◆घर बैठे - बैठे सुनो, जान गई अकुलाय ।
बाहर सड़को पर मनुज नाही परत देखाय ।।
◆नाही परत देखाय डरे खग - पशू उदासी ।
वृक्ष खड़े है सन्न, हवा लगे बासी - बासी ।।
◆बड़े बूढ़े चिल्लाये, सुनो बच्चा तुम लाला ।
हाथ धुलो तुम जाए, छुयो है कुंडी - ताला ।।
........................................................
◆हर घर में है चल रही, प्यारी सी तकरार ।
ज्यादा बर्तन में हुई, आवाज़ें दो चार ।।
◆आवाज़ें दो चार, निवाले रूखे सादा नीर ।
आपस में हम सब दुखी, देख विश्व की पीर ।।
◆जनकार्यो में जो लगे , पुलिस, सफाई, अर्थ ।
मान और सम्मान उन्हें दे, जो हो आज समर्थ ।।
🖋️-written by कमल बाजपेई
बाहर सड़को पर मनुज नाही परत देखाय ।।
◆नाही परत देखाय डरे खग - पशू उदासी ।
वृक्ष खड़े है सन्न, हवा लगे बासी - बासी ।।
◆बड़े बूढ़े चिल्लाये, सुनो बच्चा तुम लाला ।
हाथ धुलो तुम जाए, छुयो है कुंडी - ताला ।।
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◆हर घर में है चल रही, प्यारी सी तकरार ।
ज्यादा बर्तन में हुई, आवाज़ें दो चार ।।
◆आवाज़ें दो चार, निवाले रूखे सादा नीर ।
आपस में हम सब दुखी, देख विश्व की पीर ।।
◆जनकार्यो में जो लगे , पुलिस, सफाई, अर्थ ।
मान और सम्मान उन्हें दे, जो हो आज समर्थ ।।
🖋️-written by कमल बाजपेई

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