"आओ चले गाँव की ओर" कमल बाजपेयी

खुली आँख जब सुबह भोर में,
देखा खेतों में है शोर ।
खड़ा सुनहरा गेहूँ काटें, 
ग्राम देवता चारों ओर ।
◆तन तांबे सा तपा हुआ था,
 मन फौलादी कर्म कठोर ।
लक्ष्य एक था सभी गाँव का,
अन्न खेत से लेव बटोर ।
◆बूढ़ा पीपल नए वस्त्र में,
झूम रहा है अति उल्लास ।
होगा आज अतिथि से मिलना,
मन में संजो रखी है आस ।
◆आम लदा है अपने फल से,
डालें झुक कर करे प्रणाम ।
मेरा जीवन परमारथ में,
आम - खास सबके हैं आम ।
◆आबो हवा बहुत सुंदर सी,
भीनी खुश्बू है चहुँओर ।
कोयल गाती डाली - डाली,
पपिहा पिउ - पिउ नाचे मोर ।
◆महुआ अमृत टपक रहा है,
बांसों में तरुणाई ।
बिरही का दुख सहन ना होता,
नीम गयी बौराई ।
◆भरे जलाशय कमल दलों से,
लगे स्वर्ग सी बस्ती । 
जननी जन्मभूमिश्च,
स्वर्गादपि गरीयसी ।
◆अबकी बार नया अनुभव था,
नहीं अर्थ की मारा - मारी ।
विष्णु रूप में ग्राम देवता, 
सबका पेट भरन की बारी ।
◆Written by - कमल बाजपेई

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