प्रशांत शर्मा
डलमऊ/रायबरेली: पेड़-पौधों में भी जान होती है, वो भी सांस लेते है और छोड़ते हैं। काटने पर उनको भी दर्द होता है। विज्ञान ने पहले ही बता दिया है। तो ये भी जानते होंगे कि, पेड़-पौधे भी इंसान की तरह बीमार होते हैं।लेकिन उनका इलाज कैसे होता है। ये कम लोगों को पता होगा ये कम लोग करते होंगे। कोई पेड़ मुरझा गया, तो काट दिया जाता है, लेकिन इसे हरा भरा भी किया जा सकता है। ऐसी ही एक बानगी पेश की है रायबरेली के डलमऊ में पृथ्वी संरक्षण टीम ने।
आपको बता दें कि, टीम के मुखिया राजेंद्र वैश्य ने संदीप चौधरी और अपनी टीम के साथ मिलकर आंधी में उखड़ गये एक वटवृक्ष को फिर से पुनर्स्थापित कर दिया। मुराई रेलवे क्रासिंग के पास आंधी में एक वटवृक्ष उखड़ गया था, मगर वृक्ष मेन जीवन की इच्छा बहुत बलवती थी। इसीलिए वह गिरने के बावजूफ मिट्टी से जुड़ा रहा। लेकिन फिर से उठ पाना उसके लिए असम्भव था। किंतु वृक्ष की जीने की ख्वाहिश को साकार रूप दिया राजेंद्र वैश्य और उनके साथियों ने। इसके लिए बक़ायदा एक जेसीबी मशीन मंगाकर खुदाई की गयी और सभी लोगों ने मिलकर वटवृक्ष को पुनर्स्थापित कर दिया।
अपनी इस मुहिम के बारे में बताते हुए पृथ्वी संरक्षण के अध्यक्ष राजेंद्र वैश्य कहते हैं कि, वृक्षों के बिना अपने अस्तित्व की कल्पना करना ही बेमानी है। यह वट प्रजाति के ही वृक्ष हैं, जो मानव निर्मित प्रदूषण के दौर में हमें स्वस्थ रखते हैं।
इस दौर में जब विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुँध कटाई हो रही है, उस समय पृथ्वी संरक्षण की ऐसी पहल सुकून देने वाली है।

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