भारत का संविधान कभी गलत नहीं हो सकता वशर्तें लागू करने वाले का भाव गलत न हो

भारत के उत्थान के प्रणेता अंबेडकर की जयंती लॉकडाउन से सादगी के बीच मनाई गई
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न आर्यावर्त और न हिंदुस्तान नाम रहेगा भारतवर्ष
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मिर्जापुर । बौद्ध धर्म की सादगी से प्रभावित तथा भारत के उत्थान के प्रतीक डॉ भीमराव अम्बेडकर की 119वीं जयंती इस वर्ष लॉकडाउन के बीच सच में सादगी से मनाई गई । न शोर-शराबा, न भारी भरकम मंच-जलसा और न फूलों से महिमामण्डित मेहमान और मेजबान दिखे । जिसके मन-मस्तिष्क में अंबेडकर के विचारों की खुशबू थी, उसने कोरोना के चलते कड़े प्रतिबन्धों के कारण निहायत सादगी से मनाई ।
वक्त-वक्त की बात
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बड़े-छोटे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग से मर्माहत होकर बौद्ध धर्म अंगीकार करने वाले महापुरुष की जयंती भले वैश्विक महामारी की देन शारीरिक- डिस्टेंसिंग के बीच हुई लेकिन वैचारिक रूप से हर आम और खास उनकी जयंती पर एक मत थे कि डॉ आंबेडकर की दृष्टि राष्ट्रवादी थी । सभी को इसी भाव से श्रद्धाजंलि व्यक्त करते देखा गया ।
न बाएं चलो और न दाएं चलो
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बाएं और दाएं चलो के नियमों को लागू करने वाले परिवहन विभाग ने RTO कार्यालय में जब डॉक्टर अंबेडकर की जयंती मनाई तो वहां अंबेडकर के मध्यमार्गी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया । वे पंथ और धर्म में बांट गए अंग्रेजों की नीति को भारतीय समाज के लिए घातक मान रहे थे । RTO (प्रशासन) डॉ आर के विश्वकर्मा ने अपने सन्देश में कहा कि वे पूरे भारतीय समाज के मसीहा थे । वे वंचितों को आगे लाने के हिमायती थे जबकि RTO (प्रवर्तन) श्री ओपी सिंह ने अपने विचारों में उनके महिलाओं तथा बच्चों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया । इस अवसर पर ARTO श्री रविकांत शुक्ल ने कहा कि देश के विकास का पहिया तेज दौड़े इसके लिए  उन्होंने प्रखर अर्थशास्त्री के रुप में चिंतन-मनन किया । यूरोपियन चालबाजी को ध्वस्त करने के लिए ही उन्होंने RBI की स्थापना की ।
संविधान लचीला भी तो कठोर भी
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साहित्यिक संस्था डॉ भवदेव पांडेय शोध संस्थान में कहा गया कि संविधान प्रारूप समिति के अनेक सदस्य किन्हीं न किन्हीं कारणों से जब समिति से अलग हो गए तो तत्कालीन नेताओं ने यह गुरुतर दायित्व उन्हें सौंपा । 26 नवम्बर को इसे पूरा करते हुए डॉ आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि यह ऐसा संविधान है जो लचीला और जरूरत पड़ने पर कठोर भी है । यह युद्ध और शांति दोनों समय काम आएगा । यदि कभी कुछ गलत हुआ तो दोष संविधान का नहीं बल्कि उपयोग करने वालों पर दोष जाएगा कि वे विशिष्ट नहीं बल्कि अधम थे ।
भाजपा नेता ने परिजनों को अम्बेडक की विशेषताएं बताई
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   इस प्रकार विपरीत माहौल में भी डॉ आंबेडकर की जयंती लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के बीच मनाई । भाजपा के पूर्व अध्यक्ष श्री बालेंदु मणि त्रिपाठी ने पिछड़े इलाके लालगंज में अपने परिवार के लोगों के बीच जयंती मनाकर भावी पीढ़ी को उनकी महानता से अवगत कराया ।
न आर्यावर्त और न हिंदुस्तान नाम होगा भारत वर्ष
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अध्यात्म और साहित्य जगत के कहा कि आजादी के बाद जब एक वर्ग ने इसका नाम आर्यावर्त और एक वर्ग ने हिंदुस्तान किए जाने की मांग की तो डॉ आंबेडकर ने उसे सिरे से खारिज कर इसके भारतवर्ष नाम पर मुहर लगाई ।
                 सलिल पांडेय, मिर्जापुर
     ©कॉपीराइट ऐक्ट के नियम लागू ।

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