"माँ" (कमल बाजपेई)

माँ प्यार का संबल,
माँ जाड़े का कम्बल,
माँ का कोई नहीं सानी,
माँ प्यासे का पानी,
माँ भरती हर घाव,
ज्यों गर्मी में छाँव,
माँ पन्ना ने खोया पुत्तर,
माँ कठिन प्रश्न का होती उत्तर,
माँ शक्ति करे अभावों की पूर्ति,
माँ भगवान की जीवित मूर्ति,
बच्चों के लिए माँ कामयाबी का रास्ता,
माँ का आशीर्वाद भगवान भी न काटता,
माँ शब्द सुनते ही पवित्रता छा जाती है,
रोते हुए बच्चे को हँसी आ जाती है,
माँ तुम मिष्टी हो, पायस हो, सोना,
रोम - रोम ऋणी तेरा तुम्हे नही खोना,
माँ तुमने कतरा - कतरा बच्चों में बांट दिया,
सहे दुख बार - बार हमको बस प्यार दिया,
मन, बचन, कर्म, सब कर दिया न्योछावर,
सच्चा प्यार बच्चों की झोली में डाल दिया
निः स्वार्थ भावना की एक मात्र देवी,
बदले में मम्मी तुम कुछ भी न लेती,
सुंदर सा चेहरा , प्यार भरी बातें,
लोरी के गाने, सुंदर सी रातें,
बार - बार रूठना माँ का मनाना,
अभी - अभी याद है बचपन का जाना,
भोर सुबह उठना, मुझे भी उठाना,
अंगना में चिड़ियों का चावल चुगाना,
माँ के संग रहता है पूर्णता का भाव,
आज हूँ हज़ारों संग कमियों की छांव ।
◆Written by ~ कमल बाजपेई

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