प्रशांत शर्मा
डलमऊ/रायबरेली: जहां कोरोना से लड़ने के लिए डॉक्टर, नर्स मरीजों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं और लॉक डाउन का पालन कराने के लिए पुलिस प्रशासन व तहसील प्रशासन पूरी मुस्तैदी लगे हुए हैं तो वहीं कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे लोगों के लिए साहित्यकारों ने भी अपनी लेखनीय से उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
आपको बता दें कि, कृष्ण नगर की एक महिला अर्चना सैनी ने कोरोना पर अपनी लेखनीय से बेहतरीन कविता लिखा है। इस कविता में महिला ने देश में कोरोना वीर योद्धाओं की अपनी लेखनीय से प्रशंशा कर रहीं है।
◆हम घर में अपने रहें सुरक्षित
वे चौराहों पर खड़े रहे,,
कभी प्यार से कभी डांट के
कभी अनेकों रूप बदल के
सड़कों पर भी पहरा देते
ताकि हम सब बने रहें।।
◆फिर भी कुछ की गद्दारी देखो
रक्षक के कर काट रहे,
मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे।
◆समझदार पहनाते माला
मूर्खों ने पथराव किया,
फिर भी कुछ देश द्रोहियों ने
थूका अभद्र व्यवहार किया।
◆रक्षक बनकर डॉक्टर नर्से
कर्तव्य मार्ग पर अड़े रहे,
जाति पाति का भेद मिटा
हर पीड़ित के संग खड़े रहे।
◆मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे,
यह युद्ध नहीं महाभारत का
जिसमें तलवार उठानी है
यह युद्ध एक महामारी का
जिसमें हम सब सेनानी हैं।
◆लॉक डाउन का पालन कर
सहयोग अपना दे सकते हैं,
इस भारत माँ के ऋण से
थोड़ा तो उरिण हो सकते हैं।
◆अर्चना विनय कर जोड़ करें
कर्तव्य में हम सब अड़े रहे,
मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे।
डलमऊ/रायबरेली: जहां कोरोना से लड़ने के लिए डॉक्टर, नर्स मरीजों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं और लॉक डाउन का पालन कराने के लिए पुलिस प्रशासन व तहसील प्रशासन पूरी मुस्तैदी लगे हुए हैं तो वहीं कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे लोगों के लिए साहित्यकारों ने भी अपनी लेखनीय से उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
आपको बता दें कि, कृष्ण नगर की एक महिला अर्चना सैनी ने कोरोना पर अपनी लेखनीय से बेहतरीन कविता लिखा है। इस कविता में महिला ने देश में कोरोना वीर योद्धाओं की अपनी लेखनीय से प्रशंशा कर रहीं है।
◆हम घर में अपने रहें सुरक्षित
वे चौराहों पर खड़े रहे,,
कभी प्यार से कभी डांट के
कभी अनेकों रूप बदल के
सड़कों पर भी पहरा देते
ताकि हम सब बने रहें।।
◆फिर भी कुछ की गद्दारी देखो
रक्षक के कर काट रहे,
मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे।
◆समझदार पहनाते माला
मूर्खों ने पथराव किया,
फिर भी कुछ देश द्रोहियों ने
थूका अभद्र व्यवहार किया।
◆रक्षक बनकर डॉक्टर नर्से
कर्तव्य मार्ग पर अड़े रहे,
जाति पाति का भेद मिटा
हर पीड़ित के संग खड़े रहे।
◆मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे,
यह युद्ध नहीं महाभारत का
जिसमें तलवार उठानी है
यह युद्ध एक महामारी का
जिसमें हम सब सेनानी हैं।
◆लॉक डाउन का पालन कर
सहयोग अपना दे सकते हैं,
इस भारत माँ के ऋण से
थोड़ा तो उरिण हो सकते हैं।
◆अर्चना विनय कर जोड़ करें
कर्तव्य में हम सब अड़े रहे,
मैं नमन कलम से उन्हें करूं जो विपदा में संग खड़े रहे।

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