◆ज्यों नारी श्रृंगार अधूरा, बिन माथे की बिंदी,
भारत माँ के भाल विराजे, अपनी प्यारी हिंदी ।
◆शब्द - शब्द सम्मान भरा है, वाक्य सुनाते लोरी,
नवरस इसे सँवारते, ज्यों 'गवने' की गोरी ।
◆देश काल यह भाषा बोली, हिंदी हमको प्यारी,
बनी राष्ट्र भाषा अब तक ना, यही वितृष्णा भारी ।
◆इंतज़ार अब बहुत हो गया, सरकारों ऐलान करो,
बाट जोहते उम्र हो गई, झोली भरो हमारी ।
◆Written by ~ कमल बाजपेई


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