मुझे नींद न आएएए मुझे चैन न आएएए: न जाने से ये कोरोना कहां से आ गया--
जियरा धक धक कर रहा
मिर्जापुर। आंखों में नींद और चेहरे पर जितनी अधिक बेचैनी दिखे तो समझिए प्रशासन का वह उतना बड़ा अफसर है । कोरोना के प्राणलेवा हमले से बचने-बचाने में क्या क्या करना पड़ रहा है, ये तो यही जाने लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनता का भी हार्ट-बीट बढ़ा हुआ है ।
धक धक करता जियरा- जिला प्रशासन गुरुवार, शुभ बुद्ध पूर्णिमा तिथि को भारी खुशी के बीच जिले को ग्रीन जोन का तोहफा देने जा रहा था। सुबह से ही DM श्री सुशील कुमार पटेल को लोग फोन कर इस संबन्ध में बधाई दे रहे थे कि उनके कुशल और चुस्त फील्डिंग से पॉजिटिव निगेटिव में बदल रहे है लेकिन खुशी की महफ़िल सजने के कुछ ही लम्हे के पहले ऐसी बिजुरी गिरी कि बना बनाया खेल बिगड़ गया । कोरोना क्रिकेट के खेलकी तरह अनिश्चितता भरा खेल हो गया है । अंतिम बाल पर कौन जीतेगा या हारेगा, यह रोमांच बना रहता है ।
24 घण्टे में ही फर्क दिख गया- जहाँ गुरुवार को खुशियों की ठंडी ठंडी खुशबूदार हवाएं चल रही थीं वहीं शुक्रवार को चुभने वाली हवाएं चलने लगीं । DM श्री पटेल ने गुरुवार को मन बना लिया था कि ढील की सीमा बढ़ाई जाएगी लेकिन कछवा की महिला के पॉजिटिव होते उन्होंने ढील की योजना को फिलहाल बंद कर दिया ।
कॉपी-किताब, प्रिंटिंग प्रेस तथा स्टेशनरी की दुकानों को ढील देने के बाबत शुक्रवार को जब DM श्री पटेल से अनुरोध किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थितियों का अवलोकन वे कर रह रहे हैं । नकारात्मक स्थितियां हुई तो पूर्व की ढील को ही वापस लिया जा सकता है और सब ओके रहा तो पुस्तक, प्रेस और स्टेशनरी की दुकानों को प्रथम प्राथमिकता दी जाएगी ।
कछवा में बंदिशें- जुमे के दिन कछवा के 12 वार्डों में से 10 वार्डों में कड़े प्रतिबंध लगाने पड़ गए । ये वार्ड सील कर 11 हजार 400 का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है। नियम है कि यदि एक पॉजिटिव केस आता है तो ग्रामीण क्षेत्र में एक किमी दायरे में और शहरी क्षेत्र में 400 मीटर दायरे में एहतियातन कार्रवाई की जाती है । जबकि दूसरा आ जाता है तो ग्रामीण क्षेत्र में 3 किमी और शहरी क्षेत्र में 1 किमी दायरे को सील कर दिया जाता है।
मुख्य चिंता-मामला गड़बड़झाला इसलिए हो गया है कि दसियों हजार मुंबई, गुजरात तथा अन्य प्रांतों से लोग आ गए है । यही इक्का दुक्का जिले या आसपास का होता तो इतनी बेचैनी न होती । जो गैर प्रांतों से आए हैं, वे सब कोरोना के गढ़ हो गए हैं। इसलिए एलर्ट रहना प्रशासन जरूरी समझ रहा है।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
जियरा धक धक कर रहा
मिर्जापुर। आंखों में नींद और चेहरे पर जितनी अधिक बेचैनी दिखे तो समझिए प्रशासन का वह उतना बड़ा अफसर है । कोरोना के प्राणलेवा हमले से बचने-बचाने में क्या क्या करना पड़ रहा है, ये तो यही जाने लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनता का भी हार्ट-बीट बढ़ा हुआ है ।
धक धक करता जियरा- जिला प्रशासन गुरुवार, शुभ बुद्ध पूर्णिमा तिथि को भारी खुशी के बीच जिले को ग्रीन जोन का तोहफा देने जा रहा था। सुबह से ही DM श्री सुशील कुमार पटेल को लोग फोन कर इस संबन्ध में बधाई दे रहे थे कि उनके कुशल और चुस्त फील्डिंग से पॉजिटिव निगेटिव में बदल रहे है लेकिन खुशी की महफ़िल सजने के कुछ ही लम्हे के पहले ऐसी बिजुरी गिरी कि बना बनाया खेल बिगड़ गया । कोरोना क्रिकेट के खेलकी तरह अनिश्चितता भरा खेल हो गया है । अंतिम बाल पर कौन जीतेगा या हारेगा, यह रोमांच बना रहता है ।
24 घण्टे में ही फर्क दिख गया- जहाँ गुरुवार को खुशियों की ठंडी ठंडी खुशबूदार हवाएं चल रही थीं वहीं शुक्रवार को चुभने वाली हवाएं चलने लगीं । DM श्री पटेल ने गुरुवार को मन बना लिया था कि ढील की सीमा बढ़ाई जाएगी लेकिन कछवा की महिला के पॉजिटिव होते उन्होंने ढील की योजना को फिलहाल बंद कर दिया ।
कॉपी-किताब, प्रिंटिंग प्रेस तथा स्टेशनरी की दुकानों को ढील देने के बाबत शुक्रवार को जब DM श्री पटेल से अनुरोध किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थितियों का अवलोकन वे कर रह रहे हैं । नकारात्मक स्थितियां हुई तो पूर्व की ढील को ही वापस लिया जा सकता है और सब ओके रहा तो पुस्तक, प्रेस और स्टेशनरी की दुकानों को प्रथम प्राथमिकता दी जाएगी ।
कछवा में बंदिशें- जुमे के दिन कछवा के 12 वार्डों में से 10 वार्डों में कड़े प्रतिबंध लगाने पड़ गए । ये वार्ड सील कर 11 हजार 400 का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है। नियम है कि यदि एक पॉजिटिव केस आता है तो ग्रामीण क्षेत्र में एक किमी दायरे में और शहरी क्षेत्र में 400 मीटर दायरे में एहतियातन कार्रवाई की जाती है । जबकि दूसरा आ जाता है तो ग्रामीण क्षेत्र में 3 किमी और शहरी क्षेत्र में 1 किमी दायरे को सील कर दिया जाता है।
मुख्य चिंता-मामला गड़बड़झाला इसलिए हो गया है कि दसियों हजार मुंबई, गुजरात तथा अन्य प्रांतों से लोग आ गए है । यही इक्का दुक्का जिले या आसपास का होता तो इतनी बेचैनी न होती । जो गैर प्रांतों से आए हैं, वे सब कोरोना के गढ़ हो गए हैं। इसलिए एलर्ट रहना प्रशासन जरूरी समझ रहा है।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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