किसानों की चिंता का कारण बनी सूखी पड़ी नहरें

रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से दुनिया परेशान हलकान है। दाने-दाने को तरसते मजदूर, गरीब तथा अन्नदाता सरकार की मेहरबानी पर निर्भर है। वहीं दूसरी तरफ अपनी फसलों को कड़े परिश्रम और मेहनत से पैदा कर दुनिया का पेट भरने वाला अन्नदाता सूखी पड़ी नहरो को देखकर चिंतित है।
      आपको बता दें कि, क्षेत्रीय किसानों रामाकांत अवस्थी, शिव बहादुर पांडेय, विद्यासागर अवस्थी एडवोकेट, ज्योति प्रकाश अवस्थी एडवोकेट, दिनेश मिश्रा, हौंसिला प्रसाद मिश्रा, रामकिशोर शुक्ला, पूर्वी दीन आदि का कहना है कि, धान की बेढ़ लगाने व पिपिरमिंट की सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है, तो नहरों में पानी ही नहीं है। समय से नहरों में पानी नहीं आएगा तो फसलें प्रभावित होंगी। पिछली गेहूं की फसल अधिक बारिश होने के कारण बहुत अच्छी नहीं हुई है। किसानों का बहुत नुकसान हो गया है। वहीं लगभग तीन महीने से लाक डाउन की स्थिति में घर में जो बची धनराशि थी, वह बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी है। एक एक रुपए को तरसते किसानों को भविष्य की चिंता सता रही है।
       विभाग की लापरवाही के चलते समय से नहरों में पानी ना आना चिंता का विषय बना हुआ है। दूसरी चिंता इस वर्ष पाकिस्तान की ओर से आई टिड्डियो से है। अधिकांश किसान टिड्डियो के आतंक से अभी से ही भयभीत दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि, अभी तक देश के लगभग 6 राज्यों में टिड्डियों ने अपना आतंक फैला रखा है।
       जिसमें कि, उत्तर प्रदेश के लगभग 15 जिले शामिल है। इसलिए किसानों को टिड्डियो का भय भी सताना स्वभाविक है। फिलहाल सरकार द्वारा इस आपदा से निपटने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जब आफत आती है, तो बहुत कुछ अपने साथ मिटा कर ले जाती है। हलाकि अभी किसानों की मूलभूत आवश्यकता नहरो  में पानी की है। जिसे विभाग को अतिशीघ्र पूरी करते हुए नहरों में पानी छोड़ना चाहिए।

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