◆"विधाता की कलाकारी

◆"विधाता की कलाकारी"

◆तुम्हें आबाद हो महफ़िल, हमें तनहाइयाँ प्यारी, तुम्हें खिलता मिले उपवन, हमें बंज़र ज़मी सारी,

◆लगा चाँदी का चम्मच मुँह, जहाँ में आये तुम जबसे, अथक मेहनत अभावों से, हमारी दोस्ती - यारी ।

◆बनाया था घरौंदा एक, बड़ी मेहनत से हम सबने, तुम्हारी सरपरस्ती थी, हमारी कामना न्यारी,

◆सभी एक साथ बैठेंगे, ढ़ेर सी मस्तियाँ होंगी, तुम्हारे आगमन से ही, मिले खुशियाँ हमें सारी ।

◆सभी का भाग्य अपना है, सभी का एक सपना है, जहाँ में है बहुत सारे, उन्हीं में कोई अपना है,

◆मिलन होना बिछुड़ जाना, इसे संयोग कहते हैं, कहाँ कोई समझ पाया, विधाता की कलाकारी।

◆समय का चक्र चलता है, सभी को यह नचायेगा, सुना है काल में गति है, सभी के पास जायेगा,

◆मिलेगी गर कभी फुरसत, हमारे पास आने की, कहूँगा तू वजह बन जा, सभी के मुस्कुराने की ।

◆Written by ~ कमल बाजपेई

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