History of Dalmau: डलमऊ का इतिहास और हिंदी कवि निराला की रचनास्थली।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी

डलमऊ/रायबरेली: डलमऊ का साहित्यिक इतिहास में भी एक अनूठा स्थान है। क्योंकि यह वही स्थान है, जहाँ किले पर बैठ कर प्रसिद्ध हिन्दी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी ने नीचे के दृश्यों को देखते हुये अपनी कवितायें लिखी। डलमऊ में नवाब शुजाउद्दौला का इब्राहिम शारिक महल भी है।

     आपको बता दें कि, डलमऊ बड़े मठ के स्वामी गीतानंद गिरि बताते हैं कि, पवित्र गंगा नदी के किनारे पर स्थित डलमऊ रायबरेली जिले का ऐतिहासिक स्थल है। इस शहर के आकर्षणों में डल राजा का किला, बड़ा मठ और महेश गिरि मठ प्रमुख हैं। डलमऊ का साहित्यिक इतिहास में भी एक अनूठा स्थान है, क्योंकि यह वही स्थान है, जहाँ किले पर बैठ कर प्रसिद्ध हिन्दी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी ने नीचे के दृश्यों को देखते हुये अपनी कवितायें लिखी थी। डलमऊ में नवाब शुजाउद्दौला का इब्राहिम शारिक महल भी है। पर्यटक आल्हा ऊदल की बैठक देखने के साथ-साथ डलमऊ पम्प नहर पर चहल कदमी का आनन्द भी ले सकते हैं।

    आइए सुनते हैं, डलमऊ बड़े मठ के स्वामी गीतानंद गिरि से डलमऊ और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कहानी उनकी जुबानी।

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