कोरोना: यमराज का आशियाना---
मिर्जापुर । एक वह कर्फ्यू, एक यह कर्फ्यू । एक गवर्नमेंट कर्फ्यू, एक पब्लिक कर्फ्यू । एक हिंसायुक्त कर्फ्यू एक भययुक्त कर्फ्यू । एक भगवान के लिए कर्फ्यू तो एक यमराज के लिए कर्फ्यू ।
यह न कोई काल्पनिक कहानी है और न कोई कविता की पृष्ठभूमि । यह न ही कोई बुझौव्वल है और न ही 'कौन बनेगा करोड़पति' का सवाल ! यह है हकीकत का पन्ना । बस दिमाग पर जोर देने की जरूरत है । जो वर्ष 1992 में होश सम्हाल चुके थे और वर्तमान की भी दुनियां देख रहे है ।
चलते हैं इतिहास बांचने ।---
6 दिसम्बर 1992 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की चिंगारी से लगभग पूरा देश जल रहा था । मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामकी जन्मभूमि को लेकर दो समुदायों में द्वंद्व मचा था। कुछ श्रीराम की जन्मभूमि कह रहे थे तो कुछ अपना इबादत स्थल बता रहे थे । इसी को लेकर इस जिले में भी कर्फ्यू तब लगा जब आपसी सद्भाव में कहीं दरार पड़ गई थी और तत्कालीन जिलाधिकारी श्री वीरेश कुमार अपना पलटन लेकर जब इमामबाड़े पहुंचे तब पत्थरों की बरसात हो रही थी । कर्फ्यू लगा । अफवाहों का बाजार गर्म होने लगा । 4 दिन नगर पुलिस के हवाले हो गया था ।
संचार व्यवस्था उन दिनों की---
उन दिनों संचार व्यवस्था की कमान सिर्फ अखबारों और आकाशवाणी के कंधों पर था । सूचना का प्रवाह धीमा था । लिहाजा सुबह से शाम तक उल्टी सीधी अफवाहों से जगह-जगह विवाद और उपद्रव होते रहे । पुलिस दोनों समुदायों को एक जगह से खदेड़ती तो दूसरी ओर उपद्रव शुरू हो जाता रहा । दोनों समुदाय अपने अपने ईष्ट के स्थल के लिए मन-मुटाव में थे ।
यमराज के खिलाफ जनता-कर्फ्यू---
कोरोना वायरस लेकर धरती- भ्रमण पर निकले यमराज के खिलाफ 22 मार्च को जो कर्फ्यू दिखा, उसे सच में यमराज ने देखा होगा तो उनका हृदय पसीजना चाहिए । 22 का मूलांक 4 हुआ । यानी चारों समुदाय हिंन्दू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई सभी के दरवाजे बंद, दुकानें बंद, गाड़ी-घोड़े बंद । नन्हे 6 माह के बच्चों से लेकर शतायु के करीब पहुंच रहे लोग 'भागो यमराज' की भावनाओं के साथ लामबंद दिखे।
इस बार का सूचनातंत्र---
सूचनाओं का तेज प्रवाह न्याय दिलाता है और एकजुट भी करता है । इसीलिए सत्ययुग, त्रेता, द्वापर में राक्षस राजा पर नहीं बल्कि ऋषि-आश्रमों पर हमला करते रहे ताकि इन आश्रमों का न्याय-व्यवस्था से सम्पर्क कट जाए । वर्तमान दौर में टीवी, सोशलमीडिया आदि ने कोरोना की भयावहता से इतना अवगत करा दिया कि कोई अनभिज्ञ नहीं रह गया कि कोरोना यमराज का आशियाना है । इसलिए पीएम श्री नरेन्द्र मोदी ने जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की तो सब सभी उनके साथ खड़े नजर आए ही नहीं बल्कि उन्हें अपना संरक्षक तक मान लिया ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट के अनुसार मूल लेखक का नाम बदलकर इस्तेमाल करना लेखन-चोरी है ।
मिर्जापुर । एक वह कर्फ्यू, एक यह कर्फ्यू । एक गवर्नमेंट कर्फ्यू, एक पब्लिक कर्फ्यू । एक हिंसायुक्त कर्फ्यू एक भययुक्त कर्फ्यू । एक भगवान के लिए कर्फ्यू तो एक यमराज के लिए कर्फ्यू ।
यह न कोई काल्पनिक कहानी है और न कोई कविता की पृष्ठभूमि । यह न ही कोई बुझौव्वल है और न ही 'कौन बनेगा करोड़पति' का सवाल ! यह है हकीकत का पन्ना । बस दिमाग पर जोर देने की जरूरत है । जो वर्ष 1992 में होश सम्हाल चुके थे और वर्तमान की भी दुनियां देख रहे है ।
चलते हैं इतिहास बांचने ।---
6 दिसम्बर 1992 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की चिंगारी से लगभग पूरा देश जल रहा था । मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामकी जन्मभूमि को लेकर दो समुदायों में द्वंद्व मचा था। कुछ श्रीराम की जन्मभूमि कह रहे थे तो कुछ अपना इबादत स्थल बता रहे थे । इसी को लेकर इस जिले में भी कर्फ्यू तब लगा जब आपसी सद्भाव में कहीं दरार पड़ गई थी और तत्कालीन जिलाधिकारी श्री वीरेश कुमार अपना पलटन लेकर जब इमामबाड़े पहुंचे तब पत्थरों की बरसात हो रही थी । कर्फ्यू लगा । अफवाहों का बाजार गर्म होने लगा । 4 दिन नगर पुलिस के हवाले हो गया था ।
संचार व्यवस्था उन दिनों की---
उन दिनों संचार व्यवस्था की कमान सिर्फ अखबारों और आकाशवाणी के कंधों पर था । सूचना का प्रवाह धीमा था । लिहाजा सुबह से शाम तक उल्टी सीधी अफवाहों से जगह-जगह विवाद और उपद्रव होते रहे । पुलिस दोनों समुदायों को एक जगह से खदेड़ती तो दूसरी ओर उपद्रव शुरू हो जाता रहा । दोनों समुदाय अपने अपने ईष्ट के स्थल के लिए मन-मुटाव में थे ।
यमराज के खिलाफ जनता-कर्फ्यू---
कोरोना वायरस लेकर धरती- भ्रमण पर निकले यमराज के खिलाफ 22 मार्च को जो कर्फ्यू दिखा, उसे सच में यमराज ने देखा होगा तो उनका हृदय पसीजना चाहिए । 22 का मूलांक 4 हुआ । यानी चारों समुदाय हिंन्दू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई सभी के दरवाजे बंद, दुकानें बंद, गाड़ी-घोड़े बंद । नन्हे 6 माह के बच्चों से लेकर शतायु के करीब पहुंच रहे लोग 'भागो यमराज' की भावनाओं के साथ लामबंद दिखे।
इस बार का सूचनातंत्र---
सूचनाओं का तेज प्रवाह न्याय दिलाता है और एकजुट भी करता है । इसीलिए सत्ययुग, त्रेता, द्वापर में राक्षस राजा पर नहीं बल्कि ऋषि-आश्रमों पर हमला करते रहे ताकि इन आश्रमों का न्याय-व्यवस्था से सम्पर्क कट जाए । वर्तमान दौर में टीवी, सोशलमीडिया आदि ने कोरोना की भयावहता से इतना अवगत करा दिया कि कोई अनभिज्ञ नहीं रह गया कि कोरोना यमराज का आशियाना है । इसलिए पीएम श्री नरेन्द्र मोदी ने जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की तो सब सभी उनके साथ खड़े नजर आए ही नहीं बल्कि उन्हें अपना संरक्षक तक मान लिया ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट के अनुसार मूल लेखक का नाम बदलकर इस्तेमाल करना लेखन-चोरी है ।


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