महर्षि परशुराम के अवतरण की कथाओं में पूरी तरह प्रकृति-विज्ञान एवं आधुनिक-विज्ञान का भाव छुपा हुआ है । परशुराम भृगुवंशी हैं । भृगु के पुत्र ऋचीक हुए जिससे इंद्र के अवतार गाधि की बेटी सत्यवती हुई । ऋचीक का विवाह सत्यवती से हुआ । ऋचीक ने एक बार खीर पत्नी और सास के लिए प्रदान किया लेकिन इसे ग्रहण करने में उलटफेर हो गया । सत्यवती ने अपनी माँ की खीर खा ली । ऋचीक असमंजस में पड़ गए । सत्यवती ने अनुनय विनय किया कि पुत्र के रूप में क्रोधी न होकर पौत्र के रूप में क्रोधी बालक जन्म ले । इस प्रार्थना से सत्यवती को पुत्र के रूप में जमदग्नि हुए और जमदग्नि के पुत्र परशुराम हुए ।
माता का गर्दन काट दिया था- चित्ररथ राजा के विलासी स्वरूप से जमदग्नि की पत्नी रेणुका विचलित हो गयी तो जमदग्नि ने परशुराम से अपनी माता रेणुका के बध करने के लिए कहा । परशुराम के अन्य चार भाई तो हत्या करने से मुकर गए लेकिन परशुराम ने माता रेणुका का बध कर दिया ।
रेणुका का अर्थ -इस कथा के गूढार्थ पर जरूर चिंतन की जरूरत है क्योंकि रेणुका का अर्थ पृथ्वी है तो रेतकण भी है । परशुराम हाथ में परसु (फरसा) लिए रहते है । कृषि की दृष्टि से फरसा कृषक का यंत्र है । इसी से वह फसल काटता है और कृषि-भूमि को उपजाऊ बनाता है । धरती पर फरसा चलाकर कृषक वैशाख में रबी की फसलों को काटता है और अगली फसल के लिए गोड़ाईभी करता है।परशुराम के साथ राजा सहस्रार्जुन से युद्ध की कथा भी महाभारत ग्रन्थ में उल्लिखित है । सहस्रार्जुन राजा होकर अपने दायित्व से च्युत हो जाता है । ज्ञान के भंडार जमदग्नि की हत्या तथा उनके आश्रम के पेड़ पर्यावरण संरक्षण पद्धति को नष्ट करता है । पेड़-पौधों को उजाड़ देने पर परशुराम ने बदला लिया ।
राजा प्रजा को सुख दे-महाभारत के शांति पर्व में भीष्म ने युधिष्ठिर से कहा भी है कि लोकहित में ऋषि अपने ज्ञान एवं तपोबल तथा राजा अपने बाहुबल से प्रजा को सुख, शांति तथा उल्लास प्रदान करे । चाणक्य भी इसी तरह की व्यवस्था के हिमायती थे । इसमें जो भी अपने दायित्व से विचलित होता है, वह दंड का भागीदार होता है । कृषि क्षेत्र में फांवड़े से खेती करते किसान भूमि पर ही प्रहार नहीं बल्कि वह कृषि-भूमि की उर्वराशक्ति को नष्ट करने वाले जीवों को मारता भी है ।
सहस्रार्जुन कृषि का प्रदूषण-तत्व- सहस्रार्जुन को कृषि का प्रदूषण-पदार्थ माना जाए तो ज्यादा उपयोगी होगा क्योंकि जिस धरती से अनाज के रूप में प्राणशक्ति पैदा हो रही है, उसके संरक्षण की प्लानिंग और कार्रवाई दोनों आवश्यक है । इसी प्रकार आधुनिक कम्प्यूटर साइंस के रूप में लिया जाए तो कम्प्यूटर के मुख्य संयंत्र 'मदरबोर्ड' में यदि वायरस याए जाता है तो उसे कम्प्यूटर इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान से वायरसमुक्त करता है । माता रेणुका की हत्या और पुनजीवित होने की इस कथा में ऐसी टेक्नोलाजी दिखाई देती है । इसके अलावा परशुराम का प्रसंग भगवान राम के धनुषभंग के समय भी आता है । जब ऋषि ने देखा कि भगवानराम की सुरक्षित टेक्नोलॉजी से धनुषभंग कराने के लिए जनक ने स्वयम्बर यज्ञ किया है और श्रीराम शांतिदूत की हैसियत से परमाणु बम से भी ज्यादा घातक शिव का धनुष तोड़कर शस्त्रों की होड़ खत्म करने का संदेश दिया है तब परशुराम ने पालनकर्त्ता विष्णु का धनुष श्रीराम को भेंट किया ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©कॉपीराइट ऐक्ट के तहत लेख में हेराफेरी दण्डनीय है।
माता का गर्दन काट दिया था- चित्ररथ राजा के विलासी स्वरूप से जमदग्नि की पत्नी रेणुका विचलित हो गयी तो जमदग्नि ने परशुराम से अपनी माता रेणुका के बध करने के लिए कहा । परशुराम के अन्य चार भाई तो हत्या करने से मुकर गए लेकिन परशुराम ने माता रेणुका का बध कर दिया ।
रेणुका का अर्थ -इस कथा के गूढार्थ पर जरूर चिंतन की जरूरत है क्योंकि रेणुका का अर्थ पृथ्वी है तो रेतकण भी है । परशुराम हाथ में परसु (फरसा) लिए रहते है । कृषि की दृष्टि से फरसा कृषक का यंत्र है । इसी से वह फसल काटता है और कृषि-भूमि को उपजाऊ बनाता है । धरती पर फरसा चलाकर कृषक वैशाख में रबी की फसलों को काटता है और अगली फसल के लिए गोड़ाईभी करता है।परशुराम के साथ राजा सहस्रार्जुन से युद्ध की कथा भी महाभारत ग्रन्थ में उल्लिखित है । सहस्रार्जुन राजा होकर अपने दायित्व से च्युत हो जाता है । ज्ञान के भंडार जमदग्नि की हत्या तथा उनके आश्रम के पेड़ पर्यावरण संरक्षण पद्धति को नष्ट करता है । पेड़-पौधों को उजाड़ देने पर परशुराम ने बदला लिया ।
राजा प्रजा को सुख दे-महाभारत के शांति पर्व में भीष्म ने युधिष्ठिर से कहा भी है कि लोकहित में ऋषि अपने ज्ञान एवं तपोबल तथा राजा अपने बाहुबल से प्रजा को सुख, शांति तथा उल्लास प्रदान करे । चाणक्य भी इसी तरह की व्यवस्था के हिमायती थे । इसमें जो भी अपने दायित्व से विचलित होता है, वह दंड का भागीदार होता है । कृषि क्षेत्र में फांवड़े से खेती करते किसान भूमि पर ही प्रहार नहीं बल्कि वह कृषि-भूमि की उर्वराशक्ति को नष्ट करने वाले जीवों को मारता भी है ।
सहस्रार्जुन कृषि का प्रदूषण-तत्व- सहस्रार्जुन को कृषि का प्रदूषण-पदार्थ माना जाए तो ज्यादा उपयोगी होगा क्योंकि जिस धरती से अनाज के रूप में प्राणशक्ति पैदा हो रही है, उसके संरक्षण की प्लानिंग और कार्रवाई दोनों आवश्यक है । इसी प्रकार आधुनिक कम्प्यूटर साइंस के रूप में लिया जाए तो कम्प्यूटर के मुख्य संयंत्र 'मदरबोर्ड' में यदि वायरस याए जाता है तो उसे कम्प्यूटर इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान से वायरसमुक्त करता है । माता रेणुका की हत्या और पुनजीवित होने की इस कथा में ऐसी टेक्नोलाजी दिखाई देती है । इसके अलावा परशुराम का प्रसंग भगवान राम के धनुषभंग के समय भी आता है । जब ऋषि ने देखा कि भगवानराम की सुरक्षित टेक्नोलॉजी से धनुषभंग कराने के लिए जनक ने स्वयम्बर यज्ञ किया है और श्रीराम शांतिदूत की हैसियत से परमाणु बम से भी ज्यादा घातक शिव का धनुष तोड़कर शस्त्रों की होड़ खत्म करने का संदेश दिया है तब परशुराम ने पालनकर्त्ता विष्णु का धनुष श्रीराम को भेंट किया ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©कॉपीराइट ऐक्ट के तहत लेख में हेराफेरी दण्डनीय है।


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