रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: डंडे चटकाने और दूसरों पर रौबगालिब करने के लिए जानी जाने वाली पुलिस का भूखों को राशन बांटने वालों की भूमिका में देख आम लोगों को आश्चर्य तो हुआ, लेकिन कस्बे में रहने वाले झांसी के लगभग एक दर्जन लोगों की आंखों में आंसू छलक आए, जब महराजगंज कोतवाल ने उनकी पीड़ा सुनकर सभी एक दर्जन लोगों को पंद्रह पंद्रह किलों राशन पानी मुहैय्या कराया।
आपको बता दें कि, महराजगंज कस्बे में झांसी जिले से आए लगभग एक दर्जन लोग जोकि, हथठेलियों पर पानी के बताशे बेचने का काम करते थे। यही उनकी रोजी रोटी का जरिया था। किंतु संपूर्ण लाक डाउन लागू होने के बाद यह लोग अपने घरों को वापस नहीं जा सके और जहां किराए पर रहते थे वहीं क़ैद होकर रह गए।
जब तक जमापूंजी हाथ में थी राशन आदि लेकर इन्होंने अपना और अपने परिवार का पेट भरा। लेकिन पूजी खत्म होने के बाद यह कंगाल हो गए। बाहर का होने के नाते ना तो इनके पास राशन कार्ड है और ना ही इनकी कोई मदद करने वाला है। लगभग दो-तीन दिनों से इन लोगों के घर चूल्हा नहीं जला, तो यह भागकर कोतवाली पुलिस से जाकर मिले कोतवाल ने पूरी बातें सुनी, उनका हृदय द्रवित हो गया। आनन फानन उन्होंने व्यवस्था करा कर सभी एक दर्जन लोगों को पांच 5 किलो चावल दस-दस किलो आटा कड़वा तेल, नमक, मसाले की पुड़िया, चाय की पत्ती व शकर का इंतजाम कराकर इन लोगों को अपने हाथों प्रदान किया।
थाने में मौजूद दर्जनभर लोगों को एक पल विश्वास ही नहीं हुआ कि, जिस पुलिस के पास वह डर-डर कर पहुंचे थे और उन्होंने सोचा था कि, पुलिस उनके झांसी वापस लौटने का इंतजाम करवा देगी, उसी पुलिस ने यहीं रुक कर लॉक डाउन खत्म होने का इंतजार करने की सलाह देकर उनके खाने पीने के लिए भरपूर राशन मुहैया करा दिया है।
कोतवाल की इस सदसहयता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। लोगों का कहना है कि, खाकी वर्दी के पीछे भी इंसान का ही तो दिल है।
महराजगंज/रायबरेली: डंडे चटकाने और दूसरों पर रौबगालिब करने के लिए जानी जाने वाली पुलिस का भूखों को राशन बांटने वालों की भूमिका में देख आम लोगों को आश्चर्य तो हुआ, लेकिन कस्बे में रहने वाले झांसी के लगभग एक दर्जन लोगों की आंखों में आंसू छलक आए, जब महराजगंज कोतवाल ने उनकी पीड़ा सुनकर सभी एक दर्जन लोगों को पंद्रह पंद्रह किलों राशन पानी मुहैय्या कराया।
आपको बता दें कि, महराजगंज कस्बे में झांसी जिले से आए लगभग एक दर्जन लोग जोकि, हथठेलियों पर पानी के बताशे बेचने का काम करते थे। यही उनकी रोजी रोटी का जरिया था। किंतु संपूर्ण लाक डाउन लागू होने के बाद यह लोग अपने घरों को वापस नहीं जा सके और जहां किराए पर रहते थे वहीं क़ैद होकर रह गए।
जब तक जमापूंजी हाथ में थी राशन आदि लेकर इन्होंने अपना और अपने परिवार का पेट भरा। लेकिन पूजी खत्म होने के बाद यह कंगाल हो गए। बाहर का होने के नाते ना तो इनके पास राशन कार्ड है और ना ही इनकी कोई मदद करने वाला है। लगभग दो-तीन दिनों से इन लोगों के घर चूल्हा नहीं जला, तो यह भागकर कोतवाली पुलिस से जाकर मिले कोतवाल ने पूरी बातें सुनी, उनका हृदय द्रवित हो गया। आनन फानन उन्होंने व्यवस्था करा कर सभी एक दर्जन लोगों को पांच 5 किलो चावल दस-दस किलो आटा कड़वा तेल, नमक, मसाले की पुड़िया, चाय की पत्ती व शकर का इंतजाम कराकर इन लोगों को अपने हाथों प्रदान किया।
थाने में मौजूद दर्जनभर लोगों को एक पल विश्वास ही नहीं हुआ कि, जिस पुलिस के पास वह डर-डर कर पहुंचे थे और उन्होंने सोचा था कि, पुलिस उनके झांसी वापस लौटने का इंतजाम करवा देगी, उसी पुलिस ने यहीं रुक कर लॉक डाउन खत्म होने का इंतजार करने की सलाह देकर उनके खाने पीने के लिए भरपूर राशन मुहैया करा दिया है।
कोतवाल की इस सदसहयता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। लोगों का कहना है कि, खाकी वर्दी के पीछे भी इंसान का ही तो दिल है।





0 टिप्पणियाँ