1 अप्रैल से इंटरनेट से शैक्षणिक सत्र शुरू करना अमानवीय---
PM से हस्तक्षेप की अभिभावकों की विनती---
छोटे-बड़े शहर सबकी कुंडली लाकडाउन ने एक-सी कर दी है । भगवान भास्कर के अस्ताचल के पहले से ही गांव हो या शहर सभी स्थानों पर 'मरघट-सा सन्नाटा' छा जा रहा है । पूरे दिन लोगबाग 'पाव भर आटा और पाव भर भांटा' के लिए इधर-उधर तांकझांक, हाथ-पांव मार रहे हैं । किसी का जुगाड़तंत्र काम कर जा रहा है तो किसी की हुलिया बिगड़ जा रही है ।
दिन खामोश तो रात डरावनी--
दिन लगभग खामोश दिख रहा हैं और ऋतुओं के राजा वसन्त के चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में भय, घबराहट, बेचैनी, अनिष्ट की आशंका की काली चादर दसों दिशाओं में दिख रही है ।
श्मशान की भयावहता सिर्फ विक्रमादित्य जैसा ही झेल पा रहा है--
वैताल-पचीसी कथाओं में एक छद्म तांत्रिक के बुलावे पर राजा विक्रमादित्य श्मशान की भयावह खामोशी में बोलती लाश वैताल के साथ बिता सके थे । इसके अलावा सिर्फ अक्खड़-फक्खड़ देवता महादेव श्मशान में कुछ विशेष तिथियों में डेरा जमा पाते हैं जिनके आगे मौत के देवता क्रूर यमराज भी दण्डवत करते हैं । सामान्य आदमी तो यमराज नाम से ही डरता है । इन दिनों पृथ्वी लोक में विचर रहे यमराज से सब मुंह छिपाए हुए हैं ।
तोता-मैनाकी कहानी ताजा हो रहीं--
पंचतंत्र की कथाओं में ही नहीं बल्कि धर्मग्रन्थों में पशु-पक्षियों के संवाद के दृष्टांत मिलते हैं । भगवान राम ने पेड़-पौधों से बात ही नहीं कि बल्कि सीताहरण के संकट की घड़ी में मदद भी ली थी । गिध्दराज जटायु ने मदद भी की थी । देवी-देवताओं का वाहन पशु-पक्षियों को बनाने के पीछे दूरदर्शिता थी कि ये भी पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान करते हैं । काकभुशुंडि और गरुण के बीच संवाद को गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में यूं ही स्थान नहीं दिया ।
परिंदों और प्रकृति का रूप बदला बदला सा है।---
मनुष्य लाकडाउन के पिंजरे में कैद क्या हुआ कि प्रकृति के साथ जीने वाले परिंदों की आवाज में मिठास देखी जा रही है । हवाओं में खुशबू है । एयर क्वॉलिटी इंडेक्स संभवतः 50 सालों में अपने आदर्श रूप में है । यह शुभ संकेत भी है मानव के लिए । इसी की शुद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठानों में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि, अंतरिक्ष की शांति की कामना वेदमंत्रों में किए जाने का ऋषियों ने प्राविधान किया था ।
CBS और ICSC का निर्णय अव्यवहारिक: 1 अप्रैल से शुरू न हो इंटरनेट से पढ़ाई--
इस धुंध भरे माहौल में उक्त बोर्डो ने 1 अप्रैल से घर बैठे इंटरनेट (यानी वीडियो कांफ्रेंसिंग) से पढ़ाई का एलान किया है जो पूर्णतया अव्यवहारिक ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है। जिन बच्चों के पास लैपटॉप या एंड्रायड फोन नहीं है वे कैसे पढ़ाई कर सकेंगे, इस पर विचार नहीं किया गया । अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में उक्त बोर्डों के स्कूल चल रहे हैं तो इस पर विचार किया जाना चाहिए । शैक्षणिक सत्र भी जुलाई से पहले नही होना चाहिए ।
पीएम हस्तक्षेप करें ।-
तमाम अभिभावकों ने पीएम से करबद्ध विनती की है कि वे इस संबन्ध में शीघ्र उचित आदेश दें ।
-सलिलपांडेय, मिर्जापुर ।
-©कॉपीराइट ऐक्ट के तहत दूसरे के आलेख को नाम एडिट कर प्रयोग करना जुर्म है ।
PM से हस्तक्षेप की अभिभावकों की विनती---
छोटे-बड़े शहर सबकी कुंडली लाकडाउन ने एक-सी कर दी है । भगवान भास्कर के अस्ताचल के पहले से ही गांव हो या शहर सभी स्थानों पर 'मरघट-सा सन्नाटा' छा जा रहा है । पूरे दिन लोगबाग 'पाव भर आटा और पाव भर भांटा' के लिए इधर-उधर तांकझांक, हाथ-पांव मार रहे हैं । किसी का जुगाड़तंत्र काम कर जा रहा है तो किसी की हुलिया बिगड़ जा रही है ।
दिन खामोश तो रात डरावनी--
दिन लगभग खामोश दिख रहा हैं और ऋतुओं के राजा वसन्त के चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में भय, घबराहट, बेचैनी, अनिष्ट की आशंका की काली चादर दसों दिशाओं में दिख रही है ।
श्मशान की भयावहता सिर्फ विक्रमादित्य जैसा ही झेल पा रहा है--
वैताल-पचीसी कथाओं में एक छद्म तांत्रिक के बुलावे पर राजा विक्रमादित्य श्मशान की भयावह खामोशी में बोलती लाश वैताल के साथ बिता सके थे । इसके अलावा सिर्फ अक्खड़-फक्खड़ देवता महादेव श्मशान में कुछ विशेष तिथियों में डेरा जमा पाते हैं जिनके आगे मौत के देवता क्रूर यमराज भी दण्डवत करते हैं । सामान्य आदमी तो यमराज नाम से ही डरता है । इन दिनों पृथ्वी लोक में विचर रहे यमराज से सब मुंह छिपाए हुए हैं ।
तोता-मैनाकी कहानी ताजा हो रहीं--
पंचतंत्र की कथाओं में ही नहीं बल्कि धर्मग्रन्थों में पशु-पक्षियों के संवाद के दृष्टांत मिलते हैं । भगवान राम ने पेड़-पौधों से बात ही नहीं कि बल्कि सीताहरण के संकट की घड़ी में मदद भी ली थी । गिध्दराज जटायु ने मदद भी की थी । देवी-देवताओं का वाहन पशु-पक्षियों को बनाने के पीछे दूरदर्शिता थी कि ये भी पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान करते हैं । काकभुशुंडि और गरुण के बीच संवाद को गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में यूं ही स्थान नहीं दिया ।
परिंदों और प्रकृति का रूप बदला बदला सा है।---
मनुष्य लाकडाउन के पिंजरे में कैद क्या हुआ कि प्रकृति के साथ जीने वाले परिंदों की आवाज में मिठास देखी जा रही है । हवाओं में खुशबू है । एयर क्वॉलिटी इंडेक्स संभवतः 50 सालों में अपने आदर्श रूप में है । यह शुभ संकेत भी है मानव के लिए । इसी की शुद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठानों में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि, अंतरिक्ष की शांति की कामना वेदमंत्रों में किए जाने का ऋषियों ने प्राविधान किया था ।
CBS और ICSC का निर्णय अव्यवहारिक: 1 अप्रैल से शुरू न हो इंटरनेट से पढ़ाई--
इस धुंध भरे माहौल में उक्त बोर्डो ने 1 अप्रैल से घर बैठे इंटरनेट (यानी वीडियो कांफ्रेंसिंग) से पढ़ाई का एलान किया है जो पूर्णतया अव्यवहारिक ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है। जिन बच्चों के पास लैपटॉप या एंड्रायड फोन नहीं है वे कैसे पढ़ाई कर सकेंगे, इस पर विचार नहीं किया गया । अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में उक्त बोर्डों के स्कूल चल रहे हैं तो इस पर विचार किया जाना चाहिए । शैक्षणिक सत्र भी जुलाई से पहले नही होना चाहिए ।
पीएम हस्तक्षेप करें ।-
तमाम अभिभावकों ने पीएम से करबद्ध विनती की है कि वे इस संबन्ध में शीघ्र उचित आदेश दें ।
-सलिलपांडेय, मिर्जापुर ।
-©कॉपीराइट ऐक्ट के तहत दूसरे के आलेख को नाम एडिट कर प्रयोग करना जुर्म है ।


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