रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के बीच हुए लाक डाउन से अहमदाबाद में फंसे रायबरेली की महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के 5 श्रमिक वहीं की एक बस से 12 लोगों के साथ छठवें दिन गुरुवार को रायबरेली पहुंचे। पांच युवक कोतवाली क्षेत्र के मऊ शर्की गांव के थे। रोजी रोजगार के सिलसिले में 11 माह पहले ही अहमदाबाद गए थे। वहीं मजदूरी करके जीविकोपार्जन करते थे।
आपको बता दें कि, मऊ शर्की गांव के दयाशंकर पुत्र बिंदेस्वरी ने रुंधे स्वर में बताया कि जानित रहेन हुंवा कोरोना फैल जाई। उसके साथी पवन कुमार पुत्र रामबहादुर ने बताया कि, बस वाला ₹3000 प्रति सवारी लिहिसि। हम पांच जने 15000 रुपया दैके रायबरेली पहुंचेन। रायबरेली से टेंपो से महराजगंज आएंन हन। अब पैदरै घर पहुंच जाबै। बस भैया खाए पिए के कोनो दिक्कत नहीं भय। जहां बस रुकी हुंवै खाय पियै का मिला। अऊ पैसा कहूँ खर्च नहीं करै का परा।
उसने बताया वहां सरकारी सुविधा कौनो नहीं मिली। कुछ पैसा जोरे गाठेन रहय। लाक डाउन खुलै कै इंतजार करित तो यहो पैसा खर्च होइ जात। गाओं ना पहुंच पाइत। गांव के ही 3 अन्य लोग लव कुश पुत्र राधेश्याम, जितेंद्र यादव पुत्र श्याम लाल यादव एवं अमरेश कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद सहित पांच लोगों के चेहरे पर कोरोना वायरस का संकट, लाचारी एवम थकावट साफ झलक रहा था।
पांचों युवा मजदूरों ने पूछने पर बताया कि, अब हम लौट के अहमदाबाद न जाबे। हिन्यै गुजर-बसर करि ल्याबै। यह पूछने पर कि अन्य 7 लोग कहां गए तो उनका जवाब था वऊ रायबरेली के इर्द गिर्द के रहे।
महराजगंज/रायबरेली: कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के बीच हुए लाक डाउन से अहमदाबाद में फंसे रायबरेली की महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के 5 श्रमिक वहीं की एक बस से 12 लोगों के साथ छठवें दिन गुरुवार को रायबरेली पहुंचे। पांच युवक कोतवाली क्षेत्र के मऊ शर्की गांव के थे। रोजी रोजगार के सिलसिले में 11 माह पहले ही अहमदाबाद गए थे। वहीं मजदूरी करके जीविकोपार्जन करते थे।
आपको बता दें कि, मऊ शर्की गांव के दयाशंकर पुत्र बिंदेस्वरी ने रुंधे स्वर में बताया कि जानित रहेन हुंवा कोरोना फैल जाई। उसके साथी पवन कुमार पुत्र रामबहादुर ने बताया कि, बस वाला ₹3000 प्रति सवारी लिहिसि। हम पांच जने 15000 रुपया दैके रायबरेली पहुंचेन। रायबरेली से टेंपो से महराजगंज आएंन हन। अब पैदरै घर पहुंच जाबै। बस भैया खाए पिए के कोनो दिक्कत नहीं भय। जहां बस रुकी हुंवै खाय पियै का मिला। अऊ पैसा कहूँ खर्च नहीं करै का परा।
उसने बताया वहां सरकारी सुविधा कौनो नहीं मिली। कुछ पैसा जोरे गाठेन रहय। लाक डाउन खुलै कै इंतजार करित तो यहो पैसा खर्च होइ जात। गाओं ना पहुंच पाइत। गांव के ही 3 अन्य लोग लव कुश पुत्र राधेश्याम, जितेंद्र यादव पुत्र श्याम लाल यादव एवं अमरेश कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद सहित पांच लोगों के चेहरे पर कोरोना वायरस का संकट, लाचारी एवम थकावट साफ झलक रहा था।
पांचों युवा मजदूरों ने पूछने पर बताया कि, अब हम लौट के अहमदाबाद न जाबे। हिन्यै गुजर-बसर करि ल्याबै। यह पूछने पर कि अन्य 7 लोग कहां गए तो उनका जवाब था वऊ रायबरेली के इर्द गिर्द के रहे।


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