"बच्चो आओ दीप जलाये" कमल बाजपेई

◆धैर्य और सैयम के बल पर, 
आओ आगे बढ़ते जाए ।
बदलेगा दिनमान यहां पर,
परछाई अपनी बदलेगी ।
कुछ पुरूषार्थ मेरा भी होगा,
कुछ ईश्वर की कृपा रहेगी ।
हम सब मिलकर यत्न करेंगे,
रत्न यहाँ पर मिलना तय है ।
जीवन इतना कठिन नही है,
हर प्रश्नों का उत्तर निश्चित ।
माना हमने कठिन घड़ी है,
तो क्या डर कर हम सो जाएं ।
मानवता की पौध न रोपे,
बच्चो को हम क्या सिखलाये ।
कापुरुषो का जीवन जीना,
हमने सीखा कभी नही है ।
धैर्य और सैयम के बल पर,
आओ आगे बढ़ते जाए ।
बच्चो आओ दीप जलाये ।
◆घना अँधेरा मिटना तय है,
एक एक से होता अक्षय ।
राक्षस कितना ही विशाल हो,
पर अपना इतिहास साक्ष्य है ।
काल रात्रि का भी मर्दन तो,
दुर्गा जी ने यहा किया है ।
घटना भरी पड़ी है सारी,
शंकर पर जब संकट आया ।
आधा पुरुष बने तुम नारी,
भूमंडल तक डोल उठा था ।
थर थर कांपी दुनिया सारी,
तांडव नृत्य किया था तुमने ।
खुली तीसरी आंख तुम्हारी,
शांत हुआ सब राग द्वेष तब ।
शृष्टि प्रफुल्लित वारी न्यारी,
आई खुशी सभी चेहरो पर ।
जय त्रिपुरारी जय त्रिपुरारी,
दोनो मिलकर साथ चलो तुम ।
घना अंधेरा मिटना तय है,
बच्चो आओ दीप जलाये ।
◆दोषी यहां बहुत सारे है,
सबके अलग अलग नारे है ।
स्वार्थो से भरपूर यहां पर,
मानवता से दूर यहां पर ।
भरा छलावा और दिखावा,
अति घमंड में चूर यहां पर ।
पर सब यहां कहाँ चलता है,
बहुत चतुर अब यह जनता है ।
आदर्शो पर चलना सीखो,
मानवता हित जीना सीखो ।
अब तो चेतो देखो भाई,
प्रकृति यही तो कहने आई ।
मिलजुल कर रहना तुम सीखो,
बांट बांट कर खाना सीखो ।
कृष्ण सुदामा साथ रहे अब,
पिछले तुम इतिहास को देखो ।
भाईचारे को अपनाओ,
सपनो से सुंदर देश बनाओ ।
घना अंधेरा मिटना तय है,
बच्चो आओ दीप जलाये ।
- written by  कमल बाजपई

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