1 जुलाई डॉक्टर्स-डे के अवसर पर: त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश सभी चिकित्सक ही हैं


संक्रामक बीमारी के रूप धरे मधु और कैटभ का वध महिला चिकित्सक के रूप में मां दुर्गा को करना पड़ा था--
बौद्धिक क्षमता प्रदान करने वाले ब्रह्माजी ब्रेन के डॉक्टर हैं । उनको 4 सिर है । वे ब्रेन की बीमारियों के इलाज के लिए खुद मेडिकल कालेज के पहले नम्बर पर मेडिकल अध्ययन-अध्यापन, दूसरे नम्बर पर मेडिकल टेस्ट, तीसरे नम्बर पर उपचारके लिए सिर्फ औषधीय प्रयोग और चौथे नंबर पर ऑपरेशन के चिकित्सक प्रतीत होते हैं ।
    ऑपरेशन के ज्ञान के लिए ब्रह्माजी एक बड़ा त्याग करते हैं ।  इस ज्ञान के लिए महादेव से वे ब्रेन की जटिलताओं को समझते हैं  और अपने पाँचवें सिर का स्थायी ऑपरेशन करा लेते हैं ।
    शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा को 5 सिर थे, जिसमें एक का महादेव ने आपरेशन कर दिया था ।
विष्णु हैं फिजीशियन- सृष्टि के पालक विष्णु जी फिजीशियन हैं । वे विषाणुओं से भरे शरीर में जब भी किसी दैत्य रूपी बीमारी का आक्रमण होता है तो वे चिकित्सा के सुदर्शन-चक्र से उसे नष्ट करते हैं । ताकि शरीर सुदर्शन योग्य रहे । उनके स्वर्ग की केमिकल-फैक्ट्री से गंगा रूपी सिरप सुलभ हुई है ।
महादेव सर्जन और औषधियों के विशेषज्ञ- महादेव ने अपने ही पुत्र गणेश के सिर पर हाथी के सिर का प्रत्यारोपण इसलिए किया कि किसी संरचना को स्वस्थ और जीवंत बनाए रखने के लिए उपलब्ध जो भी साधन हो, उसका कम्पोजिशन (संयोजन) किया जा सके ।
   इसके अतिरिक्त समुद्र-मंथन में विष-तत्व के परीक्षण के लिए उन्होंने अपने शरीर को ही केमिकल-परीक्षण संस्थान बना दिया ।
   इसी तरह शास्त्रों के आयुसार एक बार महादेव ने धरती के सभी वृक्षों एवं वनस्पतियों का इंटरव्यू लेकर पूछा कि सभी अपने अपने औषधीय गुणों की जानकारी दें।  सभी ने जो जवाब दिया । उसे बगल बैठे उनके पुत्र गणेशजी ने लिख लिया। यहीं से औषधीय जानकारियों की शुरुआत हुई। चन्द्रमा को सिर पर इसलिए रखते हैं क्योंकि उससे अमृत (विटामिन, मिनरल्स) निकलता है । गले में सर्प से रैबीपुर इंजेक्शन बनता है। 
इस प्रकार चिकित्सक (डॉक्टर) को भगवान का दर्जा दिया गया है। यह दर्जा बना रहे, इसके लिए हर पक्ष को सजग रहना पड़ेगा।
श्रीदुर्गासप्तशती के अनुसार योगनिद्रा (1 जुलाई-देवशयनी एकादशी) में हुए भगवान विष्णु के कान में इंफेक्शन से मधु और कैटभ विषाणुओं ने संक्रामक रूप जब लिया तब दुर्गा यानी मेडिकल साइंस को इस दुर्गम विषाणुओं के वध के लिए संघर्ष करना पड़ा था। वे महिला-चिकित्सक हैं ।
                    ©सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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