जांच का पहाड़ बन एवरेस्ट की तरह बढ़ता जा रहा--
मंडल में जांच केंद्र बने---
मिर्जापुर । लॉकडाउन से लकवाग्रस्त हुए जिले-जवाँर को वैशाखी पर्व पर बड़ा एतबार था कि वह सच में लंगड़ाते वक्त का वैसाखी बन कर आएगा और लॉकडाउन का मिज़ाज कुछ ठंडा होगा लेकिन इसको 3 मई तक एक्सटेंशन मिल जाने से फिर से लोग-बाग टेंशन में हो गए ।
दिन कैसे कटे ?--
किस पर क्या गुजर रही है, यह लोग अपना अपना दुखड़ा एक-दूजे को सुना रहे हैं । कोई फाकामस्ती की दास्तां सुनाने में लगा है तो कोई दिन भर घर में टीवी देखते देखते ऊबने की कहानी सुना रहा है । प्रशासनिक टीम व्यवस्था में चूर चूर हो रही है तो स्वास्थ्य विभाग का खुद ही स्वास्थ्य डांवाडोल हो रहा है । कब कहाँ से ख़बर आ जाए कि कोरोना चुपके से कहीं आकर छुपा हुआ है ।
जांच का पहाड़ एवरेस्ट हुआ जा रहा है ।--
जिले की जांच वाराणसी के BHU के लिए भेजी जा रही है जहां इसका पहाड़ बन गया है। 14 अप्रैल को PM कोरोना को पटखनी देने की अपील राष्ट्र के नाम कर रहे थे तो उस वक्त BHU का जांच विभाग 700 जांच के ढेर में दबा हुआ था। BHU में वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, आजमगढ़, बलिया, मऊ, भदोही, सोनभद्र के साथ मिर्जापुर से सैम्पल भेजे जा रहे हैं । लिहाजा रिपोर्ट आने में विलम्ब हो रहा हैं।
मिर्जापुर की पेंडिंग जांच---
कुछ दिन पूर्व गए 26 की जांच मंगलवार को आई तो जरूर, जो सभी निगेटिव थे लेकिन 33 जांच अभी भी पेंडिंग में है । जिसमें स्वास्थ्य विभाग के क्लास-1 अधिकारियों की भी जांच रिपोर्ट भी शामिल है जिसको कई दिन पूर्व भेजा गया था ।
मंडल मुख्यालय पर मशीन तत्काल लगे---
कोरोना की घेराबंदी के लिए पहली जरूरत व्यापक जांच की है । घर-घर जांच हो । इसके लिए टेस्ट मशीन की जरूरत है । एक तो मिर्जापुर मुख्यालय पर तो एक चुनार में नितांत आवश्यक है। इस मशीन के मूल्य को देखते हुए यह असंभव भी नहीं है । एक करोड़ रुपए में दोनों स्थानों पर मशीन लग जाने का आकलन किया जा रहा है ।
OPD की दिक्कत---
पूरे स्वास्थ्य विभाग के कोरोना के आगे-पीछे दौड़ने से सरकारी अस्पतालों एवं केंद्रों पर OPD इलाज में दिक्कतें आ रही हैं । इसके लिए प्राइवेट डॉक्टरों से बात कर जगह जगह धर्मशालाओं एवं होटलों में परामर्श केंद्र बनाया जा सकता है ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©कॉपीराइट ऐक्ट के नियम लागू ।
मंडल में जांच केंद्र बने---
मिर्जापुर । लॉकडाउन से लकवाग्रस्त हुए जिले-जवाँर को वैशाखी पर्व पर बड़ा एतबार था कि वह सच में लंगड़ाते वक्त का वैसाखी बन कर आएगा और लॉकडाउन का मिज़ाज कुछ ठंडा होगा लेकिन इसको 3 मई तक एक्सटेंशन मिल जाने से फिर से लोग-बाग टेंशन में हो गए ।
दिन कैसे कटे ?--
किस पर क्या गुजर रही है, यह लोग अपना अपना दुखड़ा एक-दूजे को सुना रहे हैं । कोई फाकामस्ती की दास्तां सुनाने में लगा है तो कोई दिन भर घर में टीवी देखते देखते ऊबने की कहानी सुना रहा है । प्रशासनिक टीम व्यवस्था में चूर चूर हो रही है तो स्वास्थ्य विभाग का खुद ही स्वास्थ्य डांवाडोल हो रहा है । कब कहाँ से ख़बर आ जाए कि कोरोना चुपके से कहीं आकर छुपा हुआ है ।
जांच का पहाड़ एवरेस्ट हुआ जा रहा है ।--
जिले की जांच वाराणसी के BHU के लिए भेजी जा रही है जहां इसका पहाड़ बन गया है। 14 अप्रैल को PM कोरोना को पटखनी देने की अपील राष्ट्र के नाम कर रहे थे तो उस वक्त BHU का जांच विभाग 700 जांच के ढेर में दबा हुआ था। BHU में वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, आजमगढ़, बलिया, मऊ, भदोही, सोनभद्र के साथ मिर्जापुर से सैम्पल भेजे जा रहे हैं । लिहाजा रिपोर्ट आने में विलम्ब हो रहा हैं।
मिर्जापुर की पेंडिंग जांच---
कुछ दिन पूर्व गए 26 की जांच मंगलवार को आई तो जरूर, जो सभी निगेटिव थे लेकिन 33 जांच अभी भी पेंडिंग में है । जिसमें स्वास्थ्य विभाग के क्लास-1 अधिकारियों की भी जांच रिपोर्ट भी शामिल है जिसको कई दिन पूर्व भेजा गया था ।
मंडल मुख्यालय पर मशीन तत्काल लगे---
कोरोना की घेराबंदी के लिए पहली जरूरत व्यापक जांच की है । घर-घर जांच हो । इसके लिए टेस्ट मशीन की जरूरत है । एक तो मिर्जापुर मुख्यालय पर तो एक चुनार में नितांत आवश्यक है। इस मशीन के मूल्य को देखते हुए यह असंभव भी नहीं है । एक करोड़ रुपए में दोनों स्थानों पर मशीन लग जाने का आकलन किया जा रहा है ।
OPD की दिक्कत---
पूरे स्वास्थ्य विभाग के कोरोना के आगे-पीछे दौड़ने से सरकारी अस्पतालों एवं केंद्रों पर OPD इलाज में दिक्कतें आ रही हैं । इसके लिए प्राइवेट डॉक्टरों से बात कर जगह जगह धर्मशालाओं एवं होटलों में परामर्श केंद्र बनाया जा सकता है ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©कॉपीराइट ऐक्ट के नियम लागू ।

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