लेखक वरिष्ठ पत्रकार है
रायबरेली: जब मैं बहुत छोटा था, तब मेरी माँ कहा कहती थी कि, बेटा! “कुत्ते भौकते रहते है, हाथी अपनी मस्त चाल चलता रहता है। कई वर्षों तक यह बात समझ नहीं पाया। ठीक तरह से तो तारीख भी याद नहीं, किंतु सन् 2019 के उस दिन तक़रीबन साढ़े दश बजे मुझे मेरी माँ की कही हुई बात का गहराई से मतलब समझ आया।
आपको बता दें कि, हर दिन की आदत के अनुसार उस दिन भी मैं सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा लिखे गए लेख समाचार और आर्टिकल पढ़ रहा था, कि अचानक कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई पड़ी। वह लगातार भौंक रहे थे। मैंने अपने घर के पीछे छप्पर के नीचे से निकलकर बाहर गलियारे की तरफ देखा, तो एक विशाल हाथी हमारे घर के सामने से कही जा रहा था, और उस हाथी पर उसका महावत बैठा हुआ था। (ग्रामीण क्षेत्रों में आप अक्सर इस तरह का नजारा देख सकते है)
उस हाथी के आस-पास रोड पर तक़रीबन 3 या 4 कुत्ते इकठा हो गए थे, और लगातार उस पर भौंक रहे थे। पर हाथी अपनी मस्ती में चला जा रहा था, उन कुत्तो के भौंकने का उस हाथी पर कोई असर नहीं हो रहा था, और ना ही हाथी के स्वाभाव में कोई परिवर्तन हुआ, ना ही वह रुका, ना ही उसने अपनी दिशा बदली और ना ही उसने अपनी गर्जना से कुत्तों को जवाब दिया। बस वो बिलकुल शांत था और अपनी स्वाभाविक चाल से घीरे-धीरे वह हमारे घर के गलियारे से आगे निकल गया।
मैं अपने दरवाजे से उस नज़ारे को लगातार देख रहा था। जैसे ही हाथी हमारे घर के गलियारे से आगे निकला, वैसे ही हमारी गली के कुत्तों ने धीरे-धीरे अपना भौंकना लगभग बंद कर दिया था। किंतु जैसे ही वह हाथी हमारे घर की गली से डामरीकृत रोड पर पहुंचकर आगे बढ़ा वैसे ही उस मोहल्ले के 4/6 कुत्तो ने उस हाथी पर भोकना शुरू कर दिया। परंतु उस हाथी ने तब भी अपना शांत स्वाभाव नहीं छोड़ा और उन कुत्तों को जवाब अपनी गर्जना से नहीं दिया। हलाकि हाथी की एक गर्जना ही काफी थी, उन कुत्तों को चुप करने के लिए, परंतु हाथी ने ऐसा नहीं किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग आप किसी भी गाँव या बाजार में चले जाएं वहां आपको हर गली और नुकड़ पर 4/6 लावारिस कुत्ते जरूर दिखेंगे। बहुत बुरी दुर्दशा इन कुत्तो की है। यह मुझे तब समझ में आया जब मैंने भारत की राजधानी दिल्ली में कुत्तों की परवरिश इंसानों को करते देखा। वहाँ पर आप को तक़रीबन हर घर में या तो पालतू बिल्ली या पालतू कुत्ता अवश्य ही मिलेगा।
भारत की राजधानी दिल्ली में आपको बहुत कम संख्या में लावारिस कुत्ते या बिल्ली रोड पर मिलेगें। वहाँ पर हर कुत्ते और बिल्ली को वो सारी सुविधा मिलती है, जो एक इंसान को मिलती है। उनका पालन पोषण और रहन सहन सब कुछ बिलकुल इंसानों की तरह ही किया जाता है। परंतु यह सौभाग्य! ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 99.99% कुत्तो को नहीं मिलता है। इस कारण वे आपको हर गली या नुकड़ पर अनायास ही भौंकते दिखाई देंगे।
खैर! उस हाथी को देख कर मुझे मेरी माँ की बचपन में कही हुई बात समझ में आ गई। मैं उस दिन समझ गया कि, चाहे कितने भी अलग-अलग कुत्तों ने हाथी पर भौंका हो, चाहे उन कुत्तो ने उस हाथी का उनके इलाके में घुसने का विरोध किया हो। किंतु हाथी ने अपना संयम नहीं खोया, अपना स्वाभाव नहीं बदला, वो शांत रहा और अपने पथ पर चलता हुआ आगे निकल गया। परन्तु कुत्ते भौंकते रह गए और फिर वे चुप भी हो गए।
साथियों! मैं इस नज़ारे को देखकर उस दिन यह बात सीखी है कि, चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, चाहे कैसे भी हालात हो, मुझे अपना संयम नहीं खोना चाइए। मुझे अपने मन की शांतता बनाये रखना चाहिए, और अपने काम से काम करते रखना चहिये।
हम सभी के जीवन में हमारे आस-पास, हमारे घर पर, हमारे कार्यालय में, या सार्वजनिक जगहों पर कई ऐसे लोग हमें जाने अंजाने में उकसाने या भड़काने की कोशिश करते है। वे लोग या तो आपको ताना मारेंगे, या आपका मजाक उड़ायेंगे, या आप पर कोई टीका-टिपणी करेंगे, या फिर आप को उकसायेंगे, कि आप उनकी बातों का उनको तुरंत जवाब दो और फिर आप उन के साथ बहस करो।
अक्सर उपर्युक्त कही हुई बाते हमारे साथ होती ही है। कभी आपकी पत्नी आपको ताने मारेगी, या ऐसे शब्द कहेगी जिससे आप आपना संतुलन खो बैठेंगे, और फिर पत्नी के साथ एक बड़ी बहस शुरू कर दोगें। जिससे घर में एक अशांति का माहौल बन जाता है। फिर आपके बच्चे यह सब देखते है। कभी पति कुछ ऐसी बात बोल देते है कि, जिसे पत्नी बर्दास्त नहीं करती और अपना शंयम खो देती है, फिर घर में आरोप प्रत्यारोप से शब्दों का एक महायुद्ध शुरू हो जाता है।
यदि हम इस बात पर विचार करें! कि, हम चाहे कहीं भी रहे, हमारे आस-पास हमेशा कोई ना कोई तो होता ही है, जो हमे कुछ ना कुछ बोलता रहता है। जाने अनजाने हमें उकसाने की कोशिश करता रहता है। जिसका हम अक्सर विरोध मुंह खोल कर दे देते हैं। जिसकी वजह से कई बार रिश्तो में दरार भी पड़ जाती है।
यदि हम उस हाथी की तरह चुप रहे और अपनी प्रतिक्रिया ना दे, सोच समझ कर जवाब ढंग से दे, तो मेरा ऐसा मानना है कि, हमारे रिश्तो में मजबूती आयेगी और प्यार तथा आपसी सौहार्द बना रहेगा।
साथियों! इंसान का स्वाभाव ऐसा है कि, हर कोई बोलना चाहता है, सुनना कोई नहीं चाहता है। लेकिन स्वाभाव को बदला जा सकता है। यदि आप बदलना चाहो तो...?
यह लेखक के निजी विचार है।
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