलहाल अच्छी स्थिति चल रही थी, मंडलीय अस्पताल में भर्ती तीसरे मरीज की भी रिपोर्ट निगेटिव आने से निश्चिंतता थी तभी देर रात जमालपुर से एक संदिग्ध कोरोना-मरीज के आने से फिर चिकित्सकों के चेहरे पर तनाव दिखाई पड़ने लगा । यह मरीज भी दुबई से अपने घर आया है ।
भय बिनु होई न प्रीति---
रामचरित मानस की यह चौपाई समुद्र पर श्रीराम के तीर धनुष चलाने के संदर्भ में है। वास्तव में मनुष्य डर से ही कानून मानता है । मौत से बचने के लिए पानमसाला न खाने की चेतावनी, हेलमेट लगा कर चलने के नियम को प्रायः लोग नहीं मानते । कोरोना वायरस का डर ऐसा छाया हुआ है कि बिना मतलब के भी लोग मास्क लगाकर चल रहे हैं । जबकि चिकित्सकों का कहना है कि यह मरीज या अस्पताल में कोरोना पीड़ित को देखने की जब जरूरत हो, तभी लगाएं ।
डुप्लीकेट डॉक्टरों की भरमार---
कोरोना से बचाव के लिए लिए ओरिजिनल डॉक्टरों की हिम्मत टूट रही है तो डुप्लीकेटों की भरमार है । क्या खाएं कि कोरोना दुम दबा के भाग जाए का फार्मूला संचार माध्यमों से लेकर राह चलते तक दिया जा रहा है ।
गिलोय खाए गिलोय गायब, कटहल के नखरे तो करेला मीठा लगे--
जब कोई गिलोय तो कोई कटहल, गिलोय, करौंदा का फार्मूला बता रहा है तब सब इसी पर टूट जा रहे हैं तो इसके भाव शेयर मार्केट की तरह उछल जा रहे हैं । कहीं कहीं पीपल के नीचे दीया जलाने का तो कहीं यज्ञ-हवन का टिप्स देते देखे जा रहे है लोग । सेनिटाइजर 5 गुना मंजिल उछल कर चढ़ गया है । बाजार कोरोना की तरह घातक हो गया है। कुछ जनपदों में मास्क के पीछे खेल में दवा-दुकानदारों के खिलाफ प्रशासन एक्शन में आया है । यहां भी इसकी जरूरत है ।
मां विन्ध्यवासिनी का पट हुआ बंद ---
सिद्धपीठाधीश्वरी मां विन्ध्यवासिनी का पट शुक्रवार की भोर से बंद हो गया । अनुमान है कि दुर्गा शक्तियां भी कोरोना से युद्ध करने अब निकलेंगी । ऐसा लगता भी है क्योंकि उधर मां विन्ध्यवासिनी सहित देश के सभी तीर्थधाम जैसे ही बंद होने लगे वैसे ही लॉक-डाउन की स्थिति बनने लगी । कोरोना को शिकस्त देने का यह सटीक फार्मूला भी है ।
नवरात्र में मानसिक पूजा--
मंदिरों के पट बंद होने का सकारात्मक लाभ यह उठाना चाहिए कि इस बार श्रद्धालु मानसिक पूजा करें । इसका धर्मग्रन्थों में विधान भी है । जिस पर देवी-देवताओं की कृपा होती है, वहीं मानसिक पूजा कर पाता है । फिर तो मन ही मंदिर हो जाता है।
कैसे करें मानसिक पूजा--
जो इस पूजा की विधि नहीं जानते उन्हें यह विधि अपनाने की कोशिश करनी चाहिए । सर्व प्रथम मूर्ति या चित्र के आगे आंख बंद कर बैठ जाए । मन में यह सोचे कि वे गंगोत्री का जल ले रहे हैं और उससे इष्टदेव को स्नान करा रहे हैं । नन्दिनी गाय का दुग्ध खुद दुह कर उससे पंचामृत बना रहे हैं। इसी प्रकार मलयगिरि पर जाकर वहां से चंदन ला रहे हैं और शरीर में स्थित मानसरोवर उपवन से पुष्प लाकर चढ़ा रहे हैं । इसी तरह अन्य पदार्थों को अपने आंतरिक मन तथा हृदय में खोज रहे हैं। इसी खोज में इष्टदेव मिल जाएंगे । बस कुछ दिन अभ्यास करना पड़ेगा ।
इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करना जरूरी--
WHO की चिंता भारत को लेकर इसलिए ज्यादा गम्भीर है क्योंकि भारतीयों का इम्यून सिस्टम (शरीर में रोग रूपी अपराधियों से लड़ने वाला आरक्षी तंत्र) कमजोर है । इसे मजबूत करने के लिए ब्रह्मांड के सबसे बड़े डॉक्टर भगवान सूर्य की लालकिरणों से मिलने वाले विटामिन का सेवन, ब्रह्मुहूर्त में सो के उठना, अल्युमीनियम के बर्तन में खाना या चाय आदि बना कर पीने से बचना, भरपेट ठूस कर खाने से बचना, जूता पहनकर खाने से परहेज, खाते समय बोलना नहीं, पालथी मारकर एवं बैठकर खाना आदि इतने सरल उपाय हैं कि इस तरह का जीवन जीने वाला कोरोना के बाप को भी शिकस्त दे सकता है।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट के तहत लेखन चोरी अपराध है ।
मिर्जापुर। कोरोना को लेकर फिलहाल अच्छी स्थिति चल रही थी, मंडलीय अस्पताल में भर्ती तीसरे मरीज की भी रिपोर्ट निगेटिव आने से निश्चिंतता थी तभी देर रात जमालपुर से एक संदिग्ध कोरोना-मरीज के आने से फिर चिकित्सकों के चेहरे पर तनाव दिखाई पड़ने लगा । यह मरीज भी दुबई से अपने घर आया है ।
भय बिनु होई न प्रीति---
रामचरित मानस की यह चौपाई समुद्र पर श्रीराम के तीर धनुष चलाने के संदर्भ में है। वास्तव में मनुष्य डर से ही कानून मानता है । मौत से बचने के लिए पानमसाला न खाने की चेतावनी, हेलमेट लगा कर चलने के नियम को प्रायः लोग नहीं मानते । कोरोना वायरस का डर ऐसा छाया हुआ है कि बिना मतलब के भी लोग मास्क लगाकर चल रहे हैं । जबकि चिकित्सकों का कहना है कि यह मरीज या अस्पताल में कोरोना पीड़ित को देखने की जब जरूरत हो, तभी लगाएं ।
डुप्लीकेट डॉक्टरों की भरमार---
कोरोना से बचाव के लिए लिए ओरिजिनल डॉक्टरों की हिम्मत टूट रही है तो डुप्लीकेटों की भरमार है । क्या खाएं कि कोरोना दुम दबा के भाग जाए का फार्मूला संचार माध्यमों से लेकर राह चलते तक दिया जा रहा है ।
गिलोय खाए गिलोय गायब, कटहल के नखरे तो करेला मीठा लगे--
जब कोई गिलोय तो कोई कटहल, गिलोय, करौंदा का फार्मूला बता रहा है तब सब इसी पर टूट जा रहे हैं तो इसके भाव शेयर मार्केट की तरह उछल जा रहे हैं । कहीं कहीं पीपल के नीचे दीया जलाने का तो कहीं यज्ञ-हवन का टिप्स देते देखे जा रहे है लोग । सेनिटाइजर 5 गुना मंजिल उछल कर चढ़ गया है । बाजार कोरोना की तरह घातक हो गया है। कुछ जनपदों में मास्क के पीछे खेल में दवा-दुकानदारों के खिलाफ प्रशासन एक्शन में आया है । यहां भी इसकी जरूरत है ।
मां विन्ध्यवासिनी का पट हुआ बंद ---
सिद्धपीठाधीश्वरी मां विन्ध्यवासिनी का पट शुक्रवार की भोर से बंद हो गया । अनुमान है कि दुर्गा शक्तियां भी कोरोना से युद्ध करने अब निकलेंगी । ऐसा लगता भी है क्योंकि उधर मां विन्ध्यवासिनी सहित देश के सभी तीर्थधाम जैसे ही बंद होने लगे वैसे ही लॉक-डाउन की स्थिति बनने लगी । कोरोना को शिकस्त देने का यह सटीक फार्मूला भी है ।
नवरात्र में मानसिक पूजा--
मंदिरों के पट बंद होने का सकारात्मक लाभ यह उठाना चाहिए कि इस बार श्रद्धालु मानसिक पूजा करें । इसका धर्मग्रन्थों में विधान भी है । जिस पर देवी-देवताओं की कृपा होती है, वहीं मानसिक पूजा कर पाता है । फिर तो मन ही मंदिर हो जाता है।
कैसे करें मानसिक पूजा--
जो इस पूजा की विधि नहीं जानते उन्हें यह विधि अपनाने की कोशिश करनी चाहिए । सर्व प्रथम मूर्ति या चित्र के आगे आंख बंद कर बैठ जाए । मन में यह सोचे कि वे गंगोत्री का जल ले रहे हैं और उससे इष्टदेव को स्नान करा रहे हैं । नन्दिनी गाय का दुग्ध खुद दुह कर उससे पंचामृत बना रहे हैं। इसी प्रकार मलयगिरि पर जाकर वहां से चंदन ला रहे हैं और शरीर में स्थित मानसरोवर उपवन से पुष्प लाकर चढ़ा रहे हैं । इसी तरह अन्य पदार्थों को अपने आंतरिक मन तथा हृदय में खोज रहे हैं। इसी खोज में इष्टदेव मिल जाएंगे । बस कुछ दिन अभ्यास करना पड़ेगा ।
इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करना जरूरी--
WHO की चिंता भारत को लेकर इसलिए ज्यादा गम्भीर है क्योंकि भारतीयों का इम्यून सिस्टम (शरीर में रोग रूपी अपराधियों से लड़ने वाला आरक्षी तंत्र) कमजोर है । इसे मजबूत करने के लिए ब्रह्मांड के सबसे बड़े डॉक्टर भगवान सूर्य की लालकिरणों से मिलने वाले विटामिन का सेवन, ब्रह्मुहूर्त में सो के उठना, अल्युमीनियम के बर्तन में खाना या चाय आदि बना कर पीने से बचना, भरपेट ठूस कर खाने से बचना, जूता पहनकर खाने से परहेज, खाते समय बोलना नहीं, पालथी मारकर एवं बैठकर खाना आदि इतने सरल उपाय हैं कि इस तरह का जीवन जीने वाला कोरोना के बाप को भी शिकस्त दे सकता है।
©कॉपीराइट एक्ट के तहत लेखन चोरी अपराध है ।


0 टिप्पणियाँ