रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र में मौसम की बदमिजाजी से किसानों की उम्मीदों पर एक बार और तुषारापात हुआ है। धान क्रय केंद्रों पर बेचे गए धान की कीमत अभी तक ना मिलने के कारण पहले से ही परेशान किसानों को कुदरत का एक और प्रहार झेलना पड़ रहा है। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों के सपनों पर पानी फिर गया है। मन में ख्वाहिशें संजोए किसान अधमरा हो गया है।
आपको बता दें कि, महराजगंज क्षेत्र ही नहीं अपितु समूचे रायबरेली जनपद का किसान कुदरत का प्रहार झेल रहा है। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि से किसान की 60 से 70 फीसदी फसलें नष्ट हो चुकी है जिससे किसान की कमर टूट गई है। भगवान कहे जाने वाला किसान अधमरा हो गया है। तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई है। ऐसे में कुदरत की मार झेल रहे किसानों को प्रशासनिक व्यवस्था का शिकार भी होना पड़ रहा है। क्योंकि किसानों का कहना है कि, कुदरत की मार से हुए फसल के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? कहां से किसान अदा करेगा किसान क्रेडिट कार्ड से लिया गया लोन स्वरूप पैसा। कैसे संपन्न होगी बेटियों की शादी।
पूरे सुक्खा तिवारी मजरे सिकंदरपुर निवासी रामकिशोर पुत्र गंगादीन बताते हैं कि, उनके पास मात्र 1 बीघा 12 बिस्वा जमीन है जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। 27 अप्रैल 2020 को इनकी बेटी शिवकांति का विवाह होना तय हुआ है। कुदरत के कहर से इनकी सारी फसल चौपट हो गई है। जो एकमात्र सहारा थी। अब इस स्थिति में यह अपनी बेटी की शादी कैसे संपन्न कराएंगे। इन्होंने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि, बेटी की शादी के लिए इन्हें फसल के मुआवजे के रूप में धन मुहैया कराया जाए ताकि अप्रैल माह में बेटी शिवकान्ती की होने वाली शादी सकुशल संपन्न हो सके।
वहीं महाबल गंज मजरे सिकन्दरपुर गांव निवासी रामस्वरूप पुत्र श्री राम बताते हैं कि, इनके पास मात्र 1 बीघा 10 बिस्वा जमीन है। जो तेज बारिश और ओलों के गिरने से पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। अब इनके पास और कोई जरिया नहीं है इनकी भी बेटी कोमल की शादी 17 मई 2020 को होनी तय हुई है। ऐसे में इनके पास भी बेटी की शादी संपन्न कराने की जटिल समस्या है। अपनी बेटी की शादी कैसे कर पाएंगे। यह बताते हैं कि, बेटी की शादी तय करते समय इन्होंने अपने मन में जो सपने संजोए थे वह बिखरते हुए प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में सरकार इनकी मदद करें ताकि यह बेटी के हाथ पीले कर सके।
यही हाल महाबल गंज मजरे सिकन्दरपुर निवासी परमेश्वर पुत्र छेद्दू का है। इनके पास कुल 2 बीघा 10 बिस्वा जमीन है। जिस पर इन्होंने गेहूं और सरसों के फसल की बुवाई की थी। लेकिन कई दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश और ओलों ने इनके अरमानों पर पानी फेर दिया और इनकी फसल पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे यह अपनी बेटी सुमन की 26 अप्रैल 2020 को संपन्न होने वाली शादी, में असमर्थता प्रकट कर रहे है। इन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि, इनकी आर्थिक मदद की जाए, ताकि यह अपनी बेटी की शादी सकुशल संपन्न कर सकें।
हर जगह किसान पर मार
पहले क्रय केंद्रों पर बेचे गए धन का पैसा अभी तक किसानों के खाते में नहीं आया। फिर खाद के लिए धक्के और लाठियां खाई। फिर बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया और अब पकने के कगार पर खड़ी गेहूं और सरसों की फसल को बारिश व ओलावृष्टि ने बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। किसान चौतरफा मारा गया है। शारीरिक आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने वाला भी कोई नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा दावा किया गया था कि, मंडी में किसानों को परेशानी नहीं होगी लेकिन मौजूदा हालात देख अंदाजा लगा सकते हैं कि, किसानों को परेशानी ही नहीं बल्कि नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। अगर मौसम की बदमिजाजी इसी तरह रही तो किसानों की स्थिति और भी बिगड़ जाएगी।
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र में मौसम की बदमिजाजी से किसानों की उम्मीदों पर एक बार और तुषारापात हुआ है। धान क्रय केंद्रों पर बेचे गए धान की कीमत अभी तक ना मिलने के कारण पहले से ही परेशान किसानों को कुदरत का एक और प्रहार झेलना पड़ रहा है। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों के सपनों पर पानी फिर गया है। मन में ख्वाहिशें संजोए किसान अधमरा हो गया है।
आपको बता दें कि, महराजगंज क्षेत्र ही नहीं अपितु समूचे रायबरेली जनपद का किसान कुदरत का प्रहार झेल रहा है। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि से किसान की 60 से 70 फीसदी फसलें नष्ट हो चुकी है जिससे किसान की कमर टूट गई है। भगवान कहे जाने वाला किसान अधमरा हो गया है। तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई है। ऐसे में कुदरत की मार झेल रहे किसानों को प्रशासनिक व्यवस्था का शिकार भी होना पड़ रहा है। क्योंकि किसानों का कहना है कि, कुदरत की मार से हुए फसल के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? कहां से किसान अदा करेगा किसान क्रेडिट कार्ड से लिया गया लोन स्वरूप पैसा। कैसे संपन्न होगी बेटियों की शादी।
पूरे सुक्खा तिवारी मजरे सिकंदरपुर निवासी रामकिशोर पुत्र गंगादीन बताते हैं कि, उनके पास मात्र 1 बीघा 12 बिस्वा जमीन है जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। 27 अप्रैल 2020 को इनकी बेटी शिवकांति का विवाह होना तय हुआ है। कुदरत के कहर से इनकी सारी फसल चौपट हो गई है। जो एकमात्र सहारा थी। अब इस स्थिति में यह अपनी बेटी की शादी कैसे संपन्न कराएंगे। इन्होंने सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि, बेटी की शादी के लिए इन्हें फसल के मुआवजे के रूप में धन मुहैया कराया जाए ताकि अप्रैल माह में बेटी शिवकान्ती की होने वाली शादी सकुशल संपन्न हो सके।
वहीं महाबल गंज मजरे सिकन्दरपुर गांव निवासी रामस्वरूप पुत्र श्री राम बताते हैं कि, इनके पास मात्र 1 बीघा 10 बिस्वा जमीन है। जो तेज बारिश और ओलों के गिरने से पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। अब इनके पास और कोई जरिया नहीं है इनकी भी बेटी कोमल की शादी 17 मई 2020 को होनी तय हुई है। ऐसे में इनके पास भी बेटी की शादी संपन्न कराने की जटिल समस्या है। अपनी बेटी की शादी कैसे कर पाएंगे। यह बताते हैं कि, बेटी की शादी तय करते समय इन्होंने अपने मन में जो सपने संजोए थे वह बिखरते हुए प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में सरकार इनकी मदद करें ताकि यह बेटी के हाथ पीले कर सके।
यही हाल महाबल गंज मजरे सिकन्दरपुर निवासी परमेश्वर पुत्र छेद्दू का है। इनके पास कुल 2 बीघा 10 बिस्वा जमीन है। जिस पर इन्होंने गेहूं और सरसों के फसल की बुवाई की थी। लेकिन कई दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश और ओलों ने इनके अरमानों पर पानी फेर दिया और इनकी फसल पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे यह अपनी बेटी सुमन की 26 अप्रैल 2020 को संपन्न होने वाली शादी, में असमर्थता प्रकट कर रहे है। इन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि, इनकी आर्थिक मदद की जाए, ताकि यह अपनी बेटी की शादी सकुशल संपन्न कर सकें।
पहले क्रय केंद्रों पर बेचे गए धन का पैसा अभी तक किसानों के खाते में नहीं आया। फिर खाद के लिए धक्के और लाठियां खाई। फिर बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया और अब पकने के कगार पर खड़ी गेहूं और सरसों की फसल को बारिश व ओलावृष्टि ने बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। किसान चौतरफा मारा गया है। शारीरिक आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने वाला भी कोई नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा दावा किया गया था कि, मंडी में किसानों को परेशानी नहीं होगी लेकिन मौजूदा हालात देख अंदाजा लगा सकते हैं कि, किसानों को परेशानी ही नहीं बल्कि नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। अगर मौसम की बदमिजाजी इसी तरह रही तो किसानों की स्थिति और भी बिगड़ जाएगी।

0 टिप्पणियाँ