शत्रु रूपी कोरोना के खिलाफ शंखनाद का प्रयोग लाभप्रद

◆स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् ।◆
◆नभश्च पृथिवीं चैव तुमलो व्यनुनादायन्◆ 
     श्रीमद्भगवतगीता, 1/19
◆अर्थ◆- और उन भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गूँजाते हुए धार्तराष्ट्रों अर्थात् आपके पक्ष वालों के हृदय विदीर्ण कर दिए ।
◆(प्रथम अध्याय में राजा को रिपोर्टिंग करते हुए संजय)◆
निहितार्थ- पर्यावरण को क्षति पहुँचाने से लेकर शरीर में धृतराष्ट्र की तरह जो विषाणु हैं, उनका शंख बजने से हृदय विदीर्ण (नष्ट) होता है । पृथ्वी से लेकर आकाश तक और हवाओं में तैरते कोरोना टाईप के विषाणु नष्ट होंगे । मनुष्य को प्राकृतिक शुध्दता का वातावरण मिलेगा और अंतर्जगत का ◆इम्यून सिस्टम◆ मजबूत होगा । यथा संभव इस प्रयोग को अपनाया जाना चाहिए जीवन के शत्रु रूप रूपी ◆कोरोना◆ के खिलाफ ।
◆सलिल पांडेय, मिर्जापुर◆©

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