बीते 3 माह में हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं दर्जनों राहगीर
वीआईपी लोगों ने सड़क से गुजर ना किया बंद
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज से इन्हौना के लगभग 30 किलोमीटर के मार्ग में यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि, सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क है, अगर आपको महराजगंज से इन्हौना जाना है, तो 40 मिनट का यह सफर पूरा करने में आपको 4 घंटे भी लग सकते हैं। यह भी गारंटी नहीं है की महराजगंज से चलकर आप इन्हौना सही सलामत पहुंच जाएं। हालांकि लोक निर्माण विभाग का दावा है कि, इस सड़क पर प्रतिवर्ष गड्ढा भराई और रिपेयरिंग का कार्य नियमित रूप से कराया जाता है। कार्य कराने में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सरकारी खजाना खाली करने में कतई हिचक नहीं करते हैं। यह बात अलग है कि, उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों और नेताओं को कागज पर हुए काम को देखकर ही संतोष हो जाता है, जबकि धरातल पर शासन को प्रेषित रिपोर्टों के ठीक उलट सड़क का बुरा हाल, आम जनता के लिए समस्या बन गई है।
आपको बता दें कि, महराजगंज सुखाई के पुरवा तिराहे से इन्हौना तक यह बताना मुश्किल है कि, सड़क कहा गड़बड़ नहीं है। सुखई के पुरवा से ही कैर नैय्या पुल तक यह पता करना वास्तव में मुश्किल हो जाता है कि, कहां गड्ढा हैं और कहां सड़क।
दर्जनों बार साइकिल सवार से लेकर दोपहिया वाहनों के राहगीर चोटिल हो चुके हैं। वहीं दो पहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का सिलसिला भी चलता रहता है। मोन गांव से औसेरी के पुरवा के पास तक लगता है की सड़क हैही नहीं। जरा सी बरसात होने पर गड्ढों में पानी भर जाता है। जिससे बचा-खुचा तारकोल और गिट्टी वाहनों के आने जाने से गायब हो जाती हैं।
यही हाल मऊ गांव से लेकर सेमरौता तक का है। जहां सड़क दर्जनों जगह जमीन में धंस गई है और दो दो फीट गहरे गड्ढे बने हुए हैं। कई बार तो चार पहिया वाहन यहां आकर जमीन में धंस जाते हैं। जिससे सड़क पर घंटों जाम लगा रहता है। शेष जगह भी कमोवेश यही हाल है। जिससे इस सड़क पर तेज रफ्तार से वाहन चलाना खतरे की घंटी बजाता है।
विदित हो कि, इस सड़क पर कहने को तो बड़ी-बड़ी हस्तियां जिसमें तिलोई विधायक राजा मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री सुरेश पासी सहित बछरावा क्षेत्र के विधायक रामनरेश रावत जैसी हस्तियों का आवागमन इसी सड़क से होता है। लेकिन पता चला है कि, इनके वाहन भी कई बार जाम में फंसे, तो इन लोगों ने तो अपना रास्ता ही बदल लिया है।
पूरे क्षेत्र के वाहन मालिकों ने इस सड़क से तौबा कर लिया है। क्योंकि आए दिन वाहन क्षतिग्रस्त होते रहते हैं। सड़क के बारे में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का दावा है कि, हर साल गड्ढों की भराई और सड़क की व्यापक रिपेयरिंग का कार्य विभाग द्वारा कराया जाता है। बरसात बीतने के बाद पुनः काम करा कर क्षतिग्रस्त सड़क को ठीक कराया जाएगा। लेकिन हमारे संवाददाता ने जब क्षेत्रीय ग्रामीणों से बातचीत की, तो विभाग की कलई खुल गई।
क्षेत्र के रहने वालों रमाकांत अवस्थी, सर्वेश कुमार, डीडी मिश्रा, हौसिला प्रसाद मिश्रा, दुर्गेश शुक्ला, विनय कुमार, राम हरक, शिवप्रसाद, दीनानाथ, चंद्रभान, जगजीवन ने हमारे संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया कि, लोक निर्माण विभाग की खाऊ कमाऊ नीति के चलते क्षेत्र के पचासों हजार नागरिकों का जीवन नारकीय हो गया है। आए दिन लोग चोट खाते रहते हैं साइकिल मोटरसाइकिल तथा चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं। लेकिन इनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। उपर्युक्त लोगों का कहना है कि, विभागीय अधिकारी आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं। इसलिए इस सड़क की स्थिति भयावह हो गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, अगर विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार ना लाया और क्षतिग्रस्त सड़क को कायदे से ठीक न किया गया, तो कोरोना महामारी के चलते लागू किए गए अनलॉक डाउन समाप्त होते ही व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा, और लोक निर्माण विभाग की ईट से ईट बजा दी जाएगी। इन लोगों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, विधायक तिलोई, राज्य मंत्री सुरेश पासी और बछरावां विधायक राम नरेश रावत से भी अपील की है कि, लोक निर्माण विभाग के व्यापक भ्रष्टाचार को संज्ञान में लेते हुए शासन स्तर पर इनके विरुद्ध लिखा पढ़ी करें, साथ ही लाखों की तादात में इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों के हित में क्षतिग्रस्त सड़क को उचित मानक के अनुरूप दुरुस्त कराने की मांग की है।




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