◆ना बोले तो ना बोले
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◆पहली बार सिले था मुँह को, जो वक्ता था पक्का
◆चारों तरफ रहस्य व्याप्त था, हर कोई हक्का-बक्का।
◆जिम्मेदार सभी गूगे थे, कोई मुँह ना खोले
◆पूछ रहे थे सभी माजरा, ना बोले तो ना बोले।
◆पहली बार भयावह मंज़र, चेहरे सूखे- सूखे
◆हांथो में थे लिए मशालें, जबड़े भींचे- भींचे।
◆सहमे- सहमे सभी खड़े थे, हलचल ऊपर नीचे
◆प्रश्नों का हल ढूँढ रहे थे, ऑखे मीचे- मीचे।
◆है तो कोई उलझा चक्कर, जो दिखता है उससे हटकर
◆सत्य समझ से परे मिलेगा, सही दिशा में खोजो डटकर।
◆रचयिता,,,,कमल वाजपेयी,,,,

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