सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों को राहत पहुंचाने में हुई फेल-सुशील पासी।। Raebareli news ।।

कांग्रेस के प्रदेश सचिव ने सोनिया गांधी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बताएं जमीनी हकीकत
कांग्रेस अगर सांझी रसोईयां कार्यक्रम के तहत राशन किट ना बांटती तो फैल जाती भुखमरी की समस्या
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने आरोप लगाया है कि, कोरोना महामारी के दौरान भारत सरकार व प्रदेश सरकार के द्वारा चलाई जा रही सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है। संकट के दौरान यदि सरकार चाहती तो कांग्रेस सरकार के दौरान बनाए गए नियमों का उपयोग करके इस अव्यवस्था से निजात पा सकती थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा संचालित सांझी रसोईयां कार्यक्रम को काफी कारगर सिद्ध होना बताते हुए कहा कि, रायबरेली जिले में विशेष तौर से सोनिया गांधी द्वारा भेजी गई राशन कीटों के वितरण से गरीबों को बहुत लाभ मिला है।
     श्री पासी ने महात्मा गांधी सुनिश्चित रोजगार गारंटी योजना पर भी सरकारों के ठीक ढंग से काम ना करने का आरोप लगाया है, और कहा है कि, केंद्र और प्रदेश सरकार मजदूरों को कानून द्वारा प्रदत्त लाभ देने में विफल रही है। यह उद्गार श्री पासी ने सोनिया गांधी के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में उठाए गए सुझाव और सलाह व्यक्त करने के बाद पत्रकारों को दी गई जानकारी में कही है।
    आपको बता दें कि, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सुशील पासी की सोनिया गांधी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान 29 अप्रैल 2020 को व्यापक चर्चा हुई थी। जिसमें सुशील पासी ने सोनिया गांधी का ध्यान सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा गरीबों को दिए जा रहे राशन की ओर केंद्रित किया था।
      उन्होंने बताया कि, कोटेदार राशन के नाम पर महज गेहूं और चावल का ही वितरण कर रहे हैं। इसके अलावा भोजन बनाने के लिए नमक, तेल, मसाला आदि का भी प्रयोग होता है। केवल गेहूं और चावल दे देने से खिचड़ी तक भी नहीं बन सकती है। जबकि कांग्रेस की सांझी रसोईयां कार्यक्रम के तहत रायबरेली जिले में हजारों की तादात में पात्र लोगों को जो रासन किट मुहैया कराई गई है, उसमें पर्याप्त मात्रा में आटा, चावल, दाल, नमक, चीनी, चाय की पत्ती, कड़वा तेल मसाले आदि शामिल है।
     श्री पासी ने कहा कि, केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार राशन वितरण का ड्रामा करके वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। जबकि, हकीकत में यह गरीब जनता के हकों पर खुली डकैती है। उन्होंने कहा कि, 5 जुलाई 2013 को मनमोहन सरकार ने जो कानून बनाया था। उसके तहत हर ग्रामीण गरीब परिवार को 35 किलो राशन हर कीमत पर उपलब्ध कराया जाना था, जिसका पालन नहीं कराया जा रहा है।
     उन्होंने आगे कहा कि, इसी प्रकार महात्मा गांधी सुनिश्चित रोजगार गारंटी योजना के तहत पारित एक्टर में हर पात्र परिवार को कम से कम 100 दिन मजदूरी कराए जाना और उसका भुगतान किया जाना सुनिश्चित किया गया था, लेकिन हकीकत में मनरेगा का कार्य ठप्प पड़ा है। जबकि एक्ट में प्रावधान है कि, अगर मजदूरों को काम नहीं भी दिया जाता है, तो उनको 100 दिन की मजदूरी का भुगतान अवश्य किया जाएगा।
     इसके अलावा प्रदेश सरकार चाहती तो गांव में ही कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई गई मिड डे मील योजना के तहत उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीणों को गांव में ही ग्राम जनता किचन चलाकर पात्र लोगों को निशुल्क भोजन मुहैया कराया जा सकता था, लेकिन केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने इस और रुचि ही नहीं ली। 
     श्री पासी ने सारे मुद्दों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा प्रमुखता से सोनिया गांधी के समक्ष रखा, जिस पर सोनिया गांधी ने कहा कि, वे अपने स्तर से केंद्र और राज्य सरकारों के संज्ञान में लाकर यह व्यवस्था लागू करना सुनिश्चित कराएगीं।
     श्री पासी ने यह भी बताया कि, वीडियो कांफ्रेंसिंग में उनके द्वारा दिए गए सुझाव का सोनिया गांधी ने सकारात्मक उत्तर देते हुए कहा कि, वह शीघ्र ही इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगी, साथ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग में मौजूद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने उनके उठाए गए सवालों पर सहमति जताई है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ