¶ बाल , युवा , प्रौढ़ , बूढापन,
जीव अवस्था होती चार ।
सुखी बाल , संघर्ष युवा को ,
प्रौढ़ विचारक , वृद्ध लाचार ।
¶ बूढ़ों को तुम भार ना समझो ,
रखो उनको सभी संभाल ।
राय प्रौढ़ की रखना मन में,
चलो उसी के कहे नुसार ।
¶ त्याग , तपस्या , प्रेम - नेम से,
बनता घर मंदिर संसार ।
जीवन का ये मूल मंत्र है,
सादा जीवन उच्च विचार ।
¶ कर्म करो तुम बिना रुके ही,
लक्ष्य पहुच कर ही आराम ।
जीवन जब तक कर्म प्रबल है,
कभी नही है पूर्ण विराम ।
¶ सतगुण , रजगुण धरो शीश पर,
यश फैले चहुंदिश चिरकाल ।
मर्यादा में रहकर प्रियवर,
कर्म करो तुम सोच विचार ।
¶ कर्मयोग और सांख्य योग ही ,
भगवत प्राप्ति के आधार ।
गीता में कह गए त्रिलोकी,
समझो इसको बारम्बार ।
¶ चीटी से सीखो श्रम करना,
और गाय से माँ का प्यार ।
तेजी चीता गर्व शेर से,
मीठा कोयल, अटल पहाड़ ।
¶ परमार्थ तुम नदी पेड़ से,
कुटिल लोमड़ी , विदित संसार ।
कागचेष्टा , बकोध्यान से ,
वफा स्वान से सीखो यार ।
¶ सेनाओं से देशप्रेम तुम,
शिक्षक करता मृदु व्यवहार ।
चिंतक बोले देशकाल पर,
यह उसके अपने उदगार ।
¶ Written by - कमल बाजपेई
जीव अवस्था होती चार ।
सुखी बाल , संघर्ष युवा को ,
प्रौढ़ विचारक , वृद्ध लाचार ।
¶ बूढ़ों को तुम भार ना समझो ,
रखो उनको सभी संभाल ।
राय प्रौढ़ की रखना मन में,
चलो उसी के कहे नुसार ।
¶ त्याग , तपस्या , प्रेम - नेम से,
बनता घर मंदिर संसार ।
जीवन का ये मूल मंत्र है,
सादा जीवन उच्च विचार ।
¶ कर्म करो तुम बिना रुके ही,
लक्ष्य पहुच कर ही आराम ।
जीवन जब तक कर्म प्रबल है,
कभी नही है पूर्ण विराम ।
¶ सतगुण , रजगुण धरो शीश पर,
यश फैले चहुंदिश चिरकाल ।
मर्यादा में रहकर प्रियवर,
कर्म करो तुम सोच विचार ।
¶ कर्मयोग और सांख्य योग ही ,
भगवत प्राप्ति के आधार ।
गीता में कह गए त्रिलोकी,
समझो इसको बारम्बार ।
¶ चीटी से सीखो श्रम करना,
और गाय से माँ का प्यार ।
तेजी चीता गर्व शेर से,
मीठा कोयल, अटल पहाड़ ।
¶ परमार्थ तुम नदी पेड़ से,
कुटिल लोमड़ी , विदित संसार ।
कागचेष्टा , बकोध्यान से ,
वफा स्वान से सीखो यार ।
¶ सेनाओं से देशप्रेम तुम,
शिक्षक करता मृदु व्यवहार ।
चिंतक बोले देशकाल पर,
यह उसके अपने उदगार ।
¶ Written by - कमल बाजपेई

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